एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: यूनिवर्सिटी में फर्नीचर खरीदी घोटाला: CG के अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी में फूटा फर्नीचर खरीदी घोटाला, जांच समिति ने सौंपी रिपोर्ट...
CG News: छत्तीसगढ़ के स्थित अटलबिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी में फर्नीचार घोटाला का जिन्न सामने आ गया है। तीन सदस्यीय जांच समिति ने विश्वविद्यालय द्वारा की गई खरीदी को संदेहास्पद बताया है। रिपोर्ट में जांच कमेटी ने बाजार मूल्य से तीन गुना अधिक कीमत पर की गई खरीदी पर सवालिया निशान उठाया है। जांच समिति ने इसके लिए विश्वविद्यालय को सीधेतौर पर जिम्मेदार ठहराया है। जैम पोर्टल से खरीदी में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है।

इमेज सोर्स- NPG News
बिलासपुर|1 अप्रैल 2026| एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ के स्थित अटलबिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी में फर्नीचार घोटाला का जिन्न सामने आ गया है। तीन सदस्यीय जांच समिति ने विश्वविद्यालय द्वारा की गई खरीदी को संदेहास्पद बताया है। रिपोर्ट में जांच कमेटी ने बाजार मूल्य से तीन गुना अधिक कीमत पर की गई खरीदी पर सवालिया निशान उठाया है। जांच समिति ने इसके लिए विश्वविद्यालय को सीधेतौर पर जिम्मेदार ठहराया है। जेम पोर्टल से खरीदी में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अटलबिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी में फर्नीचार घोटाला का जिन्न सामने आ गया है। तीन सदस्यीय जांच समिति ने विश्वविद्यालय द्वारा की गई खरीदी को संदेहास्पद बताया है। रिपोर्ट में जांच कमेटी ने बाजार मूल्य से तीन गुना अधिक कीमत पर की गई खरीदी पर सवालिया निशान उठाया है। जांच समिति ने इसके लिए विश्वविद्यालय को सीधेतौर पर जिम्मेदार ठहराया है। जैम पोर्टल से खरीदी में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है।92,55,116 रुपये की फर्नीचर खरीदी में सरकारी खजाने को जमकर चोट पहुंचाई गई है।
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, 15 अप्रैल 2025 को क्रय की गई सामाग्रियों का वर्ग फर्नीचर से संबंधित है तथा रू. 92,55,116 रुपये सामाग्रियों का मूल्य है। जेम पोर्टल पर एल-1 पद्धति से सामाग्रियों का क्रय किया गया है। जबकि जेम पोर्टल पर निविदा (बीड) आमंत्रित कर सामाग्री क्रय किया जाना चाहिए था। क्रय समिति एवं वित्त समिति ने केवल सामाग्रियों की मात्रा सहित क्रय करने की अनुशंसा की थी, उक्त समितियों को सामाग्रियों के मूल्य जेम पोर्टल पर देखकर मात्रा व मूल्य सहित क्रय करने की अनुशंसा की जानी थी। समितियों की कार्यप्रणाली पर जांच कमेटी ने गंभीर सवाल खड़ा किया है।
जांजगीर जिले के बनारी से खरीदी,कमेटी ने उठाए गंभीर सवाल
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, खरीदी गई सामाग्रियों के मूल्य का अवलोकन करने से प्रतीत होता है, सामाग्रियों का मूल्य बाजार मूल्य से दो से तीन गुना है। सामाग्रियों का क्रय जांजगीर जिले में स्थित बनारी नाम के स्थान से किया गया है। उक्त सामाग्रियों का क्रय सागर इंडस्ट्रीज, जांजगीर, सिंघानिया, ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज, जांजगीर एवं ओशन इंटरप्राइजेस, जांजगीर से किया गया है।
लाखों रुपये की खरीदी, अब तक एक भी सामान का नहीं हुआ उपयोग
विवेचना: विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों अनुसार क्रय समिति की बैठक 09 अप्रैल 2025 को आयोजित की गई थी, जिसमें क्रय समिति ने फर्नीचर सामाग्रियों के क्रय की अनुशंसा की थी। उक्त बैठक के कार्यवाही विवरण में विश्वविद्यालय के पुराने भवन में स्थित गेस्ट हाऊस के लिए 20 नग फ्री स्टैंडिंग टेबल, 20 नग थ्री सीटर वेटिंग चेयर, 04 नग कार्नर मॉडल सोफा, 05 नग सोफा, 05 नग आलमारी, 06 नग 01 दरवाजे वाला आलमारी, 05 नग दो दरवाजे वाला आलमारी, 04 नग 03 दरवाजे वाली आलमारी, 06 नग वुडन सिंगल बेड, 09 नग वुडन डबल बेड, 06 नग सिंगल बेड मैट्रेसेस, 09 नग डबल बेड मैट्रेसेस, 1001 स्क्वेयर फीट में मॉड्यूलर किचन, 05 नग वाटर प्यूरीफायर, 09 नग स्यू रैक, 05 नग वाटर कूलर, 26 नग बेड सीट, 09 ड्रेसिंग टेबल, 18 मल्टीपर्पस टेबर, 20 नग आयरन रैक एवं अन्य फर्नीचर संबंधी सामाग्रियों के क्रय की अनुशंसा की थी। जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है, कमीशनखोरी के फेर में लाखों रुपये का सामान खरीदकर इसे डंप कर दिया है। एक भी सामान का उपयोग अब तक नहीं किया गया है।
कार्य परिषद की अनुमति ही नहीं ली गई
