नहाना शरीर की सफाई के लिए बहुत जरुरी है. लेकिन क्या आप जानते हैं ऊर्जा, मन और स्वास्थ्य को संतुलित करने की प्रक्रिया है.
आयुर्वेद में नहाने का सही तरीका बताया गया है जो हमारे मन और तन दोनों को स्वच्छ करता है.
आयुर्वेद के अनुसार, सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करना सबसे अच्छा है.
नहाने से 15-20 मिनट पहले सरसों, तिल या नारियल तेल से मालिश करना चाहिए.
नहाने का पानी गर्मियों में – सामान्य/ठंडा पानी, सर्दियों में – हल्का गुनगुना होना चाहिए, साथ ही सिर के सामान्य पानी होना चाहिए.
केमिकल साबुन की जगह बेसन, दही, या मुल्तानी मिट्टी से बने उबटन का इस्तेमाल करना चाहिए और बालों के लिए रीठा-शिकाकाई.
नहाने की शुरुआत नाभि या पैरों करें, ताकि शरीर की गर्मी को पैरों से बाहर निकले.
नहाते समय मंत्रों का उच्चारण किया जाