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Supreme Court: तलाकशुदा लेकिन अविवाहित पत्नी को मिलेगा भरण-पोषण, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया

तलाक के बाद भरण पोषण के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि तलाक के बाद अगर पत्नी अविवाहित है तो वह भरण-पोषण की हकदार है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाह के दौरान जैसा जीवन स्तर रहा है उसी के अनुरुप आगे भी जीवन स्तर है,इसलिए भरण पोषण जरुरी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में साथ हाई कोर्ट के फैसले से दिए जा रहे भरण पोषण राशि को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: अपराध के बाद फरार होना अपने आप में दोष साबित नहीं करता, लेकिन यदि......।
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Supreme Court

By Radhakishan Sharma

दिल्ली। तलाक के बाद भरण-पोषण को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि तलाक के बाद अगर पत्नी ने दूसरी शादी नहीं की है और अविवाहित है तो उसे भरण-पोषण का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी लिखा है कि विवाह के बाद जैसा जीवन स्तर में वह गुजारा किया है आगे भी उसी अनुरुप जीवन स्तर रहे इसलिए गुजारा भत्ता आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी गुजारा भत्ता को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। अब महिला को प्रति महीने 50 हजार रुपये गुजारा भत्ता मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पत्नी अविवाहित के साथ ही स्वतंत्र रूप से रह रही है। इसलिए वह उस स्तर के भरण-पोषण की हकदार है, जो विवाह के दौरान जिस जीवन स्तर के साथ गुजारा कर रही थी। गुजारा भत्ता उसके सुरक्षित भविष्य के लिए जरुरी है। राखी साधुखान की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रमनाथ व जस्टिस संदीप मेहता की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है। याचकाकर्ता का वर्ष 1997 में विवाह हुआ। एक साल बाद वर्ष 1998 में बेटा पैदा हुआ। वर्ष 2008 में पति पत्नी अलग हो गए।

कोलकाता हाई कोर्ट ने दिया था तलाक व भरण पोषण का आदेश-

मानसिक क्रूरता के आधार पर कोलकाता हाई कोर्ट ने तलाक की मंजूरी दे दी थी। विवाह विच्छेद की अनुमति देने के साथ ही गुजारा भत्ता के तहत प्रति महीने 20 हजार रुपये की राशि तय कर दी थी। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह राशि हर तीन साल में पांच फीसदी बढ़ोतरी होगी और इसी के अनुसार गुजारा भत्ता देना होगा।

हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती-

हाई कोर्ट द्वारा तय गुजारा भत्ता को अपर्याप्त मानते हुए पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। दायर याचिका में पत्नी में तर्क दिया था कि पति की आर्थिक बेहतर है, आर्थिक स्थिति को देखते हुए तय गुजारा भत्ता की राशि अपर्याप्त है। हाईकोर्ट ने मानसिक क्रूरता तथा विवाह के अपूरणीय विघटन के आधार पर तलाक का आदेश दिया तथा स्थायी गुजारा भत्ता 20,000 रूपए प्रति माह निर्धारित किया, जो हर तीन वर्ष में 5% की वृद्धि के अधीन था। इससे असंतुष्ट होकर पत्नी ने गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तथा तर्क दिया कि उसके पति की वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह राशि अपर्याप्त है। याचिका के अनुसार पति का कोलकाता में बहुत बड़ा संस्थान है। मासकि आय डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा है। वर्तमान में तय गुजारा भत्ता विवाह के दौरान जिस स्तर में उसने जीवन गुजारा है बहुत कम है। पति ने कहा कि उसकी दूसरी पत्नी, आश्रित परिवार तथा वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उस पर है। पति ने यह भी कहा कि उनका बेटा अपनी मां के साथ ही रहता है और वह 26 साल का हो गया है और आर्थिक रूप से मजबूत है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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