हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: गुजारा भत्ता याचिका खारिज, पति को बताए बिना घर छोड़ना और दूसरे के साथ रहना ‘परित्याग’
Bilaspur High Court: हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, पति को बिना बताए घर छोड़कर जाना और दूसरे पुरुष के साथ दिन बिताना परित्याग है। पत्नी की गुजारा भत्ता की मांग वाली याचिका को इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है।

बिलासपुर 12 मार्च 2026, हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, पति को बिना बताए घर छोड़कर जाना और दूसरे पुरुष के साथ दिन बिताना परित्याग है। पत्नी की गुजारा भत्ता की मांग वाली याचिका को इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। बता दें, पत्नी ने दो बच्चों को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ 10 दिन दिल्ली में गुजारे थे।
हाई कोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा, यदि पत्नी बिना किसी ठोस कारण के अपने बच्चों और पति को छोड़कर जाती है और किसी अन्य पुरुष के साथ समय बिताती है, तो वह सीआरपीसी की धारा 125 (4) के तहत गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है।
भिलाई निवासी महिला ने अपने पति के खिलाफ भरण-पोषण के लिए आवेदन लगाया था। पत्नी का आरोप था कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पति की सहमति से दिल्ली गई थी। उसने दावा किया कि पति का व्यवसाय अच्छा है और हर माह 3 लाख रुपए आय है, इसलिए उसे 1 लाख रुपए मासिक गुजारा भत्ता दिया जाए। पति ने कोर्ट में पत्नी के दावों को खारिज करते हुए बताया कि 11 नवंबर 2022 को पत्नी बिना बताए घर से गहने, दस्तावेज और अपने दो छोटे बच्चों को छोड़कर चली गई थी। पति ने
गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। बाद में पता चला कि वह एक व्यक्ति और अपनी बहन के साथ दिल्ली गई थी। दुर्ग के फैमिली कोर्ट ने सबूतों के आधार पर पत्नी की अर्जी खारिज कर दी थी, इस पर महिला ने हाई कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया था। दिए गए फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी ने बिना किसी पर्याप्त कारण के पति के घर और बच्चों को छोड़ा। किसी अन्य पुरुष के साथ 10-11 दिन तक बाहर रहना और परिवार को सूचना न देना स्वैच्छिक परित्याग की श्रेणी में आता है।
