IPS अफसर से महिला SDM ने की बदसलूकी…. SDOP ने SP से की दुर्व्यवहार की शिकायत….SDM-SDOP विवाद में आया नया ट्विस्ट

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बलरामपुर 30 अप्रैल 2020। SDOP पर सनसनीखेज आरोप लगाने वाली महिला SDM अब खुद ही कई आरोपों में घिर गयी है। मनरेगा घोटाले में फंसी इस महिला अफसर ने प्रदेश के एक  IPS अफसर से इस कदर बदसलूकी की थी, कि अफसर को परिवार सहित रात में ही रेस्ट हाउस छोड़ना पड़ा था। शिकायत के अनुसार वो SDOP ध्रुवेश जायसवाल से लगातार दुर्व्यवहार किया करती थी। एसडीओपी ने ढाई पेज की शिकायत एसपी से की है। हालांकि ये बात भी यहां गौर करने वाली है कि 24 को ही  एसडीएम ज्योति बबली ने भी कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्टर को पत्र दिया था।

SDM ज्योति ने 24 अप्रैल को SDOP ध्रुवेश जायसवाल पर जो कार्रवाई बाबत कलेक्टर को पत्र लिखा था, उसमें भी IPS अफसर का जिक्र था, उस पत्र में सिर्फ उन्होंने खुद को पीड़ित बताया था और SDOP पर किसी दूसरे को उनके कमरे में ठहराने, अनजाने में कमरा खाली कराने, जबरन कमरे में घुसने और अफसर के बजाय सिर्फ रेस्ट हाउस के स्टाफ पर नाराजगी जताने जैसी बातें कही गयी थी, जबकि  NPG के हाथ लगी SDOP की पुलिस कप्तान को भेजी चिट्ठी से पूरा मामला ही बदल गया है। पत्र में साफ लिखा गया है कि रेस्ट हाउस के स्टाफ से बातें नहीं सीधे IPS अफसर और उनके परिवार जनों से बदसलूकी की गयी थी। अज्ञानता में नहीं अफसर से जानबूझकर कमरा खाली करवाया गया था।

पत्र के मुतबिक महिला एसडीएम ने अपने पत्र में जिस IPS का जिक्र किया था, वो डॉ लाल उमेद सिंह थे, जो परिवारिक शोक के कार्यक्रम में जाने के दौरान कुछ देर के लिए रेस्ट हाउस में रूके थे। एसडीएम का आरोप था कि उनके कमरे में किसी अन्य को ठहरा दिया गया, जिससे वो अपमानित हुई। जबकि पत्र में कहा गया है कि कमरा खाली थी, जिसे अफसर के लिए रिजर्व किया गया था। ये विवाद 22 अप्रैल का था, एसडीओपी के निर्देश पर चौकी प्रभारी सुनील तिवारी ने आईपीएस लाल उमैद सिंह के लिए कमरा रिजर्व कराया था।

पत्र में बताया गया है कि एसडीएम ने मर्यादा भूलकर इस कदर आईपीएस अफसर से उनके परिवार के सामने दुर्व्यवहार किया कि वो खुद ही अपना समान पैककर दूसरे जगह जाने का अनुरोध करने लगे। पत्र में कहा गया है कि जब IPS लाल उमेद ने उन्हें समझाने की कोशिश की, तो भी वो नहीं मानी और समान खाली करो…जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने लगी। इस वक्त जिले के कई शीर्ष अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे।

आरोप है कि मौके पर एसडीओपी ने एसडीएम को समझाया भी कि IPS रैंक के वो सीनियर अफसर हैं, ऐसे में उनके कमरे में घुसकर उन्हें इस तरह से अपमानित करना सही नहीं है, बावजूद महिला अफसर  कहती रही- गेट आउट !…जिसके बाद सामान सहित लाल उमेद सिंह वहां से निकल गये। बाद में उन्हें फारेस्ट के गेस्ट हाउस में रुकवाया गया।

