जिंदल को आवंटित कोल ब्लॉक का माइनिंग प्लान प्रस्तुत करने हाई कोर्ट का निर्देश, 49 किसानों ने याचिका दायर कर वापस मांगी है जमीन
Bilaspur High Court: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डीविजन बेंच ने राज्य शासन को रायगढ़ जिले में जिंदल स्टील को आवंटित कोल ब्लॉक गारे 4/6 का माइनिंग प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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बिलासपुर। 23 मार्च 2026| जमीन वापसी की मांग को लेकर 49 किसानों ने याचिका दायर की है। किसानों की याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डीविजन बेंच में सुनवाईहुई। बेंच ने राज्य शासन को रायगढ़ जिले में जिंदल स्टील को आवंटित कोल ब्लॉक गारे 4/6 का माइनिंग प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए दो सप्ताह की मोहलत दी है।
डीविजन ने यह निर्देश याचिकाकर्ता 49 किसानों द्वारा जमीन वापसी की मांग को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के बाद दिया। अगर शासन यह कह रहा है, भूमि का मालिकाना हक प्रभावित किसानों के नाम ही रहेगा और खनन के बाद जमीन वापस की जाएगी।
हाई कोर्ट ने राज्य शासन से कहा,जमीन वापस दिए जाने की पूरी कार्य योजना प्रस्तुत की जानी चाहिए क्योंकि ब्लॉक के खुली खदान का हिस्सा 23 साल में ही समाप्त हो जाएगा और 11 साल बाद भूमिगत खदान भी समाप्त हो जाएगी। अधिकांश जमीन तो 23 साल में ही वापस की जा सकती है।
किसानों ने उठाया संवैधानिक मामला
कोल ब्लॉक भूमि अधिग्रहण से प्रभावित चंदन सिंह सिदार समेत 49 किसानों ने अपनी याचिका में भू राजस्व संहिता की धारा 247 को संवैधानिक ठहरने की मांग की है। इसमें नया भूमि अधिग्रहण कानून आने के बाद भी भूमि अधिग्रहण के लिए उपयोग किया जा रहा है जो कि संविधान के अनुसार अब नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं ने कहा है, नए भूमि अधिग्रहण कानून में बहुत से प्रावधान किसानों के हितों की रक्षा करते हैं जिसमें सामाजिक प्रभाव, अध्ययन पुनर्वास और पुनर्स्थापना के विस्तृत योजना यह सब भू राजस्व संहिता की धारा 247 में नहीं है।
राज्य शासन ने ये दिया जवाब
राज्य शासन में अपने जवाब में बताया, इस अधिग्रहण को भूमि अधिग्रहण नहीं माना जा सकता और यह केवल साथ ही अधिकार का अधिग्रहण है, जिसे खनन पश्चात भूमि को वापस किया जाएगा। हालांकि ऐसा कहते हुए राज्य शासन ने कोई समय सीमा या भूमि वापसी की कोई योजना प्रस्तुत नहीं की थी।
अधिवक्ता सुदीप ने कहा, भू राजस्व संहिता की धारा 247 हो गई है असंवैधानिक
आज हुई बहस में याचिकाकर्ता किसानों की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने डीविजन बेंच से कहा, संविधान के अनुच्छेद 245 246 और 254 के प्रावधानों के तहत संसद द्वारा पारित नया भू अधिग्रहण कानून आने के बाद भू राजस्व संहिता की धारा 247 असंवैधानिक हो गई है। इसके तहत किया गया अधिग्रहण अवैध है।
हालांकि राज्य सरकार इस भूमि अधिग्रहण के बजाय साथ ही अधिकार का अधिग्रहण कर जमीन वापस करने की बात कह रही है जिसकी कोई विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत नहीं की गई है।
23 साल बाद वापस हो सकेगी प्रभावित जमीन
पर्यावरण अनुमति के हिसाब से 23 साल में खुली खदान और 34 साल में भूमिगत खदान समाप्त हो जाएगी तो माइनिंग प्लान के हिसाब से प्रभावित जमीन, 5 साल 10 साल 15 साल और 23 साल में वापस की जा सकती है। राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने धारा 247 की संवैधानिकता का बचाव करते हुए कहा, यह भूमि अधिग्रहण नहीं है, अतः किसानों की याचिका में जो अनुतोष मांगा गया है वह दिया नहीं जा सकता। जिंदल स्टील के तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अय्यर उपस्थित हुए।
राज्य सरकार से मांग माइनिंग प्लान
सुनवाई के पश्चात डीविजन बेंच ने राज्य सरकार को खदान का माइनिंग प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिससे यह साफ हो सके, किस वक्त कौन सी जमीन खनन से मुक्त हो जाएगी और वापस की जा सकती है । मामले की अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद होगी।
