चाणक्य कहते हैं जहां लड़ाई झगड़ा चल रहा हो और वह अगर आपसे संबंधित नहीं हो तो आप उसमें बिल्कुल शामिल न हों। चुपचाप वहां से चले जाएं।

जहां कोई किसी और की बुराई कर रहा हो, वहां भी आपको मौन धारण करना चाहिए।
जहां अहंकारी लोगों का जमावड़ा हो, वहां भी आपको चुप रहना चाहिए।
अगर आपके पास किसी विषय की जानकारी अधूरी है तो उस विषय पर बोलने से बचें और चुप रहें।
जब सामने वाला व्यक्ति आपकी भावना न समझ रहा हो तब भी चुप हो जाना चाहिए।
आपका कोई करीबी अगर दुख में है तो आपसे अपनी तकलीफ़ साझा कर रहा है तो चुप रहकर इत्मीनान से उसकी बातें सुनिए और भविष्य में भी उन बातों को किसी के साथ न बांटिए।
जब आपका कोई करीबी व्यक्ति आपसे क्रोधित हो, या चिल्ला रहा हो, उस वक्त चुप रहके माहौल को शांत होने देने का प्रयास करना चाहिए।
दूसरों के मुद्दों पर जबरन आप कुछ न बोलें, चुप रहें।
बिना ज़रूरत के बोलना समझदारी नहीं हैं। मौन रहना और ज़रूरी होने पर बोलना ही आपके हित में है।
अगर आप क्रोधी स्वभाव के हैं और जल्दी चिल्लाने लगते हैं तो भी अपने आपको मौन रहना सिखाइए।