Bilaspur High Court News: दो परिवहन उप निरीक्षकों की बर्खास्तगी आदेश को हाई कोर्ट ने ठहराया सही, कहा...

Bilaspur High Court News: भर्ती नियमों में दिए गए मापदंडों को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

Update: 2026-01-31 08:03 GMT

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बिलासपुर: 31 जनवरी 2026 भर्ती नियमों में दिए गए मापदंडों को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच ने कहा,भर्ती के लिए विज्ञापन में दिए गए मापदंडों व शर्तों को पूरा करना जरुरी है। कोर्ट ने कहा, अपात्रता कभी भी वैधता नहीं बन सकती। इस टिप्पणी के साथ दो परिवहन उप निरीक्षकों की बर्खास्तगी आदेश को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।

हाई कोर्ट ने परिवहन विभाग में उपनिरीक्षक, तकनीकी के पद पर हुई नियुक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार विज्ञापन में निर्धारित अनिवार्य शारीरिक मापदंडों को पूरा नहीं करता है, तो उसकी नियुक्ति को वैध नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी के साथ सिंगल बेंच ने दो परिवहन उपनिरीक्षकों की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं को राज्य शासन ने तय मापदंड के अनुसार लंबाई कम होने के कारण बर्खास्त कर दिया था।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने 13 अप्रैल 2022 को सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी और परिवहन

उपनिरीक्षक (तकनीकी) के पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। देव आशीष प्रधान और ऐश्वर्य नेताम का चयन परिवहन उपनिरीक्षक के पद पर हुआ। 8 सितंबर 2022 को दोनों को नियुक्ति दे दी थी। नियुक्ति को चुनौती देते हुए वेटिंग लिस्ट में शामिल एक अभ्यर्थी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में खुलासा किया कि परिवहन उप निरीक्षक के पद पर चयनित दोनों उम्मीदवारों की ऊंचाई निर्धारित मापदंड से 165 सेमी से कम है। याचिकाकर्ता की आपत्ति और किए गए खुलासे को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने विभाग को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया था। रिकॉर्ड से अवलोकन से साफ हुआ कि दोनों उप निरीक्षकों की लंबाई निर्धारित न्यूनतम मापदंड से कम पाई गई। परिवहन विभाग ने 19 जून 2024 को दोनों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया। परिवहन विभाग के बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देते हुए दोनों परिवहन उप निरीक्षक ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने तर्क दिया,याचिकाकर्ता अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2001 में जारी एक सर्कुलर के अनुसार मुख्यमंत्री को ऊंचाई में छूट देने का अधिकार है। एक साल से अधिक समय तक नौकरी करने का हवाला देते हुए बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त करने की मांग की थी।

हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पाया कि छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग अधीनस्थ श्रेणी-III (कार्यकारी) सेवा भर्ती नियम, 2008 के अनुसार पुरुष उम्मीदवार की ऊंचाई 165 सेमी से कम नहीं होनी चाहिए। एआरटीओ पद के लिए एसटी वर्ग को 158 सेमी ऊंचाई की छूट थी, लेकिन परिवहन उपनिरीक्षक पद के लिए ऐसी कोई छूट नहीं दी गई थी।

हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जो नियुक्ति अपने मूल में ही गलत है, उसे केवल लंबे समय तक काम करने के आधार पर सुरक्षित नहीं किया जा सकता। बिना किसी पूर्व सूचना या मापदंडों में छूट देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

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