प्राइवेट स्कूलों की मनमानी: कैसे मिलेगी किताबों और यूनिफ़ॉर्म की मुनाफाखोरी से निजात? छत्तीसगढ़ के शहराें में इंदौर मॉडल की आस?

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी: कैसे मिलेगी किताबों और यूनिफ़ॉर्म की मुनाफाखोरी से निजात? छत्तीसगढ़ के शहराें में इंदौर मॉडल की आस?
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

CG School News: बिलासपुर सहित पूरे प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी और किताब-यूनिफॉर्म के नाम पर हो रही खुली लूट एक गंभीर मुद्दा बन गया है। इंदौर मॉडल ने यह साबित कर दिया है, यदि प्रशासन में इच्छाशक्ति हो, तो 'शिक्षा के व्यापार' पर लगाम कसी जा सकती है।

बिलासपुर।11 अप्रैल 2026| बिलासपुर सहित पूरे प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी और किताब-यूनिफॉर्म के नाम पर हो रही खुली लूट एक गंभीर मुद्दा बन गया है। इंदौर मॉडल ने यह साबित कर दिया है, यदि प्रशासन में इच्छाशक्ति हो, तो 'शिक्षा के व्यापार' पर लगाम कसी जा सकती है। बिलासपुर और अन्य शहरों में जनता को इस मुनाफ़ाखोरी से निजात दिलाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना और प्रशासनिक सख्ती की आवश्यकता है।

​● 'शिकायत का इंतजार' नहीं, 'स्वप्रेरणा से जांच' (Suo Motu Action)-​शिक्षा विभाग का अमला, स्थानीय प्रशासन को भली-भांति जानकारी होती है, किस स्कूल की सेटिंग किस दुकानदार के साथ है। प्रशासन को जनता की शिकायत का इंतजार करने के बजाय जरूरी कदम उठाने चाहिए।

● पारदर्शी और जवाबदेह हेल्पलाइन तंत्र: इंदौर की तर्ज पर बिलासपुर सहित छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों भी एक 'डेडिकेटेड हेल्पलाइन' और व्हाट्सएप नंबर जारी हो जहाँ अभिभावक फोटो और बिल के साथ शिकायत कर सकें।​

● समयबद्ध निराकरण: शिकायत मिलने के 24 से 48 घंटे के भीतर जांच टीम की रिपोर्ट और की गई कार्यवाही को सार्वजनिक किया जाए।

● फ्लाइंग स्क्वाड का गठन: एसडीएम और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम बिना बताए दुकानों और स्कूलों का औचक निरीक्षण करे। दल में प्रशासन, शिक्षा विभाग, जीएसटी, पुलिस के साथ अभिभावक संघ और छात्र संघ के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाय।

● ​इंदौर मॉडल का क्रियान्वयन: 'धारा 163' का प्रयोग जिला दंडाधिकारी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत सख्त प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने चाहिए।​सिर्फ कागजी आदेश जारी करने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती।

● अनिवार्यता खत्म करना: किसी विशेष दुकान से ही किताब या यूनिफॉर्म खरीदने की बाध्यता को अपराध की श्रेणी में रखा जाए।

●​ FIR का प्रावधान: आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूल संचालक और स्टेशनरी विक्रेता पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत तत्काल FIR दर्ज हो।

● 'ओपन मार्केट' नीति का कड़ाई से पालन: ​यूनिफॉर्म की विशिष्टता कम करना: स्कूलों को निर्देश दिया जाए कि यूनिफॉर्म का रंग और डिजाइन ऐसा हो जो सामान्य बाजार में आसानी से उपलब्ध हो। 'लोगो' (Logo) के नाम पर मोनोपोली खत्म की जाए।

●​NCERT/SCERT को प्राथमिकता: निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों के बजाय NCERT की किताबों को प्राथमिकता देने का कड़ा निर्देश हो।

●​डिस्प्ले बोर्ड की अनिवार्यता: हर स्कूल के बाहर और वेबसाइट पर किताबों की सूची और उनकी संभावित कीमत सार्वजनिक करना अनिवार्य हो। साथ ही, यह स्पष्ट लिखा हो कि ये सामग्री बाजार में कहीं भी उपलब्ध है।

● विक्रेता को चाहिए प्रशासन की जारी हेल्पलाइन के नंबर को दुकान में चस्पा करें।वास्तविक एमआरपी रेट की सूची दुकानदार के पास उपलब्ध हो, ग्राहकों को दिखाई जाय। यूनिफॉर्म ,पुस्तक विक्रेताओं एवं निजी शाला संचालकों से किसी विशेष दुकान से गठजोड़कर महंगी पुस्तक नही का प्रमाण पत्र लिया जावे।

●नियमों की जानकारी पर प्रशिक्षण: कार्यवाही के पहले जिला प्रशासन/स्थानीय प्रशासन, शिक्षा विभाग, प्राइवेट स्कूल संचालकों, पुस्तक विक्रेताओं की अभिभावक संघ एवं छात्र संघ के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठक कर नियमों के विषय में प्रशिक्षण देने की जरुरत भी महसूस की जानी चाहिए।

शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय हो

​अक्सर देखा जाता है कि निचले स्तर के अधिकारी सांठगांठ के कारण कार्रवाई नहीं करते।​ यदि किसी क्षेत्र में खुलेआम कमीशनखोरी चल रही है, तो उस क्षेत्र के शिक्षा अधिकारी (DEO/BEO) की जवाबदेही तय की जाए। यदि अधिकारी 'कमीशन या सेटिंग' के खेल में संलिप्त पाए जाते हैं, तो उन पर विभागीय जांच के साथ दंडात्मक कार्यवाही हो। वास्तविक में ​पालकों को राहत तब मिलेगी जब शासन के आदेश 'रद्दी की टोकरी' से निकलकर 'पुलिस थाने की एफआईआर' तक पहुंचेंगे।

क्या है इंदौर मॉडल

●इंदौर में कॉपी-किताबें और यूनिफार्म खरीदी के संबंध में मोनोपोली करने की प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए कलेक्टर जारी किए गए प्रतिबंधात्मक आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है।

● शिकायत सही पाए जाने पर एक स्कूल संचालक और कॉपी-किताब विक्रेता के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है।

●कार्यालय कलेक्टर इन्दौर के हेल्पलाईन नम्बर पर श्री शिकायत पर त्वरित कार्यवाही

●स्कूलों में किताबों और स्टेशनरी के नाम पर अधिक कीमत वसूली या जबरन खरीद की शिकायतों को लेकर प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर अभिभावक सीधे शिकायत सुविधा

●कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी इन्दौर द्वारा धारा 163 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 अन्तर्गत पारित आदेश का संबंधित स्कूल संचालक एवं स्टेशनरी संचालक द्वारा उल्लंघन एवं भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 का उल्लंघन पर संचालक और विक्रेता के विरूद्ध पुलिस एफ.आई.आर. दर्ज।

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