आचार्य चाणक्य के अनुसार कुछ लोगों की मदद कभी नहीं करनी चाहिए.
चाणक्य के अनुसार अज्ञानी शिष्य चाहे जितना भी शिक्षित किया जाए, वह कुछ नहीं सीखता. ऐसे व्यक्ति पर समय, ज्ञान और मदद करना व्यर्थ है.
लालची व्यक्ति किसी का सगा नहीं होता. वह अपने फायदे के लिए किसी को भी धोखा दे सकता है, इसलिए इनकी मदद नहीं करनी चाहिए.
स्वार्थी लोग सिर्फ अपने हित के लिए दूसरों का उपयोग करते हैं. जब उनका काम निकल जाता है, तो वे मुंह मोड़ लेते हैं. ऐसे लोग विश्वास के लायक नहीं होते.
जो व्यक्ति दूसरों की भावनाओं की कद्र नहीं करता, वह कभी किसी का भला नहीं सोच सकता.
जो लोग बार-बार अपमान करते हैं, वे आपके आत्म-सम्मान को चोट पहुंचाते हैं. ऐसे लोगों से दूरी बनाना ही आत्म-सम्मान की रक्षा है.
जो लोग बार-बार विश्वासघात करते हैं, वे कभी बदलते नहीं. इनसे दूरी बनाना ही समझदारी है.
ऐसे लोग जब कोई गलती करते हैं तो उसका दोष दूसरों पर थोप देते हैं. इनसे दूरी न बनाई जाए तो आप बार-बार मुश्किलों में फंस सकते हैं.
कई लोग मदद मिलने के बावजूद कृतज्ञ नहीं होते. ऐसे लोग न तो सम्मान देना जानते हैं और न ही रिश्तों की अहमियत समझते हैं.