जशपुर की जैव विविधता को संरक्षित करने उठी आवाज...3 तरह की जलवायु वाला देश का पहला जिला

170 प्रकार की हिमालयीन प्रजाति की तितलियां, मेडिसिनल प्लांट भी, जैव विविधता रिसर्च स्टेशन स्थापित करने हुई मांग

Update: 2022-05-24 14:24 GMT

जशपुर, 24 मई 2022। अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस क़े अवसर पर जशपुर कि जैव विविधताओं कों संरक्षित करने करने के लिए एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें शिरकत करने वाले विषय विशेषज्ञों ने बताया कि जशपुर की जैव विविधता किस मायने में अलग है। बायोडायवर्सिटी अनोखा है। ऊपरी भाग हिमालय क़े जलवायु जैसा हैं। जशपुर अनेक प्रकार मेडिसिनल प्लांट क़े लिए उपयुक्त है। यहाँ हिमालयन क्षेत्र की तितली की प्रजाति भी मिलती है...170 प्रकार की।

जैव विविधता को बचाने जशपुर नगर में  आयोजित परिचर्चा में संसदीय सचिव यूडी मिंज ने कहा कि जशपुर जैव विविधता का भंडार है। ऐसा भंडार, जो देश क़े किसी अन्य जिले में नहीं है। यहाँ तीन प्रकार की जलवायु है। जिले में शून्य डिग्री से लेकर 45 डिग्री तापमान रहता है। कई प्रकार क़े वाटरफाल है, फल हैं वनस्पति है, औषधीय पौधे है। जैवविविधता से परिपूर्ण और खूबसूरत जशपुर की विशेषताओं को संरक्षित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जशपुर जिले के समृद्ध अनोखी जैव विविधता को लेकर एक जैव विविधता रिसर्च स्टेशन स्थापित करना चाहिए। इससे पूरे देश को लाभ पहुंचेगा और निश्चित ही यह अपने आप में जशपुर एकलौता जिला होगा। यही कारण है कि हम इस दिशा में विशेष प्रयत्न कर इसे संरक्षित करना चाहते है इसमें सभी सहभागिता हो तो निश्चित ही इसमें सफल होंगे।

विधायक विनय भगत ने कहा कि जशपुर जिला बहुत ही सुन्दर और आकर्षक है यहाँ की जैव विविधताओं का संरक्षण करना है उन्होंने कहा कि जशपुर क़े जलवायु परिवर्तन चिंतनीय है। इस दिशा में हर नागरिक को सोंचना चाहिए।

कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने कहा कि किसी भी प्रकार से हमें अपने परिवेश क़े विविधताओं का संरक्षण करना है। इसमें सबसे अधिक भागीदारी बच्चों की होनी चाहिए, हमें आगे बढ़कर नदी तालाब जंगल पहाड़ सभी का संरक्षण करना है लोगों को प्रेरित भी करना है। मिट्टी से लेकर आसमान तक संरक्षित करना है इस दिशा में कोशिश करना है, हमें पौधे लगाना है पेड़ो को बचाना है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक पर्यावरण को खतरा प्लास्टिक से हो रहा है सभी को कोशिश करनी चाहिए कि वे प्लास्टिक का उपयोग न करें।

डी एफ ओ जितेंद्र उपाध्याय ने कहा कि इस ब्रम्हाण्ड में रहने वाले जीव जंतु हमारे सहचर है सभी सजीवों में बुद्धिमान मनुष्य है इसलिए सबसे अधिक जिम्मेदारी भी मनुष्य की है हम सबकी है इसी से जैव विविधता का संरक्षण होगा।

रायपुर से आये विशेषज्ञ एसोसियेट प्रोफेसर अमिय इक्का ने एथनो मेडिसिनल प्लांट क़े बारे बताया कि जशपुर तीन भाग में विभक्त है जिसमें अलग अलग प्रजाति क़े प्लांट होंगे यहाँ का बायोडायवरसिटी अनोखा है। ऊपरी भाग हिमालय क़े जलवायु जैसा हैं। यहाँ अनेक प्रकार मेडिसिन प्लांट क़े लिए उपयुक्त हैं और अनेक ऐसे प्लांट हैं

वाइल्ड लाइफ जशपुर क़े सौरभ सिँह ने यहाँ पाए जाने वाले बर्ड्स और बटरफ्लाई क़े अनुकूलन क़े बारे में बताया कि यहाँ किस किस क्षेत्र में किस किस प्रजाति की तितलियाँ पाई जाती है यहाँ हिमालयन क्षेत्र की तितली की प्रजाति भी मिलती है यहाँ मिलने वाले पक्षियों क़े बारे में भी विस्तार से बताया.

रायपुर से आये विशेषज्ञ गौरव निहलानी ने कहा कि तितलियों क़े अनुकूलन क़े आधार पर यहाँ 170 प्रकार क़े तितलियाँ पायी जाती है उन्होंने बताया कि 2019 में तीन नई प्रजाति की तितलियाँ पाई गईं जो कि हिमालय क़े रेंज में भी पाई जाती है. उन्होंने तितलिओ क़े जीवन चक्र, व्यवहार, भोजन, अनुकूलन क़े बारे में बताया.

मिनरल रिसोर्स ऑफ़ छत्तीसगढ़ क़े सत्यनारायण ने बताया कि छत्तीसगढ़ में वृहत पैमाने पर पर खनिज है लेकिन जशपुर में उस मात्रा में खनिज पदार्थ नहीं हैं इसलिए यहाँ इस ओर ध्यान न देकर केरल की तरह बायोडायवर्सिटी रिसर्च केंद्र और पार्क विकसित कर जैव विविधता का संरक्षण किया जाना चाहिए.

डॉ रेने कुजूर ने जशपुर स्पाइडर प्रजाति क़े बारे में बताया उन्होंने बताया कि किस किस प्रकार क़े जीव जंतु क़े लिए जशपुर अनुकूलित है.

फ्रूट साइंस क़े जोनसेन लकड़ा ने जशपुर जिले में बगीचा पंडरापाठ,सन्ना, जशपुर, कुनकुरी, फरसाबाहर, पत्थलगांव क्षेत्र में होने वाले फलों और अनुकूलता क़े बारे में बताया उन्होंने कहा कि जशपुर की समृद्धि जैव विविधता और जलवायु में सभी प्रकार की उद्यानिकी फसलों का उत्पादन किया जा सकता हैं चाहे वह गर्म क्षेत्र हो या ठंडा क्षेत्र हो.

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