भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारत में ब्रेन को-प्रोसेसर मूनशॉट प्रोजेक्ट शुरू किया है. जो स्ट्रोक मरीजों की बंद पड़ी हुई दिमाग को फिर दोबारा रिसेट करने में मदद करेगा. तो आइए जानते है पूरी डिटेल्स...
दरअसल, यहां महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो मस्तिष्क की क्षमताओं को बढ़ाने में मदद कर सकता है. जिसे प्रमुख आईटी उद्योगपति सेनापति गोपालकृष्णन द्वारा ट्रस्ट का वित्तीय समर्थन किया जा रहा है.
सेनापति गोपालकृष्णन के अनुसार, इस योजना में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शुद्ध विज्ञान को क्लिनिकल एप्लिकेशन (Clinical Application) से जोड़कर यह योजना चिकित्सा तकनीक में नई संभावनाएं पैदा करेगी. जैसे मरीजों का पंजीकरण, अपॉइंटमेंट बुकिंग और रिकॉर्ड का डिजिटल भंडारण रूप से सहता करेगा.
IISc की ब्रेन एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट से विकसित हुई है। जो कंप्यूटेशन और डेटा साइंस पहल के तहत शुरू हुए है. इस योजना में 20 से अधिक फैकल्टी सदस्य शामिल हैं.
इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य ऐसा है जो मानव शरीर का दिमाग को गतिविधियों को रिकॉर्ड कर AI के माध्यम से प्रोसेस को पूरा करेगा.
इस प्रोजेक्ट का यहां भी उद्देश्य है कि मानव शरीर के अलग-अलग हिस्सों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और शरीर की स्मूद तथा समन्वित सामान्य रूप से शुरू करना.
सबसे बड़ा उपयोग स्ट्रोक से बचे मरीजों के के लिए यहां तकनीक बड़ी उम्मीद है, कई मरीज स्ट्रोक के बाद हाथ-पैर को पकड़ने-छोड़ने जैसी क्षमताओं को खो देते हैं. इसलिए ब्रेन को-प्रोसेसर ऐसे मरीजों को राहत की सुविधा है.
आपको बता दें कि यहां योजना को दो मुख्य रूप से पूरा किया जाएगा, (पहल चरण) नॉन-इनवेसिव को-प्रोसेसर: जिसमें स्ट्रोक मरीजों में लक्ष्य-निर्देशित हाथ की गतिविधियों के लिए संवेदी-मोटर प्रतिक्रिया देना है.
(दूसरा चरण) इम्प्लांटेबल ब्रेन डिवाइस: जिसमें मिडिल सेरेब्रल आर्टरी स्ट्रोक के बाद गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों में समन्वय और गतिविधियों को बहाल करना है.