आज 14 जनवरी 2026 दिन बुधवार को माघ माह के कृष्ण पक्ष की यानि षटतिला एकादशी तिथि है.
एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है. चावल खाना मांस और खून का सेवन करने के समान माता जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं चावल खाना वर्जित क्यों है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, चावल को महर्षि मेधा का अंश माना जाता है.
प्राचीन काल में महर्षि मेधा ने यज्ञ में एक भिक्षुक भिक्षुक को अपमानित किया. जिससे माता दुर्गा महर्षि मेधा से नाराज हो गईं.
उन्होंने में माता दुर्गा मनाने की कोशिश की और फिर गुस्से से बचने के लिए महर्षि ने अपना शरीर त्याग दिया.
महर्षि मेधा के शरीर त्यागने के बाद उनके शरीर के अंश धरती में समा गए.
माता प्रसन्न हुई और फिर वरदान से उसी जगह पर कुछ समय बाद महर्षि मेधा चावल और जौ के रूप में उत्पन्न हुए.
क़हा जाता है जिस दिन महर्षि मेधा ने अपना शरीर त्यागा उस दिन एकादशी थी और चावल में उनका अंश था.
ऐसे में एकादशी पर चावल खाना महर्षि मेधा के मांस और खून का सेवन करने के समान माना जाता है.