Bharat Mala Project Scam: क्या है भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला, 34 करोड़ रुपए के मुआवजा घोटाले की परत-दर-परत NPG.NEWS ने किया था पर्दाफाश
Bharat Mala Project Scam: रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच निर्माणाधीन भारतमाला प्रोजेक्ट में 34 करोड़ रुपए के मुआवजा घोटाले की परत-दर-परत पर्दाफाश NPG.NEWS ने किया था। एनपीजी की खबर के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने EOW को घोटाले की जांच का जिम्मा सौंपा है। केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना में से एक इस प्रोजेक्ट में सरकारी खजाने को पहुंचाए गए नुकसान की जांच और घोटालेबाजों तक पहुंचने के लिए अब इस मामले में ईडी घोटालेबाजों के बीच कड़ी कार्रवाई कर रही है।
सोर्स- इंटरनेट, एडिट- npg.news
Bharat Mala Project Ghotala: रायपुर। रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच निर्माणाधीन भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत भूअधिग्रहण और भूअर्जन की कार्रवाई में राजस्व अफसरों और दलालों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को 32 करोड़ का चूना लगाया गया है। भूअर्जन और अधिग्रहण के लिए बैक डेट में फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूमि को टुकड़ों में बांट दिया गया। टुकड़ों में बटांकन के बाद नामांतरण करवाया गया तथा इन फर्जी दाखिलों के आधार पर अधिक मुआवजा प्राप्त किया गया। जिससे शासन को लगभग 28 करोड़ का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ।
अनुचित तरीके से मुआवजा भुगतान कर शासन को दो करोड़ रुपये का नुकसान अलग से पहुंचाया गया। तीसरे मामले में उमा तिवारी के माध्यम से फर्जी दस्तावेजों द्वारा नामांतरण कर मुआवजा लिया गया। जिससे दो करोड़ का नुकसान हुआ। इन तीनों प्रकरणों से जुड़े साक्ष्यों से खुलासा हुआ कि तकरीबन 32 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान सरकारी खजाने को हुआ है।
प्रवर्तन निदेशालय ED ने 29 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर और महासमुंद में स्थित 10 परिसरों में हरमीत सिंह खानुजा और अन्य के आवासीय और आधिकारिक परिसरों में PMLA, 2002 के तहत छापामार कार्रवाई की थी। भारत माला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम राजमार्ग परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान नियमों के विपरीत जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर भूअर्जन की प्रक्रिया को अंजाम दिया था।
ईडी ने प्रापर्टी डीलर और राजस्व अफसरों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कुछ जगहों पर अफसर व कर्मचारी नहीं मिले। घर में ताला जड़कर निकल गए थे। जिन अधिकारी व राजस्व विभाग के कर्मचारियों के घर पर ताला जड़ा मिला, दीवार पर नोटिस चस्पा कर ईडी के अफसर निकल गए। जो मिले उनके घरों में दस्तावेजों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच चलती रही।
ईडी की टीम प्रॉपर्टी डीलर हरमीत सिंह खनूजा के नवा रायपुर स्थित घर के अलावा महासमुंद में उनके ससुराल हरमीत चावला और जसबीर सिंह बग्गा के घर भी अफसरों ने दबिश दी। बता दें कि ACB व EOW ने तत्कालीन एसडीओ (राजस्व), अभनपुर, रायपुर निर्भय साहू और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि रायपुर-विशाखापत्तनम राजमार्ग परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के आधिकारिक अभिलेखों में हेराफेरी करके आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिली भगत कर अवैध मुआवजा प्राप्त किया।
