Bilaspur High Court: अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं, रियायत है, हाई कोर्ट ने कहा- मौजूदा पॉलिसी ही लागू होगी
Bilaspur High Court: अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय के अग्रवाल के सिंगल बेंच ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर विभाग जिस दिन विचार करता है, राज्य शासन द्वारा वर्तमान में लागू नियमों व कानून ही लागू होंगे। इसमें रद्दोबदल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा, अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं है, यह उस परिवार के लिए राज्य शासन द्वारा दी जाने वाली रियायत है।

Anukampa Niyukti Ko Lekar Faisla: बिलासपुर। अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय के अग्रवाल के सिंगल बेंच ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर विभाग जिस दिन विचार करता है, राज्य शासन द्वारा वर्तमान में लागू नियमों व कानून ही लागू होंगे। इसमें रद्दोबदल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा, अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं है, यह उस परिवार के लिए राज्य शासन द्वारा दी जाने वाली रियायत है।
अनुकंपा नियुक्ति को रद्द करने वाले डीईओ के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने साफ कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं है। यह राज्य शासन द्वारा मृत कर्मचारी के परिजन को दी जाने वाली सुविधा है। अनुकंपा नियुक्ति पर जिस दिन विभाग निर्णय करता है, राज्य शासन की पॉलिसी उसी दिन से लागू होती है। कर्मचारी की मृत्यु के दाैरान शासन की पॉलिसी क्या थी, क्या मापदंड तय किए गए थे, इससे परे आवेदन पर विचार करते समय जो नियम व पॉलिसी लागू होगी उसी आधार पर निर्णय लिए जाएंगे।
क्या है मामला
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर निवासी अनूप कुजूर सहायक शिक्षक थे। सेवाकाल के दौरान 6 दिसंबर 2007 को उनका निधन हो गया। पिता के निधन के तकरीबन 9 साल बाद पुत्र अनूप कुजूर ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन पेश किया। आवेदन पर विचार करते हुए उसे सहायक ग्रेड तीन के पद पर नियुक्ति दी गई। नियुक्ति के बाद डीईओ को इस बात की जानकारी मिली कि आवेदनकर्ता सहायक ग्रेड तीन की मां हेड मास्टर के पद पर पदस्थ हैं।
डीईओ ने सहायक ग्रेड तीन अनूप की नियुक्ति को रद्द करने का आदेश जारी किया। अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में राज्य शासन ने 29 अगस्त 2016 की नए नियम व मापदंड तय कर दिया था। राज्य शासन के नए मापदंड व पॉलिसी के अनुसार परिवार का कोई सदस्य शासकीय सेवा में है तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जाएगी। डीईओ के आदेश को चुनौती देते हुए अनूप ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया था कि पिता की जब मृत्यु हुई, उस वक्त नई पॉलिसी लागू नहीं की गई थी।
इस पॉलिसी में परिवार के अन्य सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति में रोक नहीं लगाई गई थी। लिहाजा वे अनुकंपा नियुक्ति के पात्र हैं। मामले की सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने अपने फैसले में कहा, अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं है,यह राज्य शासन द्वारा मृतक शासकीय कर्मचारी के परिवार को दी जाने वाली रियायत है। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर जिस तिथि को विभाग प्रमुख विचार करता है, राज्य शासन का मौजूदा कानून ही प्रभावी रहता है। मौजूदा कानून के अनुसार डीईओ का निर्णय सही है। इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने डीईओ के फैसले को बकरार रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।
