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BNS में कठोर प्रावधान, FIR से पहले संभावित आरोपी को सुनवाई का अधिकार नहीं दिया जा सकता

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ के एक बड़े सरकारी अस्पताल के संयुक्त निदेशक सह अस्पताल अधीक्षक की याचिका की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उपकरणों की खरीदी व स्टालेशन में बड़े पैमाने पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है।

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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Radhakishan Sharma

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के एक बड़े सरकारी अस्पताल के संयुक्त निदेशक सह अस्पताल अधीक्षक की याचिका की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उपकरणों की खरीदी व स्टालेशन में बड़े पैमाने पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है। राज्य सरकार ने विभागीय जांच का आदेश दे दिया है। इस बीच अस्पताल अधीक्षक ने हाई कोर्ट में एफआईआर की अनुशंसा पर रोक लगाने की मांग करते हुए यााचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने BNS में दिए गए कठोर प्रावधानों का हवाला देते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।

छत्तीसगढ़ रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में सीटी स्कैन और गामा कैमरा की खरीदी और स्थापना में भ्रष्टाचार, सरकारी धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग के मामले में, दोषी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा जांच कमेटी ने कर दी है। जांच कमेटी की अनुशंसा और एफआईआर दर्ज की सिफािरश को चुनौती देते हुए तत्कालीन संयुक्त निदेशक-सह-अधीक्षक डॉ विवेक चौधरी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। बीएनएस में दिए गए कठोर प्रावधानों का हवाला देते हुए कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस बीडी गुरु ने अपने फैसले में कहा है, किसी संभावित आरोपी के पास आपराधिक कार्यवाही शुरू होने से पहले अपनी बात रखे जाने का कोई निहित अधिकार नहीं होता। बीएनएस में एफआईआर दर्ज होने से पहले संभावित आरोपी को सुनवाई का अधिकार प्रदान नहीं किया गया है।

जानिए क्या है मामला?

डॉ. विवेक चौधरी डॉ भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल रायपुर में संयुक्त निदेशक सह अस्पताल अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। मुंबई की मेडिकल सर्विसेज कंपनी ने राज्य के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री को एक अत्याधुनिक न्यूक्लियर मेडिसिन डायग्नोस्टिक सेंटर स्थापित करने एक जरुरी ऑफर के सााथ प्रस्ताव दिया था। स्वास्थ्य मंत्री ने 10 मार्च 2018 को इस प्रस्ताव को डॉ चौधरी के पास उनकी राय जानने के लिए भेजा। 16 मार्च 2018 को डॉ चौधरी ने खरीद के तरीके के संबंध में अपनी राय देते हुए सुझाव दिया, इसे PPP सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत किया जाना चाहिए। डॉ चौधरी की सलाह के बाद राज्य शासन ने सीटी स्कैन और गामा कैमरा मशीन की खरीदी की और स्टालेशन किया।

गड़बड़ी की ऐसे खुली पोल

खरीदी और स्टालेशन में हुई अनियमितताओं के संबंध में रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष से जानकारी मांगी गई।

अनियमितता की बात सामने आने पर जांच कमेटी का गठन किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अगस्त 2021 को दोषी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर करने की अनुशंसा कर दी।

खरीदी प्रक्रिया में प्रथम दृष्टया सामने आई अनियमितता

मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस गुरु ने अपने फैसले में कहा है, मौजूदा प्रकरण में निर्धारित कानून के दृष्टिकोण से, किसी संभावित आरोपी के पास आपराधिक कार्यवाही शुरू होने से पहले अपनी बात रखने का कोई निहित अधिकार नहीं है, क्योंकि एफआईआर दर्ज होने से पहले संभावित आरोपी को सुनवाई का अधिकार प्रदान नहीं करता है।

हाई कोर्ट की गंभीर टिप्पणी

जस्टिस गुरु ने अपने फैसले में कहा है, वर्तमान मामला ऐसे किसी भी असाधारण श्रेणी में नहीं आता है। जांच रिपोर्ट, प्रथम दृष्टया प्रक्रिया में अनियमितताओं को उजागर करती है, जिसमें भारी मात्रा में सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया है। लिहाजा, यह आगे की जांच को उचित ठहराती है। याचिकाकर्ता कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाया जाता है या नहीं, यह एक ऐसा मामला है जिसका निर्धारण गहन जांच के बाद और, यदि आवश्यक हुआ, तो मुकदमे के दौरान ही किया जा सकता है। इस टिप्पणी के साथ सिंगल बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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