त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद की सबसे लोकप्रिय औषधियों में से एक है। शरीर में वात,पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करने वाले त्रिफला को यूं ही फांकना पर्याप्त नहीं है।
आयुर्वेद के अनुसार इसे हर अलग समस्या के लिए अलग तरीके से लेना होता है। कभी इसे घी के साथ लेना उचित है तो कभी शहद या गुनगुने पानी के साथ। आइए जानते हैं कब त्रिफला कैसे लेना चाहिए।
पाचन से जुड़ी समस्याओं में जैसे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, आंव युक्त मल या स्टिकी स्टूल जैसी स्थिति में आप को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेना चाहिए।
लिवर से जुड़ी कोई समस्या या फैटी लिवर हो तो त्रिफला का सेवन शहद के साथ करना चाहिए।
शुगर कंट्रोल के लिए आपको दो से तीन ग्राम त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ खाली पेट लेना है।
नेत्र रोग में आपको एक से तीन ग्राम त्रिफला में एक चम्मच घी और आधा चम्मच शहद दोनों मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए।
दांतों में दर्द, सेंसिटिविटी, सांसों की दुर्गंध, केविटी, मसूड़ों में सूजन या खून आने जैसी समस्याओं से बचाव के लिए आप त्रिफला में हल्दी मिलाकर इसे दांतों पर मलें, मंजन करें।
यूरीन से जुड़ी समस्याओं में त्रिफला का सेवन गुनगुने पानी के साथ खाली पेट करें।
अगर आपका लक्ष्य वेट या फैट कम करना है तो उसके लिए आधा से एक चम्मच त्रिफला का सेवन शहद के साथ करें।