राव साहेब और अक्का साहेब के चेहरे का रंग उड़ा नजर आता है। चिन्मय सबके सामने नाचना शुरू कर देता है और खुद सबके हाथ में माला थमा कर उसे पहनाकर उसका स्वागत करने को कहता है। दूर्वा, निशांत और बाकी लोगों ने उसे माला पहनाई। उसे देखकर शिखा डर से कांप रही थी, तो राव साहेब गुस्से से आग बबूला हो रहे थे।