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CG RERA: रेरा ने कार्पेट एरिया की रजिस्ट्री वाला दो गोलमोल आदेश निकाला मगर वह खानापूर्ति जैसा बनकर रह गया क्योंकि उसके बाद कोई एक्शन नहीं, पढ़िये आदेश

CG RERA News: छत्तीसगढ़ के रेरा ने बिल्डरों द्वारा सुपर बिल्ट अप एरिया की रजिस्ट्री के खिलाफ दो आदेश निकाला मगर वह गोलमोल जैसा रहा। दिलचस्प यह कि रेरा ने एक मामले में भी कार्रवाई नहीं की, जबकि पूरे प्रदेश में सुपर बिल्ट अप की रजिस्ट्री बेखौफ हो रही है।

CG RERA: रेरा ने कार्पेट एरिया की रजिस्ट्री वाला दो गोलमोल आदेश निकाला मगर वह खानापूर्ति जैसा बनकर रह गया क्योंकि उसके बाद कोई एक्शन नहीं, पढ़िये आदेश
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Anjali Vaishnav

13 February 2026|रायपुर। रेरा कानून में सुपर बिल्ट अप एरिया की रजिस्ट्री गैर कानूनी है। इसके बाद भी रेरा ने आज तक इस मामले में एक भी कार्रवाई नहीं की। ये जरूर हुआ कि रेरा ने 11 अक्टूबर 2024 और 30 अप्रैल 2025 को दो आदेश निकाला मगर वह खानापूर्ति जैसा ही रहा। क्योंकि, उसका कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। याने दोनों आदेश फाइलों में ही दफन हो गई।

रेरा ने 30 अप्रैल 2025 के आदेश में साफ तौर पर लिखा है कि रेरा अधिनियम 2016 की धारा 2के में सुपर बिल्ट अप एरिया का कोई प्रावधान नहीं है। कार्पेट एरिया के हिसाब से ही रजिस्ट्री करनी होगी। मगर नीचे में बिल्डरों को पतली गली से निकलने का रास्ता देते हुए लिख दिया...प्रमोटरों को सुनिश्चित करना होगा कि अपने सभी विज्ञापनों, ब्रोशर और प्रचार सामग्री में केवल कार्पेट एरिया का उल्लेख करें। फिर सभी नागरिकों से आग्रह है कि घर-फ्लैट खरीदते समय कार्पेट एरिया के आधार पर निर्णय लें। मगर इन दो वाक्यों के बीच में बिल्डरों के पक्ष में एक लाइन जोड़ दिया कि बालकनी, सीढ़ी, ओपन एरिया को अलग से उल्लेख किया जाए, उसकी कीमत भी। देखिए रेरा ने कैसी चतुराई की....एक तरफ लिख रहा कि रेरा अधिनियम में सुपर बिल्ट अप का कोई प्रावधा नहीं है। आम आदमी कार्पेट एरिया के हिसाब से ही मकान खरीदें। दूसरी तरफ लिख रहा, उसका अलग से उल्लेख करें। याने बिल्डरों के लिए कहने के लिए हो जाएगा रेरा ने अलग से उसका जिक्र करने कहा है। मगर वास्तविकता यह है कि ये भी नहीं हो रहा। ब्रोशरों से लेकर प्रचार सामग्रिया में सुपर बिल्ट अप एरिया का उल्लेख किया जा रहा बल्कि सुपर बिल्ट अप के आधार पर ही रजिस्ट्रियां भी की जा रही हैं।

रेरा ने अक्टूबर 2024 के आदेश में भी कार्पेट एरिया को अहमियत देने वाली लाइन दुहराते हुए कहा कि फ्लैट, मकान की रजिस्ट्री और एग्रीमेंट में साफ तौर पर कार्पेट एरिया का उल्लेख किया जाए। रेरा ने दो आदेश निकाला मगर आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। किसी प्रोजेक्ट में जाकर जांच करने की भी जहमत नहीं उठाई गई और न ही रजिस्ट्री ऑफिस से कभी जानकारी मंगाई गई कि रजिस्ट्रियों में कार्पेट एरिया के हिसाब से लोगों से पैसा लिया जा रहा या सुपर बिल्ट अप एरिया की गणना से।

बहरहाल, नीचे देखिए रेरा के दोनों आदेश....






