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बगावत की महारैली! धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के खिलाफ इस जिले में बगावत, ईसाई समाज ने निकाली महारैली

CG News: छत्तीसगढ़ के एक जिले से बड़ी खबर आ रही है। वहां पर कैथेलिक ईसाई समाज से महा रैली निकाल कर छत्तीसगढ़ विधानसभा में हाल ही में पारित धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक का विरोध किया गया है। इस रैली में शामिल होकर समाज के लोगों ने साय सरकार ने नया कानून वापस लेने की मांग की है।

बगावत की महारैली! धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के खिलाफ इस जिले में बगावत, ईसाई समाज ने निकाली महारैली
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Anjali Vaishnav

जशपुरनगर। 30 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजटसत्र में प्रलोभन या जबरिया धर्मांतरण रोकने के लिए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किया गया है। इसमें दोषियों को कारावास, जुर्माना अथवा दोनों सजा देने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में बीते चार साल से धर्मांतरण को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा था और आधे छत्तीसगढ़ के करीब 17 जिलों में तनाव की स्थिति बन रही थी। विशेष कर बस्तर में यह मामला हिंसात्मक रूप लेने लगा था। इसे देख कर ही राज्य सरकार ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक लाया। इसमें सभी धर्म के लिए यह प्रावधान है, मतलब कोई भी किसी भी धर्म के लिए धर्मांतरण के लिए दबाव बनाता है अथवा प्रलोभन देता है तो नए कानून के तहत कार्रवाई होगी।

एशिया का सबसे बड़ा चर्च जशपुर जिले के कुनकुरी के चर्च को माना जाता है। रविवार को मसीही समाज ने पाम संडे मनाया था। इसके ठीक अगले दिन सोमवार को कुनकुरी में कैथोलिक ईसाई समाज ने महारैली निकाल कर नए कानून का विरोध किया। इस महा रैली में जशपुर समेत आसपास के जिलों के ईसाई समाज के हजारों लोगों ने शामिल होकर विरोध प्रदर्शन किया। रैली की शुरुआत शहर के खेल मैदान से हुई और वहां से हाथों में बैनर व तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारी शहर से गुजरते हुए एसडीएम कार्यालय कुनकुरी पहुंचे। वहां पर समाज के पदाधिकारियो ं ने एसडीएम को छत्तीसगढ़ सरकार के नाम ज्ञापन देकर धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को निरस्त करने की मांग की।

महारैली से पहले समाज के वक्ताओं ने अपनी बात रखी। इसमें विधेयक के प्रावधानों को लेकर चिंता जताई गई। कुछ वक्ताओं ने यहां तक कहा कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है, इसे काला कानून तक की संज्ञा दी गई। यह भी कहा गया कि इसके कारण समाज में डर और असंतोष का माहौल पनप सकता है। वक्ताओं ने तर्क दिया कि भारतीय संविधान में नागरिकों को मौलिक अधिकार दिया गया है, इसका संरक्षण होना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 14 में समानता, अनुच्छेद 19 में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 25 में धर्म के पालन, आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता का उल्लेख है। नया कानून इसी के अनुरूप ही बनना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस पर जल्द फैसला नहीं लिया जाता है तो फिर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।

पहले से है कानून

ज्ञात हो कि धर्मांतरण को अवैध या गलत तरीके से अपनाने छत्तीसगढ़ में आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। इसमें प्रलोभन या दबावपूर्ण धर्मांतरण को गैरकानूनी करार दिया गया है। यह विधेयक छत्तीसगढ़ विधानसभा में हाल के बजटसत्र में पारित किया गया है। जबकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में वर्ष 2022 से ही संशोधन विधेयक पारित किया जा चुका है।

Anjali Vaishnav

अंजली वैष्णव मैंने छत्तीसगढ़ के कल्याण कॉलेज भिलाई से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म करने के बाद रायपुर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में M.sc Electronic Media की पढ़ाई की. इस दौरान मैने 2021 से TCP News, फिर TV 24 MPCG में बतौर कंटेट राइटर और बुलेटिन प्रोड्यूसर का कार्य किया, वर्तमान में मैं NPG.NEWS में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं, कंटेंट राइटिंग के साथ मुझे रिपोर्टिंग करना पसंद है.

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