Happy Good Night : क्या रात में आपकी भी बिस्तर की साइड को लेकर होती है रोज बहस... तो आइए जाने फिर इसके पीछे क्या है माजरा
Bistar ka pasndida karvat : करवट लेकर सोने से दिमाग से टॉक्सिन्स आसानी से बाहर निकलते हैं, जिससे अल्जाइमर का खतरा कम हो सकता है।
Bistar ka pasndida side : क्या आपका भी बिस्तर में कोई पसंदीदा साइड है। और अपनी साइड को लेकर पार्टनर से हमेशा रात में आपकी बहस होती है। अगर ऐसा है तो ये कोई आपकी आदत नहीं, बल्कि इसके पीछे साइकोलॉजी है।
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि बिस्तर की कोई खास साइड चुनना कोई तुक्का नहीं है इसके पीछे हमारा मनोविज्ञान और गहरी आदतें छिपी हैं। आइए जानते हैं।
बाईं ओर सोने वाले लोग जीवन में ज्यादा खुश और आशावादी
यूके में 2011 में हुई एक स्टडी में पाया गया कि, बाईं ओर सोने वाले लोग जीवन में ज्यादा खुश और आशावादी पाए गए। दाईं ओर सोने वाले लोग थोड़े गंभीर और रूटीन फॉलो करने वाले माने गए। अक्सर कपल्स रिश्ते की शुरुआत में ही अपनी साइड तय कर लेते हैं और फिर शायद ही कभी उसे बदलते हैं।
करवट लेकर सोने से अल्जाइमर का खतरा कम
करवट लेकर सोना हमारे दिमाग के 'वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम' के लिए अच्छा हो सकता है। जानवरों पर हुई स्टडी बताती है कि करवट लेकर सोने से दिमाग से टॉक्सिन्स आसानी से बाहर निकलते हैं, जिससे भविष्य में अल्जाइमर जैसी भूलने की बीमारी का खतरा कम हो सकता है।
आइए जानते हैं कि किस करवट सोने का क्या असर होता है?
• दाईं करवट: एक स्टडी के अनुसार, दाईं ओर सोने वालों को सबसे अच्छी नींद आती है। इससे प्रमुख अंगों और नसों पर कम दबाव पड़ता है।
• बाईं करवट: अगर आपको एसिडिटी या रिफ्लक्स की समस्या है, तो बाईं ओर सोना बेहतर है क्योंकि इससे पेट, भोजन नली से नीचे रहता है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह साइड अच्छी मानी जाती है।
• पीठ के बल सोना: जो लोग पीठ के बल सोते हैं, उनकी नींद बार-बार टूटने और खर्राटे या 'स्लीप एपनिया' का खतरा ज्यादा रहता है।
