SECL को हाई कोर्ट का झटका, दुर्घटना या अन्य कारणों से कर्मचारी की मृत्यु पर आर्थिक सहायता का हकदार है आश्रित...
Bilaspur High Court: हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है, दुर्घटना या अन्य कारणों से कर्मचारी की मृत्यु होने पर आश्रिम को सहायता राशि लेने का हक है। कोर्ट ने एसईसीएल को निर्देशित करते हुए याचिकाकर्ता को आवेदन की तिथि से सहायता राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

फोटो सोर्स- NPG News
बिलासपुर। 28 मार्च 2026|जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने एसईसीएल कर्मी की मौत के बाद उसके आश्रित सदस्य को मासिक सहायता राशि नहीं दिए जाने पर पेश याचिका में सुनवाई करते हुए कहा, यदि कर्मचारी की मृत्यु खदान दुर्घटना में या अन्य कारणों से होती है, अथवा कर्मचारी चिकित्सकीय रूप से अयोग्य हो जाता है, तो उसकी आश्रित महिला को 6000 रुपए की मासिक आर्थिक सहायता देनी होगी। कोर्ट ने एसईसीएल प्रबंधन को राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता के अनुसार याचिकाकर्ता को आवेदन की तिथि से सहायता राशि देने का आदेश दिया है।
पढ़िए क्या है मामला
याचिकाकर्ता अमरेश राजवाड़े के पिता रामप्रसाद एसईसीएल विश्रामपुर के कर्मचारी थे। कार्य के दौरान 2012 में उसकी मौत हो गई। पिता की मौत के बाद मां सोन बाई ने एसईसीएल में स्वरोजगार व आर्थिक सहायता के लिए आवेदन दिया। दुर्भाग्य से मां सोन बाई की 7 जनवरी 2014 को मौत हो गई। पिता एवं मां की मौत के बाद याचिकाकर्ता अमरेश राजवाड़े ने स्वरोजगार के लिए आवेदन दिया। एसईसीएल प्रबंधन ने आवेदन को खारिज कर दिया गया।
एसईसीएल के निर्णय के खिलाफ हाई कोर्ट में पेश की याचिका
एसईसीएल के निर्णय को चुनौती देते हुए अधिवक्ता शुभांक तिवारी के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को स्वरोजगार के लिए अपात्र माना, किन्तु राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता के अनुसार उसे मासिक आर्थिक सहायता प्राप्त करने का हकदार मानते हुए आवेदन करने छूट प्रदान किया। याचिकाकर्ता एवं एसईसीएल के तर्क को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, याचिकाकर्ता के पिता रामप्रसाद की मृत्यु के बाद, उनकी पत्नी (अर्थात याचिकाकर्ता की माता), सोना बाई को न तो आश्रित रोजगार दिया गया और न ही आर्थिक सहायता; और दुर्भाग्यवश, 7 जनवरी 2014 को उनकी भी मृत्यु हो गई। जब याचिकाकर्ता ने एसईसीएल प्रबंधन के समक्ष आश्रित रोजगार की मांग की, तो 13 दिसंबर 2017 के आदेश द्वारा उसकी मांग को अस्वीकृत कर दिया गया।
हाई कोर्ट ने कहा, मांग को अस्वीकृत करना पूरी तरह अनुचित
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, याचिकाकर्ता का मामला 'राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता के दायरे में आता है, जिसमें स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है, महिला आश्रित को 6 हजार रुपए की मासिक आर्थिक सहायता देय होगी। आर्थिक सहायता प्रदान करने संबंधी याचिकाकर्ता की मांग को अस्वीकृत करना पूर्णतः अनुचित है। कोर्ट ने एसईसीएल प्रबंधन को निर्देश देते हुए कहा, 'राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता के अनुसार जिस तिथि को आवेदन पेश किया था, उस तिथि से सहायता राशि दे।
