बॉलीवुड: दिल्ली रामलीला में इस बार ये हीरोइन बनेंगी सीता, बोलीं- महिलाओं के लिए अब भी जारी ‘अग्निपरीक्षाएं’

Update: 2021-08-30 08:57 GMT

मुंबई 30 अगस्त 2021I भगवान राम की कहानी का सबसे अभिन्न अंग रहीं मिथिला में जन्मी सीता का किरदार बड़े और छोटे परदे का सबसे चर्चित किरदार भी रहा है। रामानंद सागर की ‘रामायण’ से पहले और बाद में भी तमाम अभिनेत्रियों ने इस चरित्र को कैमरे के सामने पेश करने की कोशिश की लेकिन अभिनेत्री दीपिका चिखलिया के भावपूर्ण अभिनय के आगे कोई न टिक सका। अब कृति सैनन निर्देशक ओम राउत की फिल्म ‘आदिपुरुष’ में सीता बनने जा रही हैं और चर्चा ये भी है कि ऐसा ही एक किरदार दीपिका पादुकोण अपनी एक आने वाली फिल्म में कर सकती हैं। ख़ैर परदे की इन सीताओं के दर्शन होने में अभी समय है, इस बीच हिंदी सिनेमा की एक और हीरोइन ने सीता का किरदार करने का प्रस्ताव स्वीकार किया है और वह भी कैमरे के सामने नहीं सीधे रंगमंच पर। रिहर्सल और रीटेक से मीलों आगे जाकर ये चुनौती स्वीकारी है हिंदी सिनेमा और टेलीविजन की बिंदास बाला समीक्षा भटनागर ने और उनके अभिनय की लीला दिल्ली की रामलीला में 3 सितंबर से देखने को मिलेगी।


ये पूछे जाने पर कि सीता के किरदार में किन किन अभिनेत्रियों का अभिनय उन्होंने परदे पर देखा है और क्या इनसे कोई सबक वह अपने रंगमंचीय अभिनय के लिए लेने जा रही हैं? समीक्षा कहती हैं, ‘मुझे तो सिर्फ दीपिका जी की ही चेहरा इस संदर्भ में याद आता है और मैं अक्सर सोचती हूं कि उन्होंने इस किरदार को कितने सहज लेकिन आश्चर्यजनक तरीके से निभा दिया। अभिनय के सारे नौ रस उन्होंने धारावाहिक ‘रामायण’ में ये चरित्र निभाते हुए परदे पर दिखाए। सीता का किरदार भारतीय परंपरा में शक्ति का प्रतीक है। ये उनकी दिलेरी, दमखम और धर्म का पालन ही था जिन्होंने अंत में उनको जीत दिलाई।’

सीता की मान्यताओँ को नए सिरे से स्थापित करने के लिए उनके दृष्टिकोण से भी पूरी राम कहानी को फिर से लिखने की कोशिशें हुई हैं। इसी मान्यता पर एक धारावाहिक भी बन चुका है, ‘सिया के राम’। बदलते दौर में भी सीता का चरित्र महिला सशक्तीकरण का प्रतीक माना जाता है और समीक्षा भी इस बात से इत्तेफाक रखती हैं। वह कहती हैं, ‘सीता की जीवनयात्रा भारतीय महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुकी है। त्रेता युग में जो चुनौतियां उन्होंने झेलीं, कलयुग में भी वे बदस्तूर जारी हैं। जीवन उनके लिए अब भी कई बार बोझ सा तब बन जाता है जब उन्हें बार बार ‘अग्निपरीक्षाओं’ से गुजरना होता है। कई बार तो ये भी लगने लगता कि क्या महिलाएं पुरुषों जैसी ही इंसान नहीं हैं। सीता ने अपनी जीवन यात्रा के जरिए ये दिखाने की कोशिश कि एक महिला को अपना जीवन कैसे जीना चाहिए और कैसे उसे कभी भी सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।’

मधुर भंडारकर की फिल्म ‘कैलेंडर गर्ल्स’ से हिंदी सिनेमा में डेब्यू करने वाली समीक्षा को सनी देओल और बॉबी देओल की फिल्म ‘पोस्टर ब्वॉयज’ से खासी शोहरत मिली। टेलीविजन का वह बड़ा नाम रही हैं। ‘बालवीर’, ‘देवों के देव महादेव’, ‘कुमकुम भाग्य’ जैसे तमाम हिट धारावाहिकों में नजर आ चुकीं समीक्षा भटनागर जब भी मौका मिलता है तो पहाड़ों के बीच एकांत समय बिताने निकल जाती हैं। पढ़ने की शौकीन समीक्षा का रंगमंच से पुराना लगाव रहा है और मशहूर नाटक ‘रोशोमन ब्लूज’ में वह एक पत्रकार के किरदार में नजर आ चुकी हैं।

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