आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन: व्रत में भूलकर न करें ये 7 गलतियां, क्यों किया जाता है दुर्गा सप्तशती का पाठ… जाने भोग व पूजन विधि, ये आरती कर मां चंद्रघंटा माता को करें प्रसन्न

Update: 2020-03-27 06:33 GMT

रायपुर 27 मार्च 2020। इस साल चैत्र नवरात्रि 25 मार्च से शुरू हो चुकी हैं जो कि दो अप्रैल तक चलेंगी। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन माना जाता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघण्टा की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के 9 स्वरूपों में से मां चंद्रघण्टा उनकी तीसरी स्वरूप हैं। मां पार्वती के सुहागन स्वरूप को देवी चंद्रघण्टा के नाम से जाना जाता है। आज के दिन मां चंद्रघण्टा की पूजा करने से व्यक्ति के अंदर साहस, वीरता और विनम्रता जैसे गुणों का विकास होता है।

मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा अलग-अलग रूप में आपके घर में विराजमान रहती हैं। मां दुर्गा 9 रूपों- मां शैलपुत्र, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा देवी, मां स्कंदमाता, मां कत्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की जो विधि विधान और आस्था के साथ पूजा करता है उसके घर में सुख समृद्धि का वास होता है।

लेकिन इन नौ दिनों के दौरान यदि आप कोई भी भूल करते हैं तो मां नाराज हो सकती हैं और व्रत व उपासना का पुण्य नहीं मिलता। नवरात्रि के दौरान आपको कुछ वर्जित कार्य भूलकर भी नहीं करने चाहिए, वरना देवी मां नाराज हो सकती हैं और व्रत रखने का शुभ फल नहीं मिलता। आइए जानते हैं इन कार्य के बारे में-

नवरात्रि में न करें ये 7 गलतियां-

1- नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना और अखंड ज्योति जलाई जाती है। इन दिन घर को कभी भी खाली नहीं छोड़ना चाहिए और संभव हो तो आप खुद घर में रहें।

2- नवरात्रि के सभी दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को ना बाल कटवाने चाहिए और ना शेविंग करनी चाहिए। लेकिन बच्चों का मुंडन संस्कार करवाना शुभ होता है।

3- इन 9 दिन आपको दोपहर के समय सोना नहीं चाहिए, इससे व्रत का फल नहीं मिलता।

4- व्रत के दौरान साफ-सुथरे और धुले कपड़े पहनने चाहिए। इससे मां दुर्गा प्रसन्न रहती हैं और अपने घर को भी स्वच्छ रखना चाहिए। यानी पवित्रता में बाधा नहीं पड़ी चाहिए।

5- नवरात्र में व्रत के दौरान चमड़े से बनी वस्तुओं जैसे बेल्ट, जूते-चप्पल, बैग आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

6- नवरात्रि व्रत के दौरान शारिक संबंध नहीं बनाना चाहिए।

7- नवरात्रि के नौ दिनों तक यदि घर में किसी का व्रत है तो मांसाहार से परहेज करना चाहिए और तामसी प्रवृत्ति का भोजन जैसे लहसुन-प्याज युक्त सब्जी नहीं खानी चाहिए।

पूजा से मिलता है ये लाभ

देवी दुर्गा का तीसरा रूप चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन देवी के इस रूप की आराधना करने से साधक को गजकेसरी योग का लाभ प्राप्त होता है। मां चंद्रघंटा की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में उन्नति, धन, स्वर्ण, ज्ञान व शिक्षा की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि जिन्हें मधुमेह, टाइफाइड, किडनी, मोटापा, मांस-पेशियों में दर्द, पीलिया आदि है उन्हें देवी के तीसरे स्वरूप की पूजा करने से लाभ मिलता है। तीसरे दिन दूध से बनी मिठाई का भोग मां को लगाकर को दान दें। इससे दुःखों से मुक्ति के साथ-साथ परम आनन्द की प्राप्ति होती है।

चंद्रघंटा की आरती

पूर्ण कीजो मेरे काम

चंद्र समान तू शीतल दाती

चंद्र तेज किरणों में समाती

क्रोध को शांत बनाने वाली

मीठे बोल सिखाने वाली

मन की मालक मन भाती हो

चंद्र घंटा तुम वरदाती हो

सुंदर भाव को लाने वाली

हर संकट मे बचाने वाली

हर बुधवार जो तुझे ध्याये

श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय

हर संकट मे बचाने वाली

हर बुधवार जो तुझे ध्याये

श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं

सन्मुख घी की ज्योत जलाएं

शीश झुका कहे मन की बाता

पूर्ण आस करो जगदाता

कांची पुर स्थान तुम्हारा

करनाटिका में मान तुम्हारा

नाम तेरा रटू महारानी

‘भक्त’ की रक्षा करो भवानी

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