प्राइवेट स्कूलों की मनमानी: पढ़ाई के नाम पर 'पॉकेट मारी' महंगी किताबें, फिक्स वेंडर और 'कमीशन' के खेल से चरमराती शिक्षा व्यवस्था, एक बड़ा सवाल, कौन कसेगा सिंडिकेट पर नकेल?
CG School Education News: छत्तीसगढ़ के साथ ही देशभर के प्राइवेट स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत हो गई है। अभिभावक बच्चों के लिए किताबें खरीद रहे है। हैरानी की बात यह है, प्राइवेट स्कूल किताबों के नाम पर बेतहाशा वसूली कर रहें है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और कालाबाजारी का गोरखधंधा सालों से बदस्तूर जारी है। पैरेंट्स पालक आवाज तो उठाते हैं, लेकिन विरोध के स्वर बच्चों की अच्छी पढ़ाई और बेहतरीन भविष्य के सपनों के आगे दब कर रह जाती है। पढ़ाई के नाम पर जिस तरह 'पॉकेट मारी' की जा रही है। इसे लेकर अब बड़ा सवाल यह है, सिंडिकेट पर नकेल कौन डालेगा?

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बिलासपुर। 4 अप्रैल 2026| एक्सक्लूसिव रिपोर्ट| छत्तीसगढ़ के साथ ही देशभर के प्राइवेट स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत हो गई है। अभिभावक बच्चों के लिए किताबें खरीद रहे है। हैरानी की बात यह है, प्राइवेट स्कूल किताबों के नाम पर बेतहाशा वसूली कर रहें है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और कालाबाजारी का गोरखधंधा सालों से बदस्तूर जारी है। पैरेंट्स पालक आवाज तो उठाते हैं, लेकिन विरोध के स्वर बच्चों की अच्छी पढ़ाई और बेहतरीन भविष्य के सपनों के आगे दब कर रह जाती है। पढ़ाई के नाम पर जिस तरह 'पॉकेट मारी' की जा रही है। इसे लेकर अब बड़ा सवाल यह है, सिंडिकेट पर नकेल कौन डालेगा?
प्राइवेट स्कूलों ने शिक्षा को व्यवसाय बना दिया
महंगी फीस और महंगी किताबें, यूनीफॉर्म की मोनोपोली के बीच तरह-तरह के तरीकों और नियमों से अभिभावकों की पाकेटमारी की जा रही है। छत्तीसगढ़ में तकरीबन 6800 अशासकीय शाला है, जिनमे 534 सीबीएसई पाठ्यक्रम से संबद्धता प्राप्त है, शेष राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम को चलाते हैं।
छत्तीसगढ़ के सरकारी शालाओं में पहली से 12वीं तक हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की सभी किताबें छत्तीसगढ़ पाठय पुस्तक निगम द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है, सत्र 2025- 26 में 23 लाख विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ सरकार ने मुफ्त किताबों का वितरण किया। सीजी बोर्ड से संबंध प्राइवेट स्कूलों में पहली से 10वीं तक नि:शुल्क किताबों का वितरण किया जाता है। करोड़ो के बजट खर्च के करने के बाद भी प्राइवेट स्कूल संचालक निजी पब्लिकेशन की पुस्तकों को मनमाने दाम पर पालकों को खरीदने के लिए मजबूर करते हैं।
एक बड़ा सवाल यह, प्राइवेट पब्लिसर्स की किताबें किस नियम से पढ़ा रहे
CBSE संचालित स्कूलों में एनसीईआरटी NCERT की किताबें जो महज 75 से ₹100 में आती है, उसकी जगह प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तकें जिनका दाम 600 से 700 रुपए तक होता है, स्कूलों के फरमान पर पालक खरीदने के लिए मजबूर हैं। सीबीएसई संचालित स्कूलो में 9वीं से 12वीं कक्षा तक NCERT की किताबों को ही पढ़ाना अनिवार्य है। यानी छात्रों को सिर्फ NCERT की किताबें ही पढ़ाई जाएंगी, सवाल यह है, जब NCERT की किताब अनिवार्य है तो प्राइवेट स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की किताब कैसे बेच रहे हैं?
