सुबह लगभग हर घर में नाश्ते में पोहा जरूर बनाया जाता है. वही डाइटिंग कर रहे लोग भी इसे खाना पसंद करते है. लेकिन क्या आपको को पता है पोहा डायबिटीज के मरीजों के लिए सही है या नहीं...?
जब डायबिटीज की बात आती है, तो कई जाने वाली हर एक चीज का विशेष ध्यान रखा बहुत जरूरी है. अक्सर यह सवाल उठता है कि ‘क्या पोहा शुगर लेवल को बढ़ा सकता है?’ तो आइए जानते है...
आमतौर पर पोहा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 60 से 75 के बीच होता है, जो 'मीडियम' से 'हाई' श्रेणी में आता है. यह शरीर में जाकर ग्लूकोज को तेजी से रिलीज कर सकता है. इसे संतुलित करने के लिए आप Doubling रूल अपना सकते है.
40 ग्राम अगर आप पका हुआ पोहा ले रहे हैं, पोर्शन कंट्रोल के लिए उसकी मात्रा सीमित रखें. और इसमें 40 ग्राम उबले हुए अंकुरित अनाज मिलाएं प्रोटीन शुगर के अवशोषण को धीमा कर देता है.
अगर आप 40 ग्राम हरी सब्जियां और फाइबर शामिल करें, इससे फाइबर आपके डाइजेशन को बेहतर करता है और शुगर स्पाइक को रोकता है. ध्यान दें यदि आप पोहा बनाते समय तेल की मात्रा कम रखें. ज्यादा तेल फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है.
कई लोग तो स्वाद के लिए पोहे के ऊपर-ऊपर से डालकर खाते है, लेकिन आप ये नहीं जानते कि नींबू का रस भोजन के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को कम करने में मदद करता है. और अच्छी मात्रा में नींबू निचोड़कर खाने से आपके ब्लड शुगर के लिए और ज्यादा सुरक्षित हो जाती है.
वही आपकी नाश्ता की प्लेट जिसमें पोहा, सब्जियां और स्प्राउट्स बराबर मात्रा में हों ऐसी प्लेट जरूर होनी चाहिए, वही पोहा के साथ में एक कटोरी ताजा सलाद भी रहना चाहिए. और भरपूर नींबू का रस भी.
डायबिटीज मैनेजमेंट में 'क्या खा रहे हैं' से ज्यादा जरूरी यह है कि 'किसके साथ खा रहे हैं'. पोहे को हमेशा प्रोटीन और फाइबर के साथ ‘कंबाइन’ करके ही डायबिटीज के लोगो को हमेशा खाना चाहिए.