CG Teacher News: जेडी के आदेश की नाफरमानी, घोटालेबाज शिक्षक नेता के खिलाफ तीन महीने बाद भी नहीं हुआ FIR...
CG Teacher News: छत्तीसगढ़ बिलासपुर के बिल्हा ब्लाॅक में आज से तकरीबन पांच महीने मेडिकल बिल के नाम पर शिक्षक नेता ने 30 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा किया था। जेडी के आदेश पर शिक्षक नेता और पत्नी को निलंबित कर दिया गया है। जेडी के दूसरे आदेश की नाफरमानी की जा रही है। जेडी के आदेश के तीन महीने बाद भी घोटालेबाज शिक्षक नेता व पत्नी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराया गया है।

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8 February 2026|बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर के बिल्हा ब्लाॅक में आज से तकरीबन पांच महीने मेडिकल बिल के नाम पर शिक्षक नेता ने 30 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा किया था। जेडी के आदेश पर शिक्षक नेता और पत्नी को निलंबित कर दिया गया है। जेडी के दूसरे आदेश की नाफरमानी की जा रही है। जेडी के आदेश के तीन महीने बाद भी घोटालेबाज शिक्षक नेता व पत्नी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराया गया है।
मेडिकल बिल में किए गए फर्जीवाड़ा का साइड इफैक्ट कहें या फिर खामियाजा, जरुरतमंद शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। बीमारी के इलाज में बाद मेडिकल बिल का क्लेम बिल्हा ब्लॉक से पास नहीं हो रहा है। इसके चलते जरुरमंद शिक्षकों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह सब शिक्षक नेता के कारगुजारियों के चलते हो रहा है। फर्जीवाड़ा को रोकने के लिए बीईओ कार्यालय द्वारा अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है,इसके अलावा शिक्षकों द्वारा पेश मेडिकल बिल का सत्यापन कराया जा रहा है।
शिक्षक नेता ने किया था 30 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा
बिल्हा ब्लॉक में आज से पांच महीने पहले 30 लाख रुपये का फर्जी मेडिकल बिल घोटाला सामने आया था। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के बिल्हा ब्लॉक अध्यक्ष साधेलाल पटेल जो संकुल समन्वय पौंसरा की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे, फर्जी चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयक प्रस्तुत कर तकरीबन 30 लाख रुपए का आहरण कर लिया । शिक्षक नेता ने फर्जीवाड़ा करते वक्त मृत शिक्षक के नाम को भी इस्तेमाल किया। साला व शिक्षिका पत्नी और रिश्तेदारों के नाम फर्जी मेडिकल बिल जमा कर करीब 30 लाख रुपए का फर्जीवाड़ा किया। फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद शिक्षक नेता को निलंबित कर दिया गया है। शासकीय प्राथमिक शाला दैहानपारा बैमा में पदस्थ प्रधान पाठक राजकुमारी पटेल को भी निलंबित किया गया है। निलंबन की कार्रवाई के साथ ही जेडी ने सीएसी के खिलाफ एफआईआर का आदेश जारी किया था। अचरज की बात ये कि लंबे समय के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने फर्जीवाड़ा करने वाले शिक्षक नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराया है।
चेकिंग की कड़ाई के बाद किया फर्जीवाड़ा
मेडिकल जमा कराने के बाद इसे सत्यापन के लिए सिविल सर्जन कार्यालय भेजा जाता है। सीएस कार्यालय से सत्यापन और सहमति के बाद फाइल बीईओ कार्यालय भेजा जाता है। बीईओ अपनी सहमति जताते हुए इसे डीईओ कार्यालय भेजते हैं। डीईओ कार्यालय से फाइल डीपीआई भेजा जाता है। बजट आवंटन के बाद फाइल उसी रास्ते बीईओ कार्यालय पहुंचता है। बीईओ कार्यालय से बिल ट्रेजरी भेजा जाता है,तब मेडिकल बिल पास होता है। चेकिंग के इतने रास्त के बाद शिक्षक नेता ने कैसे फर्जीवाड़ा किया इसे लेकर आज भी कई सवाल अनसुलझे हैं।
बिल्हा बीईओ भूपेश कौशिक का कहना है, मेडिकल बिल को सिविल सर्जन कार्यालय रिचेकिंग के लिए भेजा जा रहा है। सीएस कार्यालय से बिल की चेकिंग और ओके रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
