Bilaspur High Court: हाई कोर्ट ने साइबर क्राइम पर जताई चिंता: केंद्र सरकार को राज्य में इस पद पर तत्काल नियुक्ति के दिए निर्देश
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का कोई विशेषज्ञ नहीं होने को लेकर छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने कहा कि गंभीर चिंता का विषय है, जहां साइबर अपराध हो रहे हैं, ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति बिल्कुल जरूरी है..! केंद्र सरकार को तत्काल नियुक्ति के लिए दिए निर्देश।

Bilaspur High Court
Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का कोई विशेषज्ञ नहीं होने को लेकर जनहित याचिका लगाई गई। इस पूरे मामले में बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीविजन बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बैंच ने इस मामले में कहा कि गंभीर चिंता का विषय है, जहां साइबर अपराध हो रहे हैं, ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति बिल्कुल जरूरी है..! केंद्र सरकार को तत्काल नियुक्ति के लिए उचित कदम उठाने निर्देश दिए हैं। वहीं केंद्र सरकार का पक्ष रखने वाले असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा को इस मामले में 4 सप्ताह में शपथपत्र पेश कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता शिरीन मालेवर ने अधिवक्ता रुद्र प्रताप दुबे और गौतम खेत्रपाल के माध्यम से याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि देश भर में 16 राज्यों में एक्सपर्ट की नियुक्ति की गई है जो कि केंद्र सरकार के द्वारा की जाती है। फिलहाल छत्तीसगढ़ प्रदेश में किसी एक्सपर्ट की नियुक्ति नहीं हैं। जिसपर पर महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने कोर्ट को जानकारी दी। बैंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि आईटी अधिनियम राज्य के लिए धारा 79 के तहत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का कोई परीक्षक नहीं है। जिसपर कोर्ट ने प्रतिवादियों को नियुक्त करने का निर्देश दिया है। वहीं संघ की परिषद की ओर से अधिवक्ता को चार सप्ताह में हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए है। चीफ जस्टिस ने इस मामले में सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा जैसा कि मामला प्रतीत होता है, आजकल एक गंभीर चिंता का विषय है। साइबर अपराध हो रहे हैं, ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति बिल्कुल जरूरी है और भरोसा है कि भारत संघ नियुक्ति के लिए तत्काल कदम उठाएगा। वहीं अधिवक्ता रमाकांत मिश्रा को 4 सप्ताह में हलफनामा दाखिल कर सूचित करने निर्देश दिया है कि किस व्यक्ति को नियुक्त किया गया है। अगली सुनवाई की तारीख 10 मार्च को रखी गई है।