आगे देखने के लिए मिलेगा कि, वो माधव को अपने हाथ से पराठा खिलाती है और अभिरा को भी देती है लेकिन अभिरा अरमान के हाथ से दही-चीनी नहीं खाती है। विद्या को ये बात बुरी लगती है और वो कहती है कि माफी देने में इतने भी नखरे भी क्या। लेकिन माधव कहता है कि माफी मांगी नहीं जाती, कमाई जाती है।