Begin typing your search above and press return to search.

छत्तीसगढ़ में गजब का फर्जीवाड़ा: बैगा जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी हासिल करने का खेला, असली आदिवासी आज भी नौकरी के लिए भटक रहे!

CG News: छत्तीसगढ़ में गजब का खेल चल रहा है। बैगा जनजाति के नाम पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र हासिल कर नकली बैगा आदिवासी मजे से सरकारी नौकरी कर रहे हैं। असली बैगा आदिवासी आज भी दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में गजब का फर्जीवाड़ा: बैगा जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी हासिल करने का खेला, असली आदिवासी आज भी नौकरी के लिए भटक रहे!
X
By Radhakishan Sharma

बिलासपुर।21 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ में गजब का खेल चल रहा है। बैगा जनजाति के नाम पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र हासिल कर नकली बैगा आदिवासी मजे से सरकारी नौकरी कर रहे हैं। असली बैगा आदिवासी आज भी दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। अचरज की बात ये, बैगा जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वालों की जांच की मांग के बाद भी आजतलक सरकार की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। संगठित और सुनियोजित अपराध का खामियाजा बैगा जनजाति के युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।

बैगा जनजाति का फर्जी जाति प्रमाण पत्र हासिल कर नौकरी करने वालों के खिलाफ प्रभावी तरीके से कार्रवाई की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने कमिश्नर बिलासपुर संभाग को ज्ञापन सौंपा था। इसमें ऐसे लोगों के नाम की सूची भी दी गई थी, जिनके द्वारा बैगा जनजाति का फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने और नौकरी करने का मामला है। शिकायत में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले के मस्तूरी तहसील की बताई गई है।

जिन लोगों के दस्तावेजों में बैगा ST दर्ज है, उनके पूर्वजों की जाति, राजस्व रिकॉर्ड, स्कूल दाखिल-खारिज दस्तावेज और निर्वाचन दस्तावेजों में ढीमर OBC मिली है। . कई ऐसे भी मामले सामने आए है जिसमें पिता की जाति ढीमर है, जबकि बेटे की जाति प्रमाण पत्र बैगा के नाम पर जारी हुआ है। कुछ ऐसी भी शिकायतें है जिसमें पत्नी ST और पति OBC दर्ज होने बड़ी गड़बड़ी है।

मस्तूरी में बड़ा फर्जीवाड़ा, कहां से आ गए बैगा आदिवासी?

वर्ष 2023 में सहायक शिक्षक के 55 पदों पर भर्ती हुई। 250 के करीब नए जाति प्रमाण पत्र कुछ महीने ही जारी किए गए हैं।जाहिर सही बात है, नए बनवाए गए जाति प्रमाण पत्र का उपयोग आगे होने वाली नियुक्तियों में किया जाएगा। सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते ने बताया, 2015–16 में किए गए बैगा जनजाति के सर्वे में साफ था, मस्तूरी क्षेत्र में बैगा समुदाय निवासरत नहीं है। आदिमजाति विभाग के मंत्री ने बीते विधानसभा सत्र के दौरान इस क्षेत्र में बैगा जनजाति की अनुपस्थिति की पुष्टि की है। सवाल यह उठ रहा है, जब मस्तूरी क्षेत्र में बैगा आदिवासी है ही नहीं तो फिर बैगा आदिवासी के नाम से फर्जी जाति प्रमाण किसके जरिए जारी किया जा रहा है।

लगातार हो रही शिकायतें, कार्रवाई अब तक नहीं

बता दें, फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के कुछ साल बाद ही शिकायतें मिलने लगी थी। आदिवासी समाज से जुड़े लोगों के द्वारा लगातार शिकायतें की जा रही है। अचरज की बात ये इस संबंध में आजतलक कोई प्रभावी कार्रवाई सरकार की तरफ से नहीं की गई है। कई मामलों की जांच में पाया गया कि जिन व्यक्तियों को विशेष संरक्षित जनजाति के नाम पर प्रमाण पत्र जारी किया गया, वे वास्तव में उस श्रेणी से संबंधित नहीं थे। अधिकांश प्रकरण ढीमर और धीवर समाज से जुड़े लोगों के पाए गए, जो बैगा के बजाय ओबीसी वर्ग के अंतर्गत आते हैं।

सर्व आदिवासी समाज का कहना है, ऐसे सभी मामलों में फर्जी प्रमाण पत्र धारकों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हों और जो लाभ उन्होंने गलत तरीके से प्राप्त किए हैं, उनकी वसूली भी की जाए।

छत्तीसगढ़ में बैगा जनजाति मुख्य रुप से कुछ ही जिलों में ही पाई जाती है। 2011 की जनगणना के अनुसार इनकी आबादी 89 हजार 744 है।

OBC जाति की महिला ने आदिवासी बैगा के नाम पर टीचर की कर रही थी नौकरी

फर्जी जाति प्रमाण पत्र के एक मामले में जेडी बिलासपुर संभाग ने एक महिला शिक्षिका को बर्खास्त कर दिया था। उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति की रिपोर्ट और हाई कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद संयुक्त संचालक शिक्षा जेडी ने महिला टीचर को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। उर्मिला बैगा बिल्हा ब्लॉक के गवर्नमेंट मिडिल स्कूल में पदस्थ थी।

टीचर उर्मिला बैगा पर यह आरोप था कि, उन्होंने अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरी हासिल की है। इस मामले की शिकायत पर रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की छानबीन समिति ने जांच की, जिसमें उनके पिता रतनलाल के दादा के अभिलेखों से पता चला कि उनकी जाति ‘ढीमर’ है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग में आता है। जबकि उन्होंने ‘बैगा’ जाति का प्रमाण पत्र पेश किया था। महिला ने फर्जी प्रमाणपत्र से लगभग 18 साल नौकरी कर ली थी।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

Read MoreRead Less

Next Story