Bharat ke rashtragan ki khasiyat kya hai: जन गण मन गीत क्यों है खास! कैसे बना यह भारत का राष्ट्रगान; जानिए राष्ट्रगान का 115 साल पुराना इतिहास
Bharat ke rashtragan ki khasiyat kya hai: रविंद्रनाथ टैगोर ने अपनी रचना जन गण मन से भारत के हर व्यक्ति के अंदर देशभक्ति की अलख जगाई। आइए जानते हैं भारत के राष्ट्रगान की विशेषताएं..

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31 जनवरी 2026: भारत जब अंग्रेजों के कब्जे में था तब अनेक क्रांतिकारियों ने अपना सब कुछ बलिदान करके हमें आजादी दिलाई थी, भारत का राष्ट्रीय ध्वज शान से लहराया था। कुछ क्रांतिकारी ऐसे थे जिन्होंने हथियार उठाया और कुछ ऐसे थे जिन्होंने कलम के दम पर यह कारनामा कर दिखाया। उस समय ऐसे ही एक महान कवि हुए रविंद्रनाथ टैगोर, जिन्होंने अपनी रचना जन गण मन से भारत के हर व्यक्ति के अंदर देशभक्ति की अलख जगाई। यह गीत अपने चंद लाइनों में पूरे भारत की विशेषताओं को एक साथ प्रदर्शित करता है। आइए जानते हैं भारत के राष्ट्रगान जन गण मन की विशेषताएं।
भारत के राष्ट्रगान का इतिहास
इस महान गीत को लिखने का श्रेय नोबेल प्राइज विजेता रविंद्रनाथ टैगोर को जाता है जिन्होंने अपनी अनूठी लेखन और साहित्य कला के बदौलत इस अमर गीत की रचना की। उन्होंने इस गीत को बंगाली भाषा में 11 दिसंबर 1911 को लिखा था जिसे ’भारतो भाग्य बिधाता’ नाम का टाइटल दिया गया।
जन गण मन गीत को सार्वजनिक तौर पर सबसे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कोलकाता अधिवेशन में 27 दिसंबर 1911 को सरला देवी(रवींद्रनाथ टैगोर की भाजी) ने गाया था। 1905 में यह तत्त्वबोधिनी पत्रिका में प्रकाशित भी हुआ था लेकिन उस समय इसे उतनी लोकप्रियता नहीं मिल पाई थी। फिर फरवरी 1919 में रवींद्रनाथ टैगोर, आंध्र प्रदेश के बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज गए हुए थे और वहां उन्होंने इसकी प्रस्तुति दी। इस गीत से प्रभावित होकर वहां की उप प्राचार्या मार्गरेट कजिन्स ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद करवाया और इसे ’द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया’ नाम दिया गया। इसी एक घटना के बाद इस गीत को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली।
जन गण मन की विशेषताएं
जन-गण-मन अधिनायक जय हे भारत-भाग्य विधाता ।
पंजाब सिंध गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग ।
विंध्य हिमाचल यमुना गंगा, उच्छल जलधि तरंगा।
तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष माँगे;
गाहे तव जय गाथा ।
जन–गण मंगलदायक जय हे, भारत–भाग्य–विधाता।
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय, जय हे ।।
भारत देश ने इसे 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया था। वैसे तो इस गीत में कुल पांच पद हैं लेकिन आधिकारिक तौर पर इसके एक पद को ही 52 सेकंड में गाया जाता है और जब इसका गान होता है तो इसके सम्मान के लिए सावधान की मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य है। राष्ट्रगान के एक पद में ही भारत के सात प्रमुख क्षेत्र और नदियों का वर्णन किया गया है। जिसमें पंजाब, सिंध (पाकिस्तान), गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत, उड़ीसा और बंगाल इस तरह से पूरे भारत का वर्णन किया गया है। इस गीत में हिमालय, गंगा व यमुना जैसी पवित्र नदियों और विशाल समुद्र की लहरों का भी उल्लेख किया गया है, जो भारत के तीनों ओर से घिरे होने को दर्शाती है।