जांच कमेटी ने रिपोर्ट में लिखा है, विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों अनुसार वित्तीय वर्ष के शुरूआत में विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए बजट के कार्यपरिषद् द्वारा अनुमोदन उपरांत समय-समय पर वित्त समिति एवं क्रय समिति की अनुशंसा उपरांत कुलपति से क्रय करने के सक्षम अनुमोदन के बाद सामाग्रियों का क्रय किये जाने का उल्लेख किया गया है। विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के अनुसार विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षणिक, अशैक्षणिक, वित्तीय मामले एवं अन्य कार्यों का अनुमोदन विश्वविद्यालयीन कार्यपरिषद् के समक्ष रखकर अनुमोदित किया जाता है। उक्त अधिनिमय के अनुरूप विश्वविद्यालय द्वारा सामाग्रियों का क्रय करने के लिए वित्त समिति, क्रय समिति एवं कार्यपरिषद् का अनुमोदन लिया जाना उचित प्रतीत होता है। क्योंकि कार्यपरिषद् विश्वविद्यालय की सबसे महत्वपूर्ण एवं दिशा निर्धारण करने वाली समिति होती है। विश्वविद्यालय द्वारा 15 अप्रैल .2025 को राशि रु. 92,55,116/रुपये की सामाग्रियों का क्रय, वित्त समिति और क्रय समिति की अनुशंसा से किया गया, जिसे कार्यपरिषद् से भी अनुमति लेकर किया जाना चाहिए था।
एक बड़ा सवाल यह भी
जांच में इस बात का उल्लेख किया गया है, विश्वविद्यालय अधिनियम के विनिमय क्रमांक 10 की कंडिका 04 में कुलसचिव को रूपये 20,000 /- तथा विनिमय क्रमांक 10 की कंडिका 03 के अनुसार माननीय कुलपति को रु. 20.000/- से अधिक वित्तीय एवं प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार दिया गया है। दस्तावेजों से स्पष्ट है कि क्रय की प्रक्रिया विश्वविद्यालयीन क्रय नियमों के तहत् किया गया है। कुलपति से अनुमोदन उपरांत सामाग्रियों क्रय किया गया, जिसे कार्यपरिषद् से विधिवत् अनुमति प्राप्त कर क्रय किया जाना था। कुलपति के अधिकतम वित्तीय सीमा से संबंधित 'दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
पढ़िए जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में क्या लिखा है
जेम पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी के संबंध में प्राप्त शिकायत का विश्वविद्यालय में जाकर भौतिक सत्यापन कर दस्तावेजों/अभिलेखों के सूक्ष्म निरीक्षण उपरांत अभिमत निम्नानुसार है-
- सामाग्रियों के क्रय करने के लिए कार्यपरिषद् का अनुमोदन प्राप्त नहीं किया गया था। चूंकि सामाग्रियों का क्रय मूल्य राशि रू. 92,55,116/ रुपये था। अतः कार्यपरिषद् के अनुमोदन उपरांत सामाग्री क्रय की जानी चाहिए थी।
- 15 अप्रैल 2025 को क्रय की गई सामाग्रियों का वर्ग फर्नीचर से संबंधित है तथा रू. 92,55,116 रुपये सामाग्रियों का मूल्य है। जेम पोर्टल पर एल-1 पद्धति से सामाग्रियों का क्रय किया गया है। जबकि जेम पोर्टल पर निविदा (बीड) आमंत्रित कर सामाग्री क्रय किया जाना चाहिए था।
- क्रय समिति एवं वित्त समिति ने केवल सामाग्रियों की मात्रा सहित क्रय करने की अनुशंसा की थी, उक्त समितियों को सामाग्रियों के मूल्य जेम पोर्टल पर देखकर मात्रा व मूल्य सहित क्रय करने की अनुशंसा की जानी थी।
- सामाग्रियों का क्रय (i) सिंघानिया फर्नीचर मेनुफेक्चरिंग, बिलासपुर रोड, बनारी, जॉजगीर (ii) सागर इंडस्ट्रीज, अकलतरा रोड, जांजगीर (iii) ओशन इन्टरप्राईजेस, जॉजगीर से किया गया। एक ही स्थान जॉजगीर जिले से सामाग्रियों का क्रय किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता।
- जेम पोर्टल पर केटेगराज निविदा जारी कर रू. 92,55,116 रुपये की फर्नीचर सामाग्री क्रय किया जाना उचित होता। फर्नीचर सामाग्री हेतु अलग-अलग 24 क्रय आदेश जारी किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता। जेम पोर्टल के माध्यम से विश्वविद्यालय द्वारा की गई खरीदी संदेहास्पद प्रतीत होती है।
ये हैं जांच समिति के सदस्य, जिन्होंने फर्जीवाड़ा का किया खुलासा
- डॉ. किशोर कुमार तिवारी, अपर संचालक, उच्च शिक्षा संचालनालय संयोजक
- डॉ. गोवर्धन यदु, सहायक संचालक, उच्च शिक्षा संचालनालय सदस्य
- महेश कुमार साहू, सहायक संचालक (वित्त), उच्च शिक्षा संचालनालय सदस्य
ये हैं विश्वविद्यालय क्रय समिति के सदस्य
डॉ. ऐलेक्जेंडर कुजूर वित्त अधिकारी, डॉ. एच.एस. होता-विभागाध्यक्ष (कम्प्यूटर साईंस एवं एप्लीकेशन), डॉ.डी.एस.वी.जी. के कलाधर विभागाध्यक्ष (माइकोबायोलॉजी एण्ड बायोइन्फार्मेटिक्स) डॉ. पूजा पाण्डेय विभागाध्यक्ष (कॉगर्स एण्ड फाइनेंशियल, स्टडीज), यशवंत पटेल विभागाध्यक्ष (फूड प्रोसेसिंग एण्ड टेक्नोलॉजी), सौमित्र तिवारी (प्रभारी भण्डार शाखा) सदस्य के रूप में नामित हैं।
देखें रिपोर्ट