ईडी की जांच में पता चला कि आरोपियों ने कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ आपराधिक साजिश रचकर, भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि के लिए धोखाधड़ी से अतिरिक्त मुआवजा प्राप्त किया। उन्होंने बैक डेट में जानबूझकर परिवार के सदस्यों के बीच बड़े भू-भागों का छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया। भूमि अधिग्रहण से पहले कई छोटे-छोटे भूखंडों को दिखाने के लिए भूमि का यह कृत्रिम विभाजन किया गया था, जिससे मुआवजे की व्यवस्था का दुरुपयोग करके अधिक मुआवजा प्राप्त किया जा सके।
राजस्व अभिलेखों में हेरफेर करके इन टुकड़ों को अधिग्रहण प्रक्रिया से पहले का दिखाया गया, जिसके परिणामस्वरूप बढ़ा हुआ अवैध मुआवजा स्वीकृत और वितरित किया गया।
NPG.NEWS ने किया था घोटाले का पर्दाफाश
रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच निर्माणाधीन भारतमाला प्रोजेक्ट में 34 करोड़ रुपए के मुआवजा घोटाले की परत-दर-परत पर्दाफाश NPG.NEWS ने किया था। एनपीजी की खबर के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने BOW को घोटाले की जांच का जिम्मा सौंपा है। केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना में से एक इस प्रोजेक्ट में सरकारी खजाने को पहुंचाए गए नुकसान की जांच और घोटालेबाजों तक पहुंचने के लिए अब इस मामले में ईडी की इंट्री हो गई है।
ED की इंट्री के क्या मायने हैं
जाहिरतौर पर शराब घोटाले की तर्ज पर अब घोटालेबाजों तक पहुंचने ईडी अपने स्तर पर र कार्रवाई शुरू कर दी है। छापेमारी के बाद से यह तय हो गया था कि ईडी पहले दस्तावेज जुटाएगी और उसके बाद अपना शिकंजा कसना शुरू करेगी। कमोबेश इसी अंदाज में ईडी ने फर्जीवाड़ा करने वालों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
ये रहे ईडी के राडार पर
तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू, आरआई रोशन लाल वर्मा, तहसीलदार शशिकांत कुरें, नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण, पटवारी जितेंद्र साह, बसंती घृतलहरे, दिनेश पटेल और लेखराम देवांगन के घरों में दबिश देकर दस्तावेजों की पड़ताल की व जब्ती भी बनाई। छापेमारी के दौरान रोशन लाल वर्मा सहित आधा दर्जन अधिकारियों ने अपने घरों में ताला जड़ दिया था।
EOW की जांच, ED की पैनी नजर
तत्कालीन पटवारी गोपाल राम वर्मा, पीएचई अधिकारी नरेंद्र नायक, गृहिणी उमा तिवारी, पति केदार तिवारी, कारोबारी विजय जैन, खेमराज कोसले, पुनुराम देशलहरे, भोजराम साहू और अभनपुर नगर पंचायत अध्यक्ष कुंदन बघेल। ये ऐसे लोगों हैं जिनको घोटाले में संलिप्तता के आरोप में ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया था। इन लोगों को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। अभी सभी लोग जमानत पर हैं। ईडी ने अब इनकी भूमिका पर अपनी नजर रखना शुरू कर दिया है। घोटाले में संलिप्तता को लेकर ईडी ने अब इनकी भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
बैकडेट में फर्जी बंटवारा व नामांतरण के बनाए दस्तावेज
प्रापर्टी डीलर हरमीत खनूजा की पत्नी तहसीलदार है। हरमीत ने कारोबारी विजय जैन, खेमराज कोसले और केदार तिवारी के साथ मिलकर बैकडेट में किसानों से फर्जी बंटवारा, नामांतरण के दस्तावेज तैयार कराया। ब्लैंक चेक और आरटीजीएस फॉर्म पर हस्ताक्षर भी करा लिया। आईसीआईसीआई बैंक, महासमुंद में अकांउट खुलवाया। इसी बैंक अकाउंट में मुआवजे की राशि जमा कराई। इसके बाद अलग-अलग खातों में राशि ट्रांसफर किया गया।
ये है ईओडब्ल्यू का पहला आरोपपत्र
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने लगभग 7,500 पृष्ठों का यह आरोपपत्र राजधानी रायपुर की एक विशेष अदालत में दाखिल किया था। इसमें दो लोक सेवक गोपाल राम वर्मा और नरेंद्र कुमार नायक के अलावा उमा तिवारी, उनके पति केदार तिवारी, हरमीत सिंह खनूजा, विजय कुमार जैन, खेमराज कोशले, पुनूराम देशलहरे, भोजराम साहू और कुंदन बघेल को आरोपी बनाया गया है।
आरोप पत्र में क्या है
राज्य की जांच एजेंसी ने तीन अलग-अलग खंडों में अपनी जांच का उल्लेख किया है। ईओडब्ल्यू ने रायपुर भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम सड़क के प्रभावित गांवों में से नायकबांधा, टोकरो और उरला गांव की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में पिछली तारीख से बटांकन और नामांतरण की अनियमितताओं की जांच की गई है। जिसमें राजस्व अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से फर्जी बंटवारा तथा नामांतरण कर अधिक मुआवजा प्राप्त किए जाने का प्रकरण शामिल है।'' दूसरे में नायकबांधा जलाशय से संबंधित पूर्व अधिग्रहित भूमि का पुनः मुआवजा भुगतान करने का मामला तथा तीसरे में उमा तिवारी के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भूमि का नामांतरण कर मुआवजा प्राप्त करने का मामला शामिल है।
ये हैं आरोपी
राजस्व अधिकारी निर्भय साहू (तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व, अभनपुर), दिनेश पटेल (पटवारी), रोशन लाल वर्मा (राजस्व निरीक्षक), शशिकांत कुर्रे (तत्कालीन तहसीलदार), जितेंद्र साहू (तत्कालीन पटवारी क्रमांक 49, नायकबांधा), बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी), लखेश्वर प्रसाद किरण (तत्कालीन नायब तहसीलदार, गोबरा नवापारा) और लेखराम देवांगन पटवारी।
तीन लोक सेवकों के खिलाफ पूरक चालान
भारतमाला परियोजना के तहत, EOW और ACB ने 29 अक्टूबर 2025 को 3 लोक सेवकों को भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला मामले में गिरफ्तार किया। 3 पटवारियों दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती धृतलहरे के खिलाफ 500 पेज का प्रथम पूरक चालान पेश किया।
तीन पटारियों ने शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया
दिनेश पटेल की भूमिका के बारे में, EOW और ACB ने जांच में पाया कि दिनेश पटेल, तत्कालीन पटवारी हल्का नं. 49 ग्राम नायकबांधा ने खाता दुरुस्ती/प्रपत्र-10/आपत्ति निराकरण आदि के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया। अवार्ड के समय अधिग्रहीत भूमि को फर्जी तरीके से टुकड़ों में बांटकर अधिक मुआवजा भुगतान की स्थिति बनाई। इससे शासन को 30 करोड़ 82 लाख 14 हजार 868 की शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
लेखराम देवांगन, तत्कालीन पटवारी ग्राम टोकरो, हल्का नं. 24 ने खाता दुरुस्ती/प्रपत्र-10/भुगतान प्रतिवेदन आदि के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया.। अवार्ड के समय "मूल खसरों" को छोटे टुकड़ों में दर्शाकर वास्तविक देय राशि की तुलना में अत्यधिक मुआवजा भुगतान कराया गया, जिससे शासन को 7 करोड़ 16 लाख 26 हजार 925 की शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई। बसंती घृतलहरे, तत्कालीन पटवारी ग्राम भेलवाडीह ने "मूल खसरों" को अवार्ड चरण में कृत्रिम उपखण्डों में विभाजित दर्शाकर अधिक मुआवजा भुगतान कराया, जिससे राज्य शासन को 1 करोड़ 67 लाख 47 हजार 464 रुपए की शासन को आर्थिक क्षति पहुंची।