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CG RERA: रेरा का आंख-कान बंदः सुपर बिल्ट-अप की रजिस्ट्री गैर कानूनी, फिर भी छत्तीसगढ़ के बिल्डर बेखौफ सुपर बिल्ट-अप एरिया की रजिस्ट्री कर रहे

CG RERA: देश की सबसे बड़ी अदालत ने कल रेरा को लोगों के हितों की रक्षा में पूरी तरह फेल बताते हुए उसे भंग करने जैसी तीखी टिप्पणी की। छत्तीसगढ़ में भी रेरा का यही हाल है। बिल्डरों की मनमानी पर कोई रोक नहीं। रेरा के नियमानुसार सुपर बिल्ट अप एरिया का रजिस्ट्री नहीं हो सकता मगर छत्तीसगढ़ में बिल्डर नियम-कायदों से बेखौफ सुपर बिल्ट अप की रजिस्ट्री कर रहे बल्कि रेरा की नाक के नीचे ब्रोशर समेत प्रचार सामग्रियों में प्रकाशित कर लोगों को भ्रमित कर रहे।

CG RERA: रेरा का आंख-कान बंदः सुपर बिल्ट-अप की रजिस्ट्री गैर कानूनी, फिर भी छत्तीसगढ़ के बिल्डर बेखौफ सुपर बिल्ट-अप एरिया की रजिस्ट्री कर रहे
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Anjali Vaishnav

13 February 2026|रायपुर। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारत सरकार ने रेरा का गठन इसलिए किया था कि प्रायवेट बिल्डरों के शोषण और प्रताड़ना से आम आदमी को बचाया जा सकें। इसीलिए रेरा को संवैधानिक बॉडी घोषित किया गया। रेरा के चेयरमैन और मेम्बर का पद इतना तगड़ा बनाया गया है कि सरकार चाहकर भी उन्हें हटा नहीं सकती। रेरा चेयरमैन को इसलिए इतना सशक्त बनाया गया कि कोई उसके उपर प्रेशर डालकर कोई फैसला न करा सकें।

मगर दुर्भाग्यजनक पहलू यह है कि रेरा अपने दायित्वों में पूरी तरह फेल साबित हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की कल की टिप्पणी बेहद गंभीर है और यह बताती है कि पूरे देश में रेरा की यही स्थिति है। रेरा सिर्फ संस्थागत वसूली का सेंटर बनकर रह गया है। रेरा को आंख-कान बंद करने के मोटे पैसे मिलते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि बिल्डरों की मजबूत लॉबी के आगे रेरा असहाय नजर आ रहा है।

छत्तीसगढ़ का रेरा

छत्तीसगढ़ में 2017 में रेरा बना। इसके गठन के करीब नौ साल होने जा रहा मगर रेरा ने आज तक ऐसा कोई फैसला नहीं किया, जो रीयल इस्टेट के लिए नजीर बनें या फिर आम आदमी का शोषण करने वाले बिल्डरों पर खौफ कायम कर सकें। रेरा की नाक के नीचे छत्तीसगढ़ में न केवल उपभोक्ताओं की जेबें काटी जा रही बल्कि परेशान करने के अनेक मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

सुपर बिल्ट-अप की रजिस्ट्री नहीं

रेरा के नियमों के तहत बिल्डर सुपर बिल्ट-अप की रजिस्ट्री नहीं कर सकते। मगर छत्तीसगढ़ में इस नियम का बिल्डरों द्वारा मजाक उड़ाया जा रहा। सारे बिल्डर सुपर बिल्ट अप एरिया का रजिस्ट्री कर रहे हैं।

क्या होता है कार्पेट और सुपर बिल्ट अप?

सुपर बिल्ट अप एरिया फ्लैट से जुड़ा है। फ्लैट के आवासीय एरिया के दो पार्ट होते हैं। एक फ्लैट के भीतर का एरिया, जिसे कारपेट एरिया कहा जाता है। कारपेट एरिया घर के भीतर का वह हिस्सा होता है, जिसका आदमी वास्तविक उपयोग करता है। घर का बाहर का हिस्सा, मसलन सीढ़ी, कारिडोर, लिफ्ट, बालकनी को सुपर बिल्डअप एरिया कहा जाता है।

क्या अलग से चार्ज लेना सही है?

जानकारों का कहना है कि सीढ़ी, कारिडोर, लिफ्ट, बालकनी फ्लैट का आवश्यक पार्ट है। अगर आप बहुमंजिला इमारत में फ्लैट खरीदेंगे तो उसके लिए सीढ़ी तो चाहिए ही होगी। याने यह आवश्यक हिस्सा होगा। फिर इसका अलग से चार्ज क्यों? फिर फ्लैट के भीतर कमरे, दरवाजा, बाथरुम में पैसे ज्यादा लगते हैं, बालकनी में तीन तरफ से दीवार बने-बनाए होते हैं, सामने का हिस्सा खुला होता है। फिर उसका रेट भी घर के बराबर क्यों लिया जाना चाहिए।

क्या हैं रेरा के नियम?

रेरा याने रियल एस्टेट अधिनियम 2016 के अनुसार फ्लैट या अपार्टमेंट की बिक्री केवल कार्पेट एरिया के आधार पर ही की जा सकती है। कानूनी तौर पर सुपर बिल्ट-अप एरिया का कोई प्रावधान नहीं है। रेरा अधिनियम में साफ तौर पर लिखा है कि अगर कोई बिल्डर सुपर बिल्ट अप एरिया की रजिस्ट्री करता है तो यह रेरा कानून का उल्लंघन होगा। इसके लिए संबंधित राज्य के रेरा में शिकायत की जाए।

ब्रोशर और प्रचार पर भी रोक

रेरा अधिनियम के अनुसार बिल्डरों को आवासों के प्रचार-प्रसार और ब्रोशर में भी कार्पेट एरिया को ही बताना होगा। मगर छत्तीसगढ़ में कोई भी बिल्डर ऐसा नहीं कर रहा। रेरा कानून को ठेंगा दिखाते हुए बड़े-बड़े इश्तेहारों में भी सुपर बिल्ट-अप एरिया का प्रचार किया जा रहा है। इससे आम उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा है।

उपभोक्ताओं को भ्रमित कैसे?

कार्पेट और सुपर बिल्ट-टप एरिया के नाम पर छत्तीसगढ़ के रियल एस्टेट कारोबारी लोगों की आंख में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं। दरअसल, प्रचार सामग्री या ब्रोशर में सुपर बिल्ट अप एरिया का उल्लेख होता है। बिल्डरों के ऑफिसों में भी ग्राहकों को सबसे पहले सुपर बिल्ट-अप एरिया बताया जाता है। मसलन, मकान का साइज बताया जाएगा 1800 वर्गफुट। जब सौदा तय होने लगेगा या तय हो जाने के बाद पता चलेगा कार्पेट एरिया तो 1300 या 1400 वर्गफुट ही है। 30 से 40 फीसदी एरिया सुपर बिल्ट-अप में चला गया। याने घर 13, 15 सौ फुट का और पैसा देना पड़ेगा 1800 फुट का। इससे आदमी बिल्डरों के हाथों छला जाता है।

क्या कहता है रेरा कानून?

रेरा अधिनियम बनाते समय यह ध्यान में रहा होगा कि सुपर बिल्ट अप के नाम पर लोगों से छल किया जा रहा। तभी अधिनियम की धारा 2के में इसके लिए कार्पेट एरिया को बखूबी परिभाषित किया गया। अधिनियम में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि विधिक दस्तावेज याने एग्रीमेंट और रजिस्ट्री पेपर में कार्पेट एरिया का ही उल्लेख किया जाए।

Anjali Vaishnav

अंजली वैष्णव मैंने छत्तीसगढ़ के कल्याण कॉलेज भिलाई से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म करने के बाद रायपुर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में M.sc Electronic Media की पढ़ाई की. इस दौरान मैने 2021 से TCP News, फिर TV 24 MPCG में बतौर कंटेट राइटर और बुलेटिन प्रोड्यूसर का कार्य किया, वर्तमान में मैं NPG.NEWS में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं, कंटेंट राइटिंग के साथ मुझे रिपोर्टिंग करना पसंद है.

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