Mahakal Bhasma Aarti Live : उज्जैन से लाइव : बाबा भोलेनाथ की अलौकिक भस्म आरती, महाकाल दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, आप भी घर बैठे करें दर्शन

Mahakal Bhasma Aarti Live : द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख भगवान श्री महाकालेश्वर के दरबार में तड़के होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।

Update: 2026-01-05 01:21 GMT

Mahakal Bhasma Aarti Live : उज्जैन से लाइव : बाबा भोलेनाथ की अलौकिक भस्म आरती, महाकाल दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, आप भी घर बैठे करें दर्शन

Mahakal Bhasma Aarti Live Today 5 Jan 2026 : उज्जैन। नए साल 2026 के पहले सोमवार यानी आज 5 जनवरी को धर्मनगरी उज्जैन में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख भगवान श्री महाकालेश्वर के दरबार में तड़के होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों का उत्साह चरम पर था और पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान रहा।

Mahakal Bhasma Aarti Live Today 5 Jan 2026 : आरती की प्रक्रिया परंपरा के अनुसार तड़के 3:00 बजे पट खुलने के साथ शुरू हुई। सबसे पहले भगवान का जलाभिषेक किया गया, जिसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और शहद के पंचामृत से महादेव का अभिषेक हुआ। आज सोमवार का विशेष दिन होने के कारण बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें उन्हें भांग, चंदन और सूखे मेवों से सजाकर राजा के रूप में तैयार किया गया। इस दौरान पंडे-पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच भगवान को रजत मुकुट और आभूषण धारण कराए गए।

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भस्म आरती का सबसे मुख्य आकर्षण कपूर आरती के बाद होने वाला भस्मीकरण रहा। महानिर्वाणी अखाड़े के साधुओं द्वारा बाबा महाकाल को ताजी भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म आरती के दर्शन मात्र से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर के नंदी हॉल और कार्तिकेय मंडपम में बैठे श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक दृश्य को अपनी आंखों में बसाया। आरती के दौरान झांझ, मंझीरे और ढोल की थाप ने वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना दिया।

आज की भस्म आरती में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के कड़े इंतजाम देखे गए। 2026 की शुरुआत के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने चलायमान भस्म आरती (Moving Darshan) की व्यवस्था भी सुचारू रखी, ताकि अधिक से अधिक लोग दर्शन कर सकें। आरती संपन्न होने के बाद बाबा महाकाल की भव्य सवारी और दिनभर चलने वाले अभिषेक पूजन का सिलसिला शुरू हुआ।


भस्म आरती के बाद दिनभर गूँजते हैं जयकारे, जानिए पंचामृत अभिषेक से शयन आरती तक का पूरा क्रम

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में केवल भस्म आरती ही नहीं, बल्कि सूर्योदय से लेकर देर रात तक भगवान शिव की सेवा का एक अद्भुत चक्र चलता है। आज 5 जनवरी 2026 को भी भस्म आरती संपन्न होने के बाद मंदिर में अन्य प्रमुख आरतियों और पूजन का सिलसिला जारी है, जो श्रद्धालुओं को शिव भक्ति के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन कराता है।

नैवेद्य आरती : भगवान को भोग अर्पण

भस्म आरती के कुछ घंटों बाद सुबह लगभग 7:30 से 8:15 बजे के बीच नैवेद्य आरती की जाती है। इस दौरान बाबा महाकाल को विशेष रूप से शुद्ध सात्विक भोजन का भोग लगाया जाता है। पंडे-पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ भगवान का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि इस आरती में शामिल होने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

भोग आरती : राजसी ठाठ-बाट के दर्शन

दोपहर में लगभग 10:30 बजे भोग आरती का आयोजन होता है। यह आरती बाबा महाकाल के राजसी स्वरूप को समर्पित है। इसमें भगवान को भव्य रूप से सजाया जाता है और दोपहर का मुख्य नैवेद्य अर्पित किया जाता है। मंदिर परिसर में इस समय भक्तों की भारी भीड़ रहती है, क्योंकि यह समय आम दर्शनार्थियों के लिए बहुत सुलभ होता है। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच होने वाली यह आरती मन को शांति प्रदान करती है।

संध्या आरती : संध्या काल की दिव्यता

सूर्यास्त के समय होने वाली संध्या आरती का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है। शाम करीब 6:30 से 7:00 बजे (ऋतु अनुसार समय परिवर्तन संभव) होने वाली इस आरती में पूरा मंदिर दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है। संध्या आरती में भगवान का भांग और सूखे मेवों से विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस समय बाबा महाकाल के मुखारविंद के दर्शन करना एक दिव्य अनुभव होता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से शिव भक्त उज्जैन पहुँचते हैं।

शयन आरती : महादेव की विश्राम बेला

दिन का अंतिम आयोजन शयन आरती होती है, जो रात लगभग 10:30 से 11:00 बजे के बीच संपन्न होती है। यह आरती भगवान के विश्राम का प्रतीक है। शयन आरती के दौरान वातावरण बहुत शांत और भक्तिमय होता है। पुजारी भगवान को शयन के लिए तैयार करते हैं और अंत में पट बंद कर दिए जाते हैं। मान्यता है कि जो भक्त दिन की अंतिम आरती में शामिल होते हैं, उन्हें महादेव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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