Begin typing your search above and press return to search.

पुरंदेश्वरी की इस बात के मायने क्या : बोली पुरंदेश्वरी -“आगामी विधानसभा चुनाव में सीएम का चेहरा कौन .. यह पार्टी तय करेगी..”

पुरंदेश्वरी की इस बात के मायने क्या : बोली पुरंदेश्वरी -“आगामी विधानसभा चुनाव में सीएम का चेहरा कौन .. यह पार्टी तय करेगी..”
X
By NPG News

रायपुर,18 जुलाई 2021। प्रदेश संगठन में प्राण फूंकने की क़वायद में जुटे तीन तीन दिग्गज को बैठकों को लेते आज दूसरा दिन है। पंद्रह साल सत्ता में रहने के बाद सीटों के आँकड़ों में सबसे कमजोर स्थिति में आ चुकी भाजपा को लेकर चिंता ज़ाहिर है और इसलिए चिंतन भी चल रहा है। इन चिंतनों में यह बात कई तरीक़ों से संगठन को सम्हालने और फिर से उर्जावान बनाने में लगे तीनों दिग्गजों तक पहुँचाने की क़वायद भी होती रही है कि पंद्रह बरसों से चिर परिचित चेहरों को हटाकर नए चेहरों को सामने लाएँ और उन्हें अवसर दें। हालाँकि इस क़वायद को कभी कोई मज़बूत सहारा मिला हो ऐसा दिखा नहीं है।

लेकिन हालिया दिनों राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश के दौरे में उनके द्वारा कही एक बात ने भाजपा के भीतरखाने कईयों को चौंका दिया तो कइयों की बाँछें खिल गईं। यह वह वक्त था जबकि टूलकिट मसले पर डॉ रमन सिंह और संबित पात्रा पर मुक़दमे हुए और पार्टी “मैं भी रमन” की टैग लाईन के साथ खड़ी हो गई, प्रदेश के हर थाना चौकी में प्रतीकात्मक धरना दिया गया और आवेदन देकर कहा गया कि उन्होंने भी टूलकिट को लेकर बातें ट्वीटर या कि फेसबुक पर साझा की हैं, यदि यह अपराध है तो उनके विरुद्ध अपराध दर्ज किया जाए।इस मसले पर शिव प्रकाश ने कुशाभाउ ठाकरे परिसर में कहा

“ व्यक्ति केंद्रित कोई आंदोलन कैसे हुआ ? संगठन सर्वोपरि है.. आंदोलन हो लेकिन व्यक्ति केंद्रित नहीं”

राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश के इस बौद्धिक के मायने अलग अलग निकाले गए। “सारे घर के बल्ब बदल दिए जाएँ” वाली माँग के साथ चलने वाले ख़ेमे के नज़रिये से यह मुस्कुराहट की बात थी, तो दूसरे ख़ेमा हमेशा की तरह मौन बना रहा।
आंदोलन की टैग लाईन को व्यक्ति वाद समझने के विषय ने मुस्कुराहट और मौन के रुप में दो स्पष्ट लकीरें खींच दी।

यह पढ़ते हुए यह तथ्य याद रखना होगा कि जो भाजपा ढाई बरसों में सक्रिय नहीं दिखी वह डॉ रमन सिंह पर एफआईआर के बाद पूरे तेवर के साथ दिखी।यह स्थापित तथ्य है कि तमाम अगर मगर के बावजूद प्रदेश में ऐसा कोई चेहरा कहाँ है जिसे डॉ रमन के चेहरे जैसी सहजता और विश्वसनीयता हासिल हो।

दिलचस्प है कि कार्यकर्ता देवतुल्य और संगठन सर्वोपरि सिद्धांत वाली भाजपा में वह खेमा जिसे बदलाव की चाह है और इकलौती माँग है, वह इसी स्थापित तथ्य को सवालों मे ले आता है, और स्थापित तथ्य को पार्टी के उपर प्रभावी होने का सबसे बड़ा प्रमाण बताता है। यह खेमा सवाल करता है

“कार्यकर्ताओं की इस पार्टी में ऐसा क्यों हुआ कि बस एक चेहरा ही सामने है.. कभी कार्यकर्ताओं की कमी तो नहीं रही.. फिर बस एक ही नाम क्यों.. या एक बरगद ऐसा हुआ कि शेष कोई उभर नहीं पाया या कि उभरने नहीं दिया गया”

इस आंतरिक घमासान के बीच उपर सब कुछ चुप्पी है। संगठन के भीतर भी किसी को सीधे तौर पर ना तो हाँ कहा गया और ना ही किसी को सीधे ख़ारिज कर दिया गया।
लेकिन प्रदेश संगठन प्रभारी डी पुरंदेश्वरी की एक बात ने फिर कईयों को अपने अपने तई सोचने को मजबूर किया है, अपने तई सिक्के के अपने पहलू को देखने और उस अनुरुप मुस्कुराने या गंभीर होने की अवस्था में छोड़ दिया है।
प्रदेश संगठन प्रभारी डी पुरंदेश्वरी ने भाजपा की आगामी विधानसभा चुनाव में सुनिश्चित वापसी का दावा करते हुए कहा

“सरकार से हर वर्ग दुखी है,विकास के मायने केवल निर्माण ही नहीं होता है..विकास के मायने बहुआयामी है, और विकास कहीं नहीं है.. हर मोर्चे पर सरकार फेल है, हर वायदा अधुरा है, हम विकास के इसी मुद्दे को लेकर जनता के पास जाएँगे”

और इस के ठीक बाद प्रभारी डी पुरंदेश्वरी ने कहा

“हमारा मुद्दा विकास होगा.. इसके लिए जनता के बीच जाएँगे.. मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा यह पार्टी तय करेगी”

पंद्रह बरस तक मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह और उनके समर्थकों को इस बात से चिंतित होना चाहिए या चिंतन करना चाहिए और विरोधी ख़ेमे को ख़ुश होना चाहिए या कि अपनी बातों को और मज़बूती से रखना होगा.. यह आने वाला समय बताएगा।

Next Story