नवरात्रि के दौरान माता के भक्त कन्या पूजन करते हैं. धर्म शास्त्रों के अनुसार कन्या पूजन के बिना नवरात्रि की पूजा-अर्चना अधूरी मानी जाती है.

कन्याओं का पूजन करने से माता का आशीर्वाद भक्तों को प्राप्त होता है.
कन्या पूजन के दौरान देवी मानकर बालिकाओं की पूजा की जाती है ऐसे में कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है.
कन्या पूजन के स्थल को साफ और पवित्र रखें. कन्या पूजन से पहले पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें.
कन्या पूजन के लिए हमेशा 2, 5, 7 या 9 कन्याओं को आमंत्रित करना शुभ माना गया है. विषम संख्या न रखें.
ईशान कोण को देवी-देवताओं को निवास स्थान माना जाता है और इसलिए इसी दिशा में कन्याओं को बैठाएं.
कन्या पूजा के समय मन में कन्याओं के लिए क्रोध, अहंकार या नकारात्मक विचार को मन में न आने दें.
कन्याओं को खाली हाथ न जानें दें अपनी क्षमता अनुसार उपहार, दक्षिणा, फल या कपड़े दें.
कन्या पूजन में कन्याओं के पैर जरूर छुएं ध्यान रहे कन्या आपका पैर न छुएं.
कन्या के साथ एक बालक को पूजा में बुलाये वरना आपकी पूजा अधूरी रह सकती है.