रामअवतार जग्गी हत्या कांड: हाई कोर्ट ने सतीश जग्गी की याचिका को क्यों किया खारिज, पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या लिखा है
Bilaspur High Court: राष्ट्रीयवादी कांग्रेस पार्टी एनसीपी के नेता स्व राम अवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच का फैसला आ गया है। हाई कोर्ट ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए हत्याकांड के प्रमुख आरोपी अमित जोगी को उम्र कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए दिए गए फैसले में साफ लिखा है, सतीश जग्गी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका निष्प्रभावी होने के कारण खारिज की जाती है...

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बिलासपुर। 6 अप्रैल 2026| राष्ट्रीयवादी कांग्रेस पार्टी एनसीपी के नेता स्व राम अवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच का फैसला आ गया है। डिवीजन बेंच ने अपने 78 पेज के फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए हत्याकांड के प्रमुख आरोपी अमित जोगी को उम्र कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए दिए गए फैसले में साफ लिखा है, सतीश जग्गी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका निष्प्रभावी होने के कारण खारिज की जाती है। पढ़िए, हाई कोर्ट का फैसला।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच द्वारा जारी फैसले में लिखा है, अपीलकर्ता-सीबीआई द्वारा दायर अपील स्वीकार की जाती है। डिवीजन बेंच ने आगे लिखा है, शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका का भी निपटारा किया जाता है। चूंकि हमने 04 अप्रैल.2024 के निर्णय के माध्यम से अन्य संबंधित अपीलों में अन्य आरोपियों, दोषियों को दी गई दोषसिद्धि और सजा की पुष्टि पहले ही कर दी है, इसलिए शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका निष्प्रभावी होने के कारण खारिज की जाती है।
डिवीजन बेंच ने आगे लिखा है,आरोपी-अमित जोगी उर्फ अमित ऐश्वर्या जोगी जमानत पर है। उनकी जमानत आज से तीन सप्ताह की अवधि तक प्रभावी रहेगी, इस दौरान उन्हें संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा, ऐसा न करने पर ट्रायल कोर्ट उन्हें हिरासत में ले लेगा और इस न्यायालय द्वारा दी गई सजा को पूरा करने के लिए उन्हें जेल भेज देगा।
डिवीजन बेंच ने रजिस्ट्री को निर्देशित करते हुए कहा है, वह इस फैसले की एक प्रति, आरोपी अमित जोगी उर्फ अमित ऐश्वर्या जोगी को भेजे, और उन्हें सूचित करे कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस फैसले को चुनौती देने का अधिकार है, चाहे वे स्वतंत्र रूप से चुनौती दें या कानूनी सहायता से।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देशित किया है, निर्णय की प्रमाणित प्रति, मूल निचली अदालत के अभिलेखों के साथ, संबंधित निचली अदालत को सूचना और आवश्यक कार्रवाई, यदि कोई हो, के लिए आज से एक सप्ताह की अवधि के भीतर भेजी जाए। आदेश की कॉपी निचली अदालत को एक सप्ताह के भीतर भेजी जानी है। कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देशित किया है, तीन सप्ताह के भीतर अमित जोगी द्वारा अदालत के समक्ष आत्म समर्पण ना करने की स्थिति में ट्रायल कोर्ट अमित जोगी को हिरासत में लेगा और हाई कोर्ट के निर्देशानुसार सजा को पूरा कराने अपने निर्देश पर जेल भेजेगा।
सतीश जग्गी व सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका
18 अगस्त 2011, 12 सितंबर .2011 और 19 सितंबर 2011 को हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ,सतीश जग्गी व सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 06 नवंबर 2025 के आदेश के परिप्रेक्ष्य में याचिका दायर करने में हुई देरी को क्षमा करते हुए जग्गी हत्याकांड का केस रिओपन करने व सुनवाई का आदेश छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाइई कोर्ट को दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा, सतीश जग्गी और राज्य सरकार को बनाए पक्षकार
सीबीआई द्वारा दायर अपील की अनुमति के आवेदन पर गुण-दोष के आधार पर पुनर्विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट को वापस भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था, सीबीआई उक्त कार्यवाही में वास्तविक शिकायतकर्ता और राज्य को आवश्यक पक्षकार बनाए। सीबीआई के वकील वैभव ए गोवर्धन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 06 नवंबर 2025 को पारित आदेश की एक प्रति हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की है, जिसे रिकॉर्ड में लिया गया।