एसडीओपी ने शिकायत की है, महिला अधिकारी उन्हें भी कई बार अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर अपमानित कर चुकी हैं। 5 अप्रैल को जब एसपी के निर्देश पर वो मीनवांखांड, बालचौराघाट, बिरियो, ककना जांच के लिए पहुंचे, तो उस दौरान फोन पर महिला एसडीएम ने एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल को अभद्रता की गयी और कहा गया कि तुम मेरी अनुमति के बगैर मुख्यालय क्यों छोड़े। ये बताने पर कि एसपी के निर्देश पर वो आये हैं, तो भी वो नहीं मानी और ये कहा कि – मुख्यालय छोड़ने की अनुमति देने का अधिकार एसपी को नहीं है। पत्र में लिखा गया है कि इस बात की जानकारी उसी वक्त उन्होंने एसपी को भी दी थी।

विवाद की एक और बानगी 12 अप्रैल को भी देखने को मिली जब यूपी से आ रहे दो लोग वेंटिलेटर की सामिग्री लेकर बलरामपुर आया था, जिससे पूछताछ करने के लिए रेस्ट हाउस लाया गया था। उस मामले में भी एसडीओपी पर एसडीएम ने अमर्यादित टिप्पणियां की थी।

पहले सिर्फ एसडीएम का पत्र मिला था, जिसके बाद एसडीओपी कई सारे सवालों में घिर गये थे, लेकिन अब SDOP के पत्र सामने आने के बाद पूरा माजरा ही बदल गया है। हालांकि इस पूरे प्रकरण में कौन सच्चा और कौन झूठा है…इसकी सच्चाई को जांच के बाद ही पता चल पायेगी। हालांकि ये तो तय है कि दो अफसरों की जिद और अहम की लड़ाई में प्रशासन और पुलिस महकमे का पूरे जिले में तमाशा बन गया है, जिसकी हर जगह पर चर्चा हो रही है।

हालांकि, महिला एसडीएम में कलेक्टर से लिखित शिकायत में बड़ी चतुराई से इसका जिक्र किया है कि उसे नहीं मालूम कि रेस्ट हाउस के कमरे में जो व्यक्ति था वह कौन था। कलेक्टर ने उसे बताया कि वे आईपीएस हैं। तब जाकर मैंने उनसे माफी मांगी। जबकि, वस्तुस्थिति यह है कि लाल उमेद ही नहीं उनकी पत्नी ने भी बड़ी विनम्रता से महिला एसडीएम को समझाने का प्रयास किया कि सीनियर अफसर से इस तरह से बात न करें। लेकिन, महिला एसडीएम इसके बाद भी कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं थी।

बिना काम हुए कर दिया 38 लाख का भुगतान, बीजेपी

सरकार में स्वीकृत हुआ था

महिला एसडीएम का नाम मनरेगा घोटाले में भी आया है। वाड्रफनगर जनपद पंचायत के प्रभारी सीईओ रहने के दौरान बिना काम के 38 लाख भुगतान कर दिया गया। भाजपा सरकार के समय 2015-16 में ये काम स्वीकृत हुए थे। लेकिन, हुए नहीं। वाड्रफनगर के अफसरों ने नया सरकार बनने के बाद पूरा पेमेंट कर दिया। वाड्रफनगर के पूर्व एसडीएम ने इसकी जांच की और महिला एसडीएम समेत चार अधिकारियों को इसका जिम्मेदार ठहराया है। सरगुजा कमिश्नर ने बलरामपुर के जिला पंचायत सीईओ से इसकी रिपोर्ट मांगी है। लेकिन, डेढ़ महीने बाद भी सीईओ ने इसकी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। ये तो हाल है बलरामपुर जिले का। इस बारे में महिला एसडीएम से उनका पक्ष जानने के लिए उनके फोन पर बात करने की कोशिश की गई। लेकिन, उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

 

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