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चाहे 15 से पाँच पर आ जाएँ.. चाहे चलता रहे डी पुरंदेश्वरी की डपट. लेकिन नहीं थम रहा भाजपा संगठन का कौरवी संग्राम.. जानिए कोरिया भाजयुमो का यह किस्सा..

कोरिया,16 अप्रैल 2021। भाजपा संगठन के भीतर कौरवी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है, ये हालात प्रदेश स्तर से लेकर निचले पायदान तक हैं। प्रभारी डी पुरंदेश्वरी चाहे जो फटकार लगाकर जाएँ.. सफलता की राह कौन सी है और उस पर चलना कैसे हैं यह कितनी ही बात समझाएँ लेकिन हाल यह है कि जिन्हे मछली को मछली होने की वजह से नहीं खाना वे अपनी थाली में उसे जल तरोई कह कर परोस ले रहे हैं, याने नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही है। ताज़ा मामला कोरिया ज़िले से है जहां बीते कई दिनों से चल रहे घमासान ने बिलकुल अनूठा नजारा याने मछली को जलतरोई की तरह पेश कर दिया है।
हुआ वहाँ पर ये कि, भाजयुमो के ज़िला अध्यक्ष पद की घोषणा लंबे अरसे तक टलती रही, इसके पीछे वजह पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाडे और मौजुदा ज़िला अध्यक्ष कृष्ण बिहारी जायसवाल के बीच महत्वाकांक्षा का टकराव माना जाता रहा।
आख़िरकार भाजयुमो अध्यक्ष अमित साहू ने इसकी घोषणा अध्यक्ष अंचल राजवाडे और महामंत्री शारदा गुप्ता के रुप में कर दी। इसमें अध्यक्ष पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े के पैनल से जबकि महामंत्री ज़िलाध्यक्ष के पैनल से माने गए।
पर यह कौरवी संग्राम तब और तेज हुआ जबकि मंडल अध्यक्ष समेत समूची कार्यकारिणी सोशल मीडिया पर वायरल हुई और नव नियुक्त भाजयुमो अध्यक्ष अंचल राजवाडे ने इस सुची को लेकर अनभिज्ञता जताई, सोशल मीडिया में यह खबर तैरी कि, ज़िलाध्यक्ष कृष्ण बिहारी जायसवाल ने भाजयुमो की कार्यकारिणी नवनियुक्त भाजयुमो ज़िला महामंत्री शारदा गुप्ता से मिल कर जारी कर दी और इसके बारे में भाजयुमो अध्यक्ष अंचल राजवाड़े को ना कोई जानकारी है ना कोई सहमति।खबरें यह भी आई कि नवनियुक्त भाजयुमो ज़िलाध्यक्ष ने मामले की शिकायत भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू से की है, और इस खबर के कुछ ही देर बाद भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें इस बात का उल्लेख था कि भाजयुमो की ज़िला कार्यकारिणी निरस्त की जाती है।
इस पत्र के वायरल होने के बाद घमासान और बढ़ गया और कुछ घंटों बाद ज़िलाध्यक्ष कृष्ण बिहारी जायसवाल का वीडियो सोशल मीडिया पर आया। इस वीडियो में उन्होंने जानकारी दी कि
“नवनियुक्त ज़िलाध्यक्ष ज़िला महामंत्री और कार्यकारिणी को प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय ने स्थगित कर दिया है, वर्तमान में तीनों ही प्रभावहीन माना जाएगी”
मसला अब इस रुप में देखा गया कि भाजयुमो के ज़िलाध्यक्ष की शिकायत के बाद मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष अमित साहू के कार्यकारिणी भंग के पत्र को कमतर करने के लिए ज़िलाध्यक्ष कृष्ण बिहारी जायसवाल ने प्रदेश कार्यालय से पूरी नियुक्ति ही स्थगित करा दी बल्कि यह पंक्तियाँ भी वे जुड़वा गए कि ये नियुक्तियाँ याने मोर्चा ज़िलाध्यक्ष और मोर्चा ज़िला महामंत्री और कार्यकारिणी “प्रभावहीन” मानी जाएँगी।
मसला घूम फिर कर उसी कौरवी संग्राम पर जा टिका है। स्पष्ट गुटबाज़ी का नजारा है, शक्ति प्रदर्शन का खुला मुज़ाहिरा है, यह वही है जिसे रोकने प्रभारी डी पुरंदेश्वरी की स्पष्ट हिदायत है। लेकिन हाल है कि..

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