हाई कोर्ट बोला: मरते हुए व्यक्ति के होठों पर सत्य निवास करता है, इसलिए आरोपी पति को भुगतना होगा उम्र कैद की सजा, चरित्र शंका पर पत्नी को जलाकर मार डाला था

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Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पांडातराई में चरित्र पर आशंका के चलते पति ने पत्नी पर केरोसीन डालकर जिंदा जला दिया। आग से जलती हुई महिला ने तालाब में कूदकर अपनी जान बचाने की कोशिश भी की, लेकिन वह नहीं बच सकी। पति उसे जलते हुए देखता रहा। हाई कोर्ट ने आरोपी पति की उम्र कैद की सजा को बरकरार रखते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, मरते समय इंसान झूठ नहीं बोलता।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने हत्या के दोषी पति की अपील खारिज कर दी है। डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के उम्रकैद के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा है, मृत्यु पूर्व बयान अपने आप में दोषसिद्धि का ठोस आधार है, कोर्ट ने कहा, मरते हुए व्यक्ति के होठों पर सत्य निवास करता है।
पढ़िए क्या है पूरा मामला ?
पांडातराई निवासी आरोपी संतोष उर्फ गोलू श्रीवास्तव ओर पत्नी लता के बीच आए दिन विवाद होते रहता था। विवाद की वजह संतोष अपनी पत्नी के चरित्र पर शंका करता था। घटना के दिन दोनों के बीच फिर इस बात को लेकर विवाद हुआ। संतोष ने घर कर दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और पत्नी लता के ऊपर कैरोसिन डालकर आग लगा दी। आगजनी की इस घटना में लता बुरी तरह झुलस गई थी, इसी हालत में वह बचने के लिए घर के पास स्थित तालब में कूदकर जान बचाने की कोशिश की। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को दिया बयान
जिंदगी और मौत के बीच झूल रही लता काअस्पताल में इलाज चल रहा था, उसकी स्थिति को देखते हुए मृत्यु पूर्व बयान कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को भेजा गया। मजिस्ट्रेट के सामने लता ने अपने बताया, पति ने उसके ऊपर कैरोसिन डालकर आग लगा दी थी। तकरीबन 21 दिनों तक लता का अस्पताल में इलाज चला। 9 दिसंबर 2019 को ''सेप्टिक शॉक'' के कारण उसकी मौत हो गई थी।
ट्रॉयल कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
पुलिस ने जांच और महिला के कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के सामने मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर आरोपी पति संतोष श्रीवास के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर, गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने तय समय पर ट्रायल कोट के समक्ष आरोप पत्र पेश किया, तब ट्रॉयल के दौरान पति को हत्या का दोषी पाया गया। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई।
ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील
ट्रायल कोर्ट के फैसले को आरोपी पति संतोष ने चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील पेश की थी। अपील पर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, यदि मौत से पहले दिया गया बयान विश्वसनीय है, तो बिना किसी अन्य गवाह के भी सजा दी जा सकती है।
ये गवाही बना फैसले का पुख्ता आधार
डॉक्टर ने भी पुष्टि की थी कि बयान देते समय पीड़िता मानसिक रूप से स्वस्थ्य थी। पड़ोसी सावित्री बाई और सुशीला बाई ने पीड़िता को जलती हुई हालत में घर से बाहर निकलते और तालाब में कूदते देखा था।
घटना स्थल से मिले जले हुए कपड़ों और आरोपी के टी-शर्ट पर मिट्टी तेल के अंश पाए गए थे। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया, जब पत्नी आग की लपटों में घिरी तालाब में तड़प रही थी, तब आरोपी पति बाहर खड़े होकर तमाशा देख रहा था। उसने उसे बचाने की कोई कोशिश नहीं की।
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