आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है. तीसरे दिन माता दुर्गा के चन्द्रघंटा स्वरूप की उपासना की जाती है.
नवरात्रि के दौरान माता रानी को खुश करने के लिए श्रद्धालु कलश स्थापना, अंखड ज्योत, माता की चौकी करके पूजा-अर्चना करते हैं.
कई भक्त घर में अखंड दीपक जलाते हैं, अखंड ज्योति को पूरे नौ दिन तक बिना बुझे जलाया जाता है, कहते हैं कि अगर ये बुझ जाए तो इसे अपशगुन समझा जाता है.
कई बार कुछ कारणों से दीपक बुझ भी सकता है, तो चलिए जानते हैं अगर गलती से अखंड दीपक बुझ जाए तो क्या करें.
अगर अखंड दीपक बुझ जाए तो सबसे पहले एक छोटा साक्षी दीपक जलाये और फिर अखंड दीपक साफ करना चाहिए.
अखंड ज्योति की बाती को निकालकर नई बाती लगाएं और उसे साक्षी दीपक की लौ से जलाएं. ज्योति दोबारा जलाते समय 'ॐ श्री ज्वालायै नमः' का पाठ करें.
माता दुर्गा के सामने हाथ जोड़कर अपनी गलती के लिए माफी मागें और कहे कि दुबारा आप दीपक नहीं बुझने देंगे.
आखिर में 108 बार माता दुर्गा के मंत्र 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का जप करना चाहिए.