Mahakal Bhasma Aarti Live : उज्जैन से महाकाल लाइव : भस्म, डमरू और दिव्य श्रृंगार, आज भोलेनाथ की भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब
Mahakal Bhasma Aarti Live : शीत लहर के बीच आस्था का सैलाब आज 6 जनवरी की सुबह जब पूरा उज्जैन कड़ाके की ठंड और कोहरे की चादर में लिपटा था, तब बाबा महाकाल के दरबार में आस्था की गरमाहट से सराबोर था
Mahakal Bhasma Aarti Live : उज्जैन से महाकाल लाइव : भस्म, डमरू और दिव्य श्रृंगार, आज भोलेनाथ की भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब
Mahakal Bhasma Aarti Live Today 6 Jan 2026 : उज्जैन : शीत लहर के बीच आस्था का सैलाब आज 6 जनवरी की सुबह जब पूरा उज्जैन कड़ाके की ठंड और कोहरे की चादर में लिपटा था, तब बाबा महाकाल के दरबार में आस्था की गरमाहट से सराबोर था तड़के 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही जय श्री महाकाल के उद्घोष से अवंतिका नगरी गूँज उठी। साल 2026 के पहले सप्ताह में भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है; आज भी हजारों की संख्या में भक्तों ने नंदी हॉल और कार्तिकेय मंडपम से बाबा के इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन किए।
Mahakal Bhasma Aarti Live Today 6 Jan 2026 : पंचामृत अभिषेक और अनूठा श्रृंगार भस्म आरती से पूर्व, भगवान महाकाल को जल से स्नान कराकर उनका पंचामृत अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के इस अभिषेक के बाद बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया। आज के श्रृंगार की विशेषता उनका सौम्य स्वरूप रहा, जिसमें भांग, चंदन और सूखे मेवों का अद्भुत संयोजन दिखा। बाबा के मस्तक पर त्रिपुंड और चंद्रमा की आकृति भक्तगणों को मंत्रमुग्ध कर रही थी।
महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पण
आरती का सबसे मुख्य पड़ाव तब आया जब महानिर्वाणी अखाड़े के साधुओं द्वारा बाबा को ताजी भस्म अर्पित की गई। कपाल भाति और डमरू की थाप के बीच, जैसे ही भस्म की परत बाबा के ज्योतिर्लिंग पर चढ़ी, पूरा परिसर भक्ति के अपार सागर में गया। भस्म अर्पण की यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक शुद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन की नश्वरता और शिव के अविनाशी होने का संदेश भी देती है।
झांझ-मंजीरों के साथ दिव्य महाआरती
भस्म अर्पण के पश्चात जब मुख्य आरती शुरू हुई, तो झांझ, मंजीरों और शंख की ध्वनि ने वातावरण को जीवंत कर दिया। मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा कपूर और घी के दीपों से बाबा की आरती उतारी गई। आज की आरती में विशेष रूप से देश में सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई। आरती के अंत में भक्तों को बाबा के दिव्य दर्शनों का लाभ मिला, जिसे पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
भस्म आरती के पश्चात होने वाली आरती और पूजन परंपराएँ
नित्य सेवा और नैवेद्य आरती का विधान : भस्म आरती के संपन्न होने के पश्चात बाबा महाकाल की दिनचर्या में नैवेद्य आरती का विशेष महत्व है। इस समय भगवान को ताजे फलों और विशेष पकवानों का भोग लगाया जाता है। पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ बाबा का पुनः अभिषेक किया जाता है और शुद्ध वस्त्र धारण कराए जाते हैं। यह आरती इस बात का प्रतीक है कि महादेव अब अपने जागृत स्वरूप में भक्तों को दर्शन देने के लिए तैयार हैं। शांत वातावरण में होने वाली यह आरती भक्तों के मन को असीम शांति प्रदान करती है।
दशमुख और शंखध्वनि के साथ भोग आरती
दोपहर के समय बाबा महाकाल की भोग आरती की जाती है। इस दौरान मंदिर परिसर में विशेष भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें दाल-चावल, सब्जी और मिष्ठान शामिल होते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जहाँ राजाधिराज को एक राजा की भाँति उत्तम भोजन का नैवेद्य लगाया जाता है। इस आरती की गूँज और शंखों की ध्वनि पूरे मंदिर प्रांगण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु मंदिर में डेरा डाले रहते हैं।
संध्या काल का राजसी श्रृंगार और आरती
सूर्यास्त के समय होने वाली संध्या आरती का दृश्य सबसे अद्भुत होता है। इस समय बाबा महाकाल का राजसी श्रृंगार किया जाता है, जिसमें उन्हें हीरे-जवाहरात और स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है। संध्या आरती के दौरान हजारों दीपों की लौ से गर्भगृह जगमगा उठता है। डमरू और नगाड़ों की थाप पर होने वाली यह आरती भक्तों को एक अलग ही लोक में ले जाती है। यह वह समय होता है जब उज्जैन की हवा में सिर्फ शिव का नाम और कपूर की महक घुली होती है।
शयन आरती
दिन भर की पूजा-अर्चना के बाद रात को अंत में शयन आरती आयोजित की जाती है। यह बाबा महाकाल की दिन की अंतिम आरती होती है, जिसके बाद महादेव विश्राम करते हैं। इस आरती में अत्यंत कोमल स्वरों में भक्ति गान किया जाता है और बाबा को सुखद निद्रा के लिए प्रार्थना की जाती है। शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि प्रकृति का हर कण शिव में ही समाहित है और अंततः उन्हीं में विश्राम पाता है।