Mumbai Mayor Election: BJP की जीत के बाद भी मेयर पर सस्पेंस, शिंदे गुट ने रखी ‘ढाई साल’ की शर्त, बीजेपी की बढ़ीं मुश्किलें

Mumbai Mayor Election: BMC चुनाव में BJP-शिंदे गठबंधन को बहुमत मिल गया है, लेकिन मुंबई मेयर कौन होगा इस पर खींचतान तेज हो गई है। शिंदे गुट ने पहले ढाई साल मेयर पद की मांग की है।

Update: 2026-01-18 10:34 GMT

फोटो: सोशल मीडिया 

Mumbai Mayor Election: मुंबई महानगरपालिका के चुनाव नतीजे आ चुके हैं, जीत का जश्न भी हो चुका है, लेकिन कुर्सी का असली खेल अभी शुरू हुआ है। सवाल यह है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का मेयर आखिर कौन बनेगा? बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन ने 227 सीटों वाले सदन में साफ बहुमत हासिल कर लिया है लेकिन मेयर पद पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है।

नतीजों का गणित
इस चुनाव में बीजेपी को 89 सीटें मिली हैं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें हासिल हुई हैं। दिलचस्प बात यह है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) 65 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। मौजूदा मेयर किशोरी पेडनेकर भी शिवसेना UBT से हैं और उन्होंने यह चुनाव जीत लिया है।
अब गणित यह बनता है कि बीजेपी के पास सबसे ज्यादा सीटें तो हैं, लेकिन वह अकेले मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है। शिंदे गुट की मदद जरूरी है। वहीं उद्धव ठाकरे का दावा है कि उनका भी मेयर बन सकता है। ऐसे में मुंबई की सियासत में दिलचस्प मोड़ आने वाला है।
उद्धव का तीखा हमला
मेयर पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच शिवसेना UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है। मातोश्री में नवनिर्वाचित पार्षदों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी कागजों पर शिवसेना को खत्म करने का दावा कर सकती है, लेकिन जमीन पर ऐसा नहीं कर पाई।
उद्धव ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने विश्वासघात के जरिए चुनाव जीता है। उन्होंने कहा बीजेपी मुंबई को गिरवी रखना चाहती है। मराठी मानूस इस गुनाह को माफ नहीं करेगा। शिवसेना UBT का मेयर बनना हमारा सपना है और यह जरूर होगा।
उद्धव ने यह भी चेतावनी दी कि जो पार्षद एक बार दलबदल कर चुके हैं वे दोबारा भी ऐसा कर सकते हैं। उनका दावा था कि शिंदे गुट से चुने गए कई पार्षद पहले शिवसेना UBT में थे और बीजेपी मेयर पद हासिल करने के लिए तोड़फोड़ कर सकती है।
शिंदे गुट की रणनीति
उद्धव के बयानों के बीच शनिवार को शिंदे गुट की शिवसेना ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक लग्जरी होटल में ठहराया है। इससे राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई। पार्टी नेताओं ने इसे चुनाव के बाद रिफ्रेशमेंट और ओरिएंटेशन बताया है लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि यह पार्षदों को साधने की रणनीति है। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने पार्षदों का अभिनंदन किया। पार्षद अमेय घोलें के मुताबिक, शिंदे उन्हें मुंबई के विकास, घोषणापत्र के अमल और अगले पांच साल के रोडमैप पर मार्गदर्शन देंगे।
ढाई साल के मेयर पद की मांग
शिंदे गुट के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे सत्ता साझेदारी के तहत पहले ढाई साल का मेयर पद मांगेंगे। उनका तर्क है कि बीजेपी अकेले मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है, इसलिए पद साझा करना होगा। इसके साथ ही स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन समेत अहम समितियों में आनुपातिक हिस्सेदारी की भी मांग की गई है। यह मांग बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। अगर बीजेपी शिंदे गुट की मांग नहीं मानती तो गठबंधन में दरार की आशंका है। वहीं अगर मांग मान ली जाती है तो बीजेपी को पहले ढाई साल इंतजार करना होगा।
बीजेपी की दुविधा
माना जा रहा था कि मुंबई में इस बार बीजेपी का मेयर होगा क्योंकि उसके पास सबसे ज्यादा सीटें हैं। लेकिन शिंदे गुट की मांग और उद्धव के दावों ने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीजेपी को अब यह तय करना होगा कि क्या वह शिंदे गुट के साथ सत्ता साझा करने के लिए तैयार है या फिर कोई और रास्ता निकालना होगा।
फिलहाल मुंबई की सियासत में तीन खिलाड़ी मैदान में हैं। बीजेपी के पास संख्या बल है, शिंदे गुट के पास सहयोगी की ताकत और उद्धव के पास दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा। अगले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि मुंबई का मेयर कौन बनेगा और क्या सत्ता साझेदारी का फॉर्मूला काम करेगा या नहीं।
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