बंगाल की 50 सीटों का परिणाम तय करते हैं बिहारी, बिहार के ये नेता भी बंगाल में लड़ रहे चुनाव

Bengal Election News: पश्विम बंगाल विधानसभा चुनाव में काफी कम समय बचा है। सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी है। इस बार दोनों पार्टियों की नजर पश्चिम बंगाल में रह रहे बिहारी मतदाताओं पर भी है।

Update: 2026-03-28 04:41 GMT

Bihari Leaders In Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हैं। 294 सीटों वाले इस राज्य में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के लिए बड़ी चुनौती है। यहां 50 से अधिक सीटों पर हिंदी भाषा बोलने वाले जीत-हार में बड़ी भूमिका निभाते हैं। बंगाल में बिहार, यूपी, झारखंड आदि हिंदी भाषी राज्यों से आकर बसे लोगों की संख्या ज्यादा है। भाजपा ने इन सीटों को जीतने के लिए बिहार के 150 नेताओं को आगे किया है।

दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने इन इलाकों में बिहार के नेताओं को अपनी पार्टी से सांसद बनाकर बिहारी अस्मिता का कार्ड चल दिया है। बंगाल में विधानसभा चुनाव की लड़ाई है, लेकिन मुकाबाल बिहार बनाम बिहार का हो गया है। भाजपा और टीएमसी बिहार के लोगों और हिंदी भाषियों को लुभाने की तमाम कोशिशें कर रही हैं।

भाजपा ने हिंदी भाषियों का वोट पाने को क्या किया?

भाजपा ने कोलकाता, आसनसोल, वर्धमान आदि हिंदी भाषी क्षेत्रों में चुनाव प्रचार के लिए बिहार के विधायक, मंत्री समेत 150 नेताओं को तैनात किया है। इनके साथ चुनाव अभियान की कमान बिहार सरकार के मंत्री मंगल पांडेय संभाल रहे। उनके साथ 12 विधायक, 12 से अधिक प्रदेश संगठन के नेता और युवा मोर्चा के 50 पदाधिकारी और मंडल अध्यक्ष हैं। ये हिंदी भाषी लोगों को पार्टी से जोड़ रहे हैं। चुनाव प्रचार में प्रमुख चेहरे- नितिन नवीन और मंगल पांडेय हैं।


नितिन नवीन

नितिन नवीन कायस्थ हैं। बंगाल में कायस्थ जाति 3% से ज्यादा हैं। इस जाति के लोग हार-जीत में अहम भूमिका निभाते हैं। पश्चिम बंगाल में 37 साल कायस्थ मुख्यमंत्री (कांग्रेस से विधानचंद्र राय 14 साल और सीपीएम से ज्योति बसु 23 साल) रह चुके हैं।

मंगल पांडेय

मंगल पांडेय भाजपा के बंगाल प्रभारी हैं। ये ब्राह्मण जाति से हैं। इनकी कोशिश बंगाल के सवर्ण वोट बैंक को भाजपा की ओर लाने के साथ हिंदी भाषी लोगों को भाजपा का वोटर बनाने की है।

ममता बनर्जी कैसे देंगी भाजपा को जवाब?

विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से हिंदी भाषी लोगों को लुभाने की कोशिश की जानी थी। इसमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो बिहार से आए हैं। इसे देखते हुए ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने बिहारी नेता शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद को आगे बढ़ाया है। टिकट दिए। दोनों टीएमसी से सांसद हैं। अब इन पर बिहारियों के वोट टीएमसी की तरफ लाने की जिम्मेदारी है।

शत्रुघ्न सिन्हा

ये कायस्थ जाति से हैं। पश्चिम वर्धमान के आसनसोल से सांसद हैं। यह इलाका झारखंड की सीमा से सटा है। यहां की 50% आबादी हिंदी भाषी है। ये लोग मूल रूप से बिहार-झारखंड के हैं। आसनसोल लोकसभा में 7 विधानसभा सीटें पांडबेश्वर, रानीगंज, जमुरिया, आसनसोल दक्षिण, आसनसोल उत्तर, कुल्टी, बाराबनी हैं। आसनसोल, कोलकाता के बाद दूसरा सबसे बड़ा व घनी आबादी वाला इलाका है। यह कोयला खदानों, रेलवे जंक्शन और लोहा-इस्पात केंद्रित उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

कीर्ति आजाद

ब्राह्मण जाति से आने वाले कीर्ति आजाद वर्धमान-दुर्गापुर से सांसद हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में 7 विधानसभा क्षेत्र-दुर्गापुर पश्चिम, दुर्गापुर पूर्वी, गलसी, वर्धमान उत्तर, वर्धमान दक्षिण, मंतेश्वर भातार और मानगोविंद हैं। कीर्ति आजाद दरभंगा से बीजेपी के सांसद रहे हैं। वे कांग्रेस में भी रह चुके हैं।