नर्सरी में बड़ी दुकानदारी
नर्सरी,केजी वन टू में सिलेबस,पुस्तके नहीं तय नही है, छोटे बच्चो को खेल-खेल में सिखाने का निर्देश है, फिर भी प्राइवेट स्कूल संचालक 4500/- रूपए का पुस्तकों का सेट बेच रहे है और 3-4 साल के छोटे बच्चे दर्जनों किताबे पढ़ने मजबूर है।
पढ़िए सीबीएसई से संबंधित स्कूलों के लिए किताबों के संबंध में नियम
सीबीएसई (CBSE) द्वारा स्कूलों को कक्षा 1 से 8 तक के लिए पुस्तकों का चयन करते समय बोर्ड यह स्पष्ट करता है कि जहां तक संभव हो, स्कूलों को NCERT, SCERT की पुस्तकों का ही उपयोग करना चाहिए। बता दें, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए एनसीईआरटी पुस्तकें पूरी तरह अनिवार्य हैं।
इस तरह का घोषणा पत्र है जरुरी
यदि कोई स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें चलाता है, तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा, किताबों में कोई भी ऐसी सामग्री न हो जो किसी जाति, धर्म, लिंग या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाती हो। स्कूल की वेबसाइट पर प्रिंसिपल और मैनेजर द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणा पत्र डालना अनिवार्य है, जिसमें वे किताबों की सामग्री की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। स्कूल किसी खास दुकान से ही किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर नहीं कर सकते। प्रत्येक संबद्ध स्कूल के लिए यह अनिवार्य है, वह अपने द्वारा निर्धारित सभी किताबों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करे। सीबीएसई ने स्कूलों को निर्देश दिया है, वे छोटे बच्चों के बैग का वजन कम करने के लिए उपाय करें। इसमें कक्षा 1 और 2 के बच्चों के लिए होमवर्क न देना और कम से कम किताबें मंगवाना शामिल है। स्कूल आवश्यकतानुसार पूरक राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के अनुरूप (Supplementary) या डिजिटल सामग्री का उपयोग कर सकते हैं।
पैरेंट्स कर सकते हैं शिकायत
यदि कोई स्कूल अनावश्यक रूप से बहुत महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें थोप रहा है, तो सीबीएसई के 'संबद्धता उप-नियम' (Chapter 2, Clause 2.4.7) का हवाला आधिकारिक शिकायत पर कार्यवाही का प्रावधान हैं।यह क्लॉज सुनिश्चित करता है कि स्कूल केवल मुनाफा कमाने के उद्देश्य से निजी प्रकाशकों की महंगी या घटिया सामग्री वाली किताबें न लगा सकें और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण व सुरक्षित शिक्षा मिले।
पढ़िए सीजी बोर्ड से संचालित निजी स्कूलों के लिए नियम
सीजी बोर्ड या छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल (CGBSE) से मान्यता प्राप्त , निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा प्रकाशित और मण्डल द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम की किताबें ही मान्य होती हैं। स्कूल किसी भी स्थिति में पालकों पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें खरीदने का दबाव नहीं बना सकते। किसी एक निर्धारित दुकान से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य करना अवैध है। यदि कोई स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबों के लिए दबाव डालता है या निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली करता है, तो जिला स्तरीय समिति उन पर जुर्माना लगा सकती है। गंभीर मामलों में स्कूल की विभागीय मान्यता रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।प्राइवेट प्रकाशन की किताबें पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं वरन सशर्त हैं, लेकिन स्कूल संचालक अपनी मनमानी नहीं कर सकते।
ये है RTE के मानदंडों के विपरीत
स्कूल यूनिफार्म के नाम पर भी विद्यार्थियों से मनमानी करते हुए प्राइवेट स्कूल संचालकों के द्वारा खुलेआम ठगी की जारी है। अधिकतर प्राइवेट स्कूल विद्यार्थियों की संख्या की जानकारी स्थानीय मार्केट के कपड़ा व्यापारियों को देकर पैंट ,शर्ट ,टाई, बेल्ट मोजा,स्पोर्टस ड्रेस, स्वेटर और ब्लेजर के नाम पर पहले से ही निर्धारित दुकान से अभिभावकों को खरीदी करने पर मजबूर करते हैं। प्राइवेट पब्लिकेशंस की महंगी किताबें एवं यूनिफार्म की मोनोपोली शिक्षा के अधिकार अधिनियम के मानदंडों के विपरीत है।
बता दें, प्राइवेट स्कूलों में छात्रों और अभिभावकों को किताबें और यूनिफॉर्म तय वेंडर से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते है। किताबों वाली लूट से सरकारी छूट बेमानी हो गई है। स्कूल शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के द्वारा जारी निर्देश केवल कागजों तक सीमित है। राज्य में शिक्षा के नाम पर मची लूट से कोई वर्ग अछूता नही है।