क्या होता है कार्पेट और सुपर बिल्ट अप

सुपर बिल्ट अप एरिया फ्लैट से जुड़ा है। फ्लैट के आवासीय एरिया के दो पार्ट होते हैं। एक फ्लैट के भीतर का एरिया, जिसे कारपेट एरिया कहा जाता है। कारपेट एरिया घर के भीतर का वह हिस्सा होता है, जिसका आदमी वास्तविक उपयोग करता है। घर का बाहर का हिस्सा, मसलन सीढ़ी, कारिडोर, लिफ्ट, बालकनी को सुपर बिल्डअप एरिया कहा जाता है।

क्या अलग से चार्ज लेना सही है?

जानकारों का कहना है कि सीढ़ी, कारिडोर, लिफ्ट, बालकनी फ्लैट का आवश्यक पार्ट है। अगर आप बहुमंजिला इमारत में फ्लैट खरीदेंगे तो उसके लिए सीढ़ी तो चाहिए ही होगी। याने यह आवश्यक हिस्सा होगा। फिर इसका अलग से चार्ज क्यों? फिर फ्लैट के भीतर कमरे, दरवाजा, बाथरुम में पैसे ज्यादा लगते हैं, बालकनी में तीन तरफ से दीवार बने-बनाए होते हैं, सामने का हिस्सा खुला होता है। फिर उसका रेट भी घर के बराबर क्यों लिया जाना चाहिए।

क्या हैं रेरा के नियम?

रेरा याने रियल एस्टेट अधिनियम 2016 के अनुसार फ्लैट या अपार्टमेंट की बिक्री केवल कार्पेट एरिया के आधार पर ही की जा सकती है। कानूनी तौर पर सुपर बिल्ट-अप एरिया का कोई प्रावधान नहीं है। रेरा अधिनियम में साफ तौर पर लिखा है कि अगर कोई बिल्डर सुपर बिल्ट अप एरिया की रजिस्ट्री करता है तो यह रेरा कानून का उल्लंघन होगा। इसके लिए संबंधित राज्य के रेरा में शिकायत की जाए।

ब्रोशर और प्रचार पर भी रोक

रेरा अधिनियम के अनुसार बिल्डरों को आवासों के प्रचार-प्रसार और ब्रोशर में भी कार्पेट एरिया को ही बताना होगा। मगर छत्तीसगढ़ में कोई भी बिल्डर ऐसा नहीं कर रहा। रेरा कानून को ठेंगा दिखाते हुए बड़े-बड़े इश्तेहारों में भी सुपर बिल्ट-अप एरिया का प्रचार किया जा रहा है। इससे आम उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा है।

उपभोक्ताओं को भ्रमित कैसे?

कार्पेट और सुपर बिल्ट-टप एरिया के नाम पर छत्तीसगढ़ के रियल एस्टेट कारोबारी लोगों की आंख में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं। दरअसल, प्रचार सामग्री या ब्रोशर में सुपर बिल्ट अप एरिया का उल्लेख होता है। बिल्डरों के ऑफिसों में भी ग्राहकों को सबसे पहले सुपर बिल्ट-अप एरिया बताया जाता है। मसलन, मकान का साइज बताया जाएगा 1800 वर्गफुट। जब सौदा तय होने लगेगा या तय हो जाने के बाद पता चलेगा कार्पेट एरिया तो 1300 या 1400 वर्गफुट ही है। 30 से 40 फीसदी एरिया सुपर बिल्ट-अप में चला गया। याने घर 13, 15 सौ फुट का और पैसा देना पड़ेगा 1800 फुट का। इससे आदमी बिल्डरों के हाथों छला जाता है।

क्या कहता है रेरा कानून?

रेरा अधिनियम बनाते समय यह ध्यान में रहा होगा कि सुपर बिल्ट अप के नाम पर लोगों से छल किया जा रहा। तभी अधिनियम की धारा 2के में इसके लिए कार्पेट एरिया को बखूबी परिभाषित किया गया। अधिनियम में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि विधिक दस्तावेज याने एग्रीमेंट और रजिस्ट्री पेपर में कार्पेट एरिया का ही उल्लेख किया जाए।

Anjali Vaishnav

अंजली वैष्णव मैंने छत्तीसगढ़ के कल्याण कॉलेज भिलाई से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म करने के बाद रायपुर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में M.sc Electronic Media की पढ़ाई की. इस दौरान मैने 2021 से TCP News, फिर TV 24 MPCG में बतौर कंटेट राइटर और बुलेटिन प्रोड्यूसर का कार्य किया, वर्तमान में मैं NPG.NEWS में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं, कंटेंट राइटिंग के साथ मुझे रिपोर्टिंग करना पसंद है.

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