Bilaspur High Court: कर्मचारियों की खबर: हाई कोर्ट ने कहा: सुनवाई का अवसर दिए बिना ACR में नहीं कर सकते प्रतिकूल टिप्पणी
Bilaspur High Court:बिलासपुर हाई कोर्ट का यह फैसला कर्मचारियों के लाइट महत्वपूर्ण हो सकता है। कोर्ट ने कहा, सुनवाई का अवसर दिए बिना ACR में प्रतिकूल टिप्पणी Adverse Comment नही कर सकते।

Bilaspur High Court: बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट का यह फैसला कर्मचारियों के लाइट महत्वपूर्ण हो सकता है। कोर्ट ने कहा, सुनवाई का अवसर दिए बिना ACR में प्रतिकूल टिप्पणी Adverse Comment नही कर सकते।
मुकेश शर्मा, जिला जांजगीर-चाम्पा में आबकारी मुख्य आरक्षक के पद पर पदस्थ हैं। वर्ष 2023 में आबकारी आयुक्त, रायपुर द्वारा मुख्य आरक्षक से सब इन्सपेक्टर पद पर प्रमोशन के लिए विभागीय परीक्षा का आयोजन किया गया। भर्ती परीक्षा में उसे वर्ष 2017, 2018 एवं 2019 के ACR में प्रतिकूल टिप्पणी होने के कारण, अंक में कटौती होने से सब-इन्सपेक्टर के पद पर प्रमोशन से वंचित कर दिया गया।
विभाग की इस कार्रवाई को मुकेश शर्मा ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं वर्षा शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं वर्षा शर्मा ने कोर्ट के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा देवदत्त विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य, रूखसाना शाहीन खान विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं आरके. जीवनलता देवी विरूद्ध हाईकोर्ट ऑफ मणिपुर के मामले में यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया कि किसी शासकीय कर्मचारी के ACR में प्रतिकूल टिप्पणी करने के पूर्व उसे निर्धारित समयावधी के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी ना किये जाने पर प्रतिकूल टिप्पणी स्वतः ही समाप्त हो जाती है।
अधिवक्ता पांडेय ने बताया कि याचिकाकर्ता वर्ष 2018-2019 के दौरान अनुसूचित जिला-जीपीएम में पदस्थ था। छत्तीसगढ़ शासन के वर्ष 2005 के सर्कुलर के तहत् "ख" श्रेणी को "क" श्रेणी मान्य किया जाएगा। चूंकि उक्त विभागीय भर्ती परीक्षा में याचिकाकर्ता को 200 में से 172 अंक प्राप्त हुए, जबकि अंतिम चयनित अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवार कीर्ति ठाकुर को 175 एवं राहुल सिंह बघेल को 177 अंक मिला। यदि याचिकाकर्ता को 03 अतिरिक्त अंक प्रदान किये जाते हैं ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता आबकारी उपनिरीक्षक के पद पर प्रमोशन के पात्र है। मामले की सुनवाई के कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2005 में जारी सर्कुलर के तहत याचिकाकर्ता ACR में अतिरिक्त अंक प्राप्त कर चयन का हकदार है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आबकारी उपनिरीक्षक के पद पर प्रमोशन देने राज्य शासन को आदेश दिया है।