बंगाल में रहते हैं 12 लाख बिहारी

साल 2011 की जनगणना के अनुसार बंगाल में 63 लाख से अधिक लोग हिंदी बोलते हैं। यहां 12 लाख लोग बिहार से हैं। कोलकाता में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी हैं। इसके अलावा हावड़ा, हुगली एवं उत्तर 24 परगना में भी इनकी आबादी अच्छी है। बिहार के लोग यहां के जूट मिल व दूसरी कारखाने में काम करने आए और बस गए। उत्तर बंगाल में बिहार के किशनगंज, कटिहार, अररिया जिले के काफी लोग व्यापार करते हैं। उत्तर बंगाल, दक्षिण बंगाल व पश्चिम बंगाल में बंगाल को बांट कर देखें तो उत्तर बंगाल में सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कूच बिहार, मालदा हैं। दक्षिण में आसनसोल, दुर्गापुर, रानीपुर जैसे कोयलांचल है, जो धनबाद के पास है। पश्चिम में मेदनीपुर, खड़गपुर, कोलकाता व उत्तर 24 परगना के इलाके हैं। इनमें हिंदी भाषी जीत और हार में अहम भूमिका निभाते हैं।

20 सीटों पर किंगमेकर हिंदी भाषी

बंगाल में हिन्दुस्तानी (मतलब बाहरी) 35 से 40 सीटों पर हार-जीत तय करने की भूमिका में हैं। इनमें से 15-20 सीटों पर किंगमेकर हैं। हिंदी भाषियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में औद्योगिक और बॉर्डर के पास के इलाके हैं। इनमें आसनसोल, दुर्गापुर के रानीगंज, कुल्टी और बर्नपुर के इलाके हैं। कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों में गार्डनरीच, ममोटियाब्रुज, बेहाला, मानिकतल्ला हैं। उत्तर 24 परगना में बरानगर, दमदम, बैरकपुर के इलाके हैं। हावड़ा-गुगली इंडस्ट्रियल इलाकों में हावड़ा के अलावा कई विधानसभा सीट पर हिंदुस्तानियों का प्रभाव है।

बिहारियों को मौका दे रही भाजपा

वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क बताते हैं कि ममता बनर्जी बिहारियों को प्रमोट करें तो बाजी मार सकती हैं। मगर, उनको बंगाली और मुसलमानों को भी खुश रखना है। दूसरी तरफ इस बार बीजेपी बिहारियों को खासा मौका दे रही। इसका लाभ भाजपा को मिल सकता है। पत्रकार ओम प्रकाश अश्क के अनुसार हिंदी भाषी का बड़ा वर्ग लोभ व भय से सत्ता से चिपका रहता है। मगर, हिंदी भाषियों की बड़ी आबादी सत्ता विरोधी रही है। हिंदी भाषियों या बिहारियों को अब भी वहां घर बनाने, फ्लैट खरीदने, सीमेंट, बालू खरीदने तक में तोलाबाजी यानी रंगदारी देनी होती है। लेफ्ट की सरकार थी, तब दूध भी लेफ्ट के लोगों से लेने का दबाव हिंदी भाषियों पर रहता था। अब टीएमसी के ग्रामीण सिपाहियों का काफी दबाव हिंदी भाषियों पर रहता है।

ये बिहारी नेता बंगाल में लड़ रहे चुनाव

शत्रुघ्न सिंहा, कीर्ति आजाद समेत बिहार के कई और नेता बंगाल की राजनीति में धाक रखते हैं।

संतोष पाठक : मूलरूप से बक्सर के रहने वाले संतोष पाठक पहले कांग्रेस में थे। अब बीजेपी में हैं। वह चुनाव लड़ेंगे।

अर्जुन सिंह : उत्तर 24 परगना में बेहद सक्रिय अर्जुन सिंह आरा के निवासी हैं। बंगाल के बैरखपुर क्षेत्र में सक्रिय हैं। इनकी राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत कांग्रेस से हुई है। फिर टीएमसी में आए। 2014 से बीजेपी में हैं। एक बार सांसद चुने गए। इस बार विधानसभा चुनाव बीजेपी से लड़ने की तैयारी में हैं।

राजेश सिंह : सारण के रहने वाले गोपाल सिंह उत्तर 24 परगना से कांग्रेस विधायक चुने जाते थे। उनके निधन के बाद उनके बेटे राजेश सिंह टीएमसी से राजनीति कर रहे हैं। कोलकाता से काउंसलर हैं।

संतोष पाठक : कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए हैं। उन्हें पार्टी टिकट दे सकती है।

रितेश तिवारी : भाजपा नेता हैं। टिकट की कोशिश में जुटे हुए हैं।

अर्जुन सिंह : भाजपा नेता है। टिकट पाने की कोशिश कर रहे हैं।

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