डीजीपी पर अनिर्णय क्यों? संसद में अमित शाह CG पुलिस को सैल्यूट कर रहे और यहां....? जानिये संडे को आर्डर निकलते-निकलते क्यों रुक गया?

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रायपुर। 7 अप्रैल 2026| छत्तीसगढ़ में पूर्णकालिक डीजीपी का पेंच ऐसा फंसा है कि वह सुलझने का नाम नहीं ले रहा। हालांकि, प्रभारी डीजीपी का मामला यूपी समेत कई और राज्यों में भी है। मगर छत्तीसगढ़ के साथ यह अलग इसलिए है कि बाकी राज्यों ने यूपीएससी को न प्रस्ताव भेजा और न यूपीएससी ने डीजीपी के लिए कोई पेनल अनुमोदित कर भेजा है। इसलिए, बाकी राज्यों के पास बचाव के रास्ते हैं। छत्तीसगढ़ से यूपीएससी इसलिए खफा है कि दो सदस्यीय पेनल भेजने के बाद भी छत्तीसगढ़ ने छह महीने से ज्यादा वक्त हो जाने के बाद भी अभी तक पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति नहीं की।
जबकि, पूर्णकालिक की जगह प्रभारी डीजीपी रखने के केस में सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त तेवर अख्तियार कर लिया है। उसने राज्यों को दो हफ्ते का टाईम दिया था। सुप्रीम कोर्ट के डेडलाइन का हवाला देते हुए यूपीएससी ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील को पत्र लिख पूछा था कि आप और एसीएस होम ये बताएं कि पेनल अनुमोदित कर भेजने के बाद भी आपने पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति क्यों नहीं की। यूपीएससी की नाराजगी की एक और वजह है। डीजीपी के पेनल के लिए उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी। आधा दर्जन से अधिक उसने क्वेरियां भेजी। इसी बीच आईपीएस जीपी सिंह का केस आ गया। सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद यूपीएससी ने प्रस्ताव में उनका नाम भी शामिल करने कहा। कुल मिलाकर पेनल बनाने में यूपीएससी के तीन से चार महीने लगे। इसके बाद यूपीएससी ने दो सदस्यीय पेनल बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार को भेजा।
दो नामों का पेनल
छत्तीसगढ़ सरकार ने डीजीपी के लिए तीन नामों को पेनल यूपीएससी को भेजा था। इनमें पवनदेव, अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता का नाम शामिल था। बाद में फिर आईपीएस जीपी सिंह का नाम भी जुड़ा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राज्य सरकार ने आनन-फानन में डीपीसी कर जीपी सिंह को एडीजी से प्रमोट कर डीजी बनाया और फिर उनका नाम भी यूपीएससी को भेजा। अलबत्ता, यूपीएससी ने पवनदेव और जीपी सिंह के नाम को मान्य नहीं किया। डीपीसी की बैठक में दो नाम फायनल हुए, अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता। गौतम 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और हिमांशु गुप्ता 1994 बैच के।
फरवरी 2025 से प्रभारी डीजीपी
4 फरवरी 2025 को अशोक जुनेजा के रिटायर होने पर छत्तीसगढ़ सरकार ने अरुणदेव गौतम को प्रभारी डीजीपी अपाइंट किया था। तब समझा गया कि गौतम ही आगे चलकर कंटिन्यू करेंगे। उसके बाद यूपीएससी से दो सदस्यीयी पेनल आ गया। मगर उसके बाद भी सरकार ने पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति नहीं कर पाई।
अमित शाह ने दी बधाई
31 मार्च को छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त हुआ। इससे एक रोज पहले पार्लियामेंट में भाषण देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को नक्सल मुक्त घोषित करते हुए सुरक्षा बलों को सैल्यूट किया। उन्होंने खासतौर से छत्तीसगढ़ पुलिस का नाम लिया। बाद में उन्होंने प्रभारी डीजीपी को इस कामयाबी के लिए बधाई भी दी। इसके बाद तो तय हो गया था कि सरकार अब पूर्णकालिक डीजीपी का आदेश निकाल देगी।
संडे को मंत्रालय खुला रहा
छत्तीसगढ़ के सिस्टम पर सुप्रीम कोर्ट की तलवार लटकी हुई है, इसी दौरान सीएम के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह तीन हफ्ते की ट्रेनिंग पर मसूरी जा रहे थे। सो, पांच अप्रैल रविवार को गृह विभाग ने पूर्णकालिक डीजीपी का आदेश निकालने की पूरी तैयारी कर ली थी। चूकि छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त हुआ है, केंद्रीय गृह मंत्री छत्तीसगढ़ पुलिस को सैल्यूट कर रहे हैं। ऐसे में, इस लिहाज से अरुण देव गौतम के पूर्णकालिक डीजीपी का नाम फायनल माना जा रहा था क्योंकि अगर उन्हें हटाया गया तो फिर मैसेज अच्छा नहीं जाएगा। यही होगा कि सरकार ने जीती हुई सेना के कमांडर की छुट्टी कर दी। इस दृष्टि से गौतम को पूर्णकालिक डीजीपी बनाए जाने की अटकलें तेज थी। मगर शाम छह बजने के बाद भी उपर से कोई निर्देश नहीं आया, इसके बाद गृह विभाग के अधिकारी, कर्मचारी मंत्रालय से लौट गए।
हैवीवेट मिनिस्टर का ब्रेकर
सूत्रों से पता चला है कि छत्तीसगढ़ के एक हैवीवेट मिनिस्टर अरुणदेव गौतम को पूर्णकालिक डीजीपी बनाने के पक्ष में नहीं हैं। वे हिमांशु गुप्ता को इस कुर्सी पर देखना चाहते हैं। इस चक्कर में मामला अटक गया। सिस्टम धर्मसंकट में है कि नक्सलियों से जंग जीते कमांडर को हटाएं तो मुश्किल और पूर्णकालिक न बनाए तो सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का खतरा।
सीएम लेंगे अंतिम फैसला
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दो दिन के दिल्ली दौरे पर हैं। उनके लौटने के बाद ही अब पूर्णकालिक डीजीपी पर कोई फैसला लिया जाएगा। पता चला है कि मुख्यमंत्री इस पर अंतिम फैसला लेंगे। वैसे भी मुख्य सचिव, डीजीपी के साथ ऑल इंडिया सर्विस के ट्रांसफर, पोस्टिंग का मामला मुख्यमंत्री के अधीन होता है।
जानकारों का कहना है...
जानकारों का कहना है कि पेनल में दो नाम है। अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता। सरकार को जिस किसी को बनाना हो, निर्णय लेकर उस पर मुहर लगा देनी चाहिए। क्योंकि, अनिर्णय से फोर्स में मैसेज अच्छा नहीं जाता।
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