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हाई कोर्ट नाराज: छत्तीसगढ़ के पांच हजार से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं, हाई कोर्ट ने कहा, ये शर्मनाक...

Bilaspur High Court:छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्यभर के सरकारी स्कूलों में कमरों की लगातार खराब स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि पहले स्वतः संज्ञान लेते हुए दिए गए निर्देशों के बावजूद "कोई संतोषजनक सुधार नहीं हुआ है"।

Bilaspur High Court
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फोटो सोर्स- NPG News

By Radhakishan Sharma

बिलासपुर।27 फरवरी 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्यभर के सरकारी स्कूलों में कमरों की लगातार खराब स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि पहले स्वतः संज्ञान लेते हुए दिए गए निर्देशों के बावजूद "कोई संतोषजनक सुधार नहीं हुआ है"। नाराज डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ पूरी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 23 मार्च, 2026 की तिथि तय कर दी है।

चीफ जस्टथ्स रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने 24 फरवरी, 2026 को जनवरी 2025 की एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाल ही में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें इस बात की जानकारी दी गई थी, विद्यालयों में लड़कियों के शौचालयों की भयावह कमी और दयनीय स्थिति। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 5,000 से अधिक विद्यालयों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जबकि 8,000 से अधिक विद्यालयों में शौचालय बेहद खराब स्थिति में हैं।

डिवीजन बेंच ने गौर किया कि ऐसी स्थितियों से छात्रों और शिक्षकों दोनों को परेशानी हो रही है, मूत्र संक्रमण की रिपोर्ट सामने आ रही हैं और छात्राओं में असुविधा बढ़ रही है। अकेले बिलासपुर जिले में ही 160 से अधिक स्कूलों में शौचालय संबंधी गंभीर समस्याएं बताई जा रही हैं, और 200 से अधिक स्कूलों में शौचालय अनुपयोगी हैं।

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों के लिए अलग और कार्यात्मक शौचालयों की अनुपस्थिति अनुपस्थिति और स्कूल छोड़ने की दर में वृद्धि का कारण बन सकती है, और इसे एक प्रणालीगत विफलता बताया।

पीठ ने पाया कि जनहित याचिका जनवरी 2025 में इसी तरह की चिंताओं को दूर करने के लिए दर्ज की गई थी। हालांकि, नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि जमीनी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। हाई कोर्ट ने कहा, "समाचार रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य के स्कूलों में शौचालयों की स्थिति में संतोषजनक सुधार नहीं हुआ है, जिससे छात्राओं का रोजमर्रा का जीवन बहुत मुश्किल हो रहा है।

केंद्र रिपोर्ट भयावह और चिंताजनक

रिपोर्ट में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के यू-डीआईएसई 2024-25 के आंकड़ों का हवाला देते हुए खुलासा किया गया है कि राज्य के 56,615 स्कूलों में से 54,715 स्कूल जिन स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय हैं, उनमें से केवल 52,545 ही चालू हैं। स्कूलों के युक्तिकरण के बाद स्कूलों की कुल संख्या घटकर लगभग 38,000 रह जाने के बावजूद, 1,000 से अधिक संस्थानों में अभी भी लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं।

राज्य में सरकारी स्कूलों में19.54 लाख छात्राएं नामांकित

इस स्थिति को "शर्मनाक" बताते हुए, अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों के लिए अलग और कार्यात्मक शौचालयों की अनुपस्थिति अनुपस्थिति और स्कूल छोड़ने में योगदान दे सकती है, इसे एक प्रणालीगत विफलता बताते हुए कहा कि यह महिला छात्रों को असमान रूप से प्रभावित करती है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को 23 मार्च, 2026 को अगली सुनवाई की तारीख से पहले समाचार रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों के संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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