Angakar Roti in Gol Chowk Raipur : रायपुर की जुबां से लेकर सोशल मीडिया की ट्रेंड तक... हर तरफ छाया डमरूधर भैया की "अंगाकर रोटी" देखें VIDEO

Angkar Roti in Gol Chowk Raipur : ये भैया जी आज के रायपुरवासियों की पहली पसंद पिज़्ज़ा-बर्गर, फ्रेंच फ्राई, चाउमीन, सैंडविच के बीच छत्तीसगढ़ के रीयल देशी स्वाद अंगाकर रोटी विथ पताल चटनी का तड़का लगा दिए हैं, जो इस वक्त सबकी जुबान में छाया हुआ है.

Update: 2026-01-07 10:34 GMT

Angakar Roti in Gol Chowk Raipur पिछले कुछ दिनों से इंस्टाग्राम से लेकर फेसबुक तक रायपुर में एक ऐसा फ़ूड जोन है जो काफी वायरल हो रहा है, जिसके हर कोई दीवाने हैं. हम बात कर रहे हैं महासमुंद निवासी डमरूधर भैया के अंगाकर रोटी की. ये भैया जी आज के रायपुरवासियों की पहली पसंद पिज़्ज़ा-बर्गर, फ्रेंच फ्राई, चाउमीन, सैंडविच के बीच छत्तीसगढ़ के रीयल देशी स्वाद अंगाकर रोटी विथ पताल चटनी का तड़का लगा दिए हैं, जो इस वक्त सबकी जुबान में छाया हुआ है.


और तो और रायपुर में इसका क्रेज इस कदर है की सोशल मीडिया भी इसके रील्स से भरे पड़े हैं. महासमुंद जिले के सरायपाली वाले डमरूधर नायक भैया रायपुर में डीडी नगर, मानसरोवर भवन के सामने अपना नाश्ता केंद्र चलाकर छत्तीसगढ़ की परंपरा और स्वाद को जीवंत कर रहे हैं। चार साल से ये सिलसिला चल रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह अब लोगों की पहली पसंद बन गया है।

क्या है इस रोटी की खासियत




डमरूधर भैया बताते हैं की सामान्यतः अंगाकर रोटी चावल आटा से बनाई जाती है. पर हम सेहत और स्वाद और यहाँ तक लोगों के इस व्यंजन को लेकर क्रेज को देखते हुए इसमें कुछ अलग तड़का लगाए हैं. हम इस अंगाकर रोटी को चावल, उड़द, गेहूं, ज्वार और बाजरा जैसे कई अनाजों को मिलाकर तैयार कर रहे हैं। इसे पारंपरिक तरीके से पत्ते से ढंककर नीचे से आग और ऊपर से गर्म कोयले की आंच में पकाया जाता है। यही खास प्रक्रिया इसे अलग स्वाद और भरपूर पौष्टिकता देती है। छत्तीसगढ़ी बोली में इसे पनपुरवा रोटी भी कहा जाता है।

और साथ में वो टमाटर-हरी मिर्च-धनिया की सिलबट्टे पर पीसी चटनी... जिसका स्वाद तो बड़े-बड़े फाइव स्टार होटल की सब्जियां भी नहीं ला पाती है. आज के ज़माने में जहाँ घर में मिक्सी से चटनी पीसी जाती हैं, वहीँ सिलबट्टे की चटनी का स्वाद ही कुछ और होता है. इसलिए भी छत्तीसगढ़ के साथ-साथ बाहर  राज्यों के लोग भी इसकी महक और स्वाद से पीछे-पीछे खींचे चले आते हैं. 


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डमरूधर भैया कहते हैं – “ये सिर्फ खाना नहीं, हमारी छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जिंदगी की छवि है। शहर में इसे फिर से लोकप्रिय बनाने के लिए ये पहल की है।” हर रोजाना 250 रोटियां बिक रही हैं! साथ में मिलेट की चीला रोटी भी मिलती है, लेकिन अंगाकर की डिमांड सबसे ज्यादा है. 





 

कीमत वाजिब की सब खाएं 

• पूरा तवा रोटी: 100 रुपये

• आधा तवा: 50 रुपये

• चौथाई: 25 रुपये



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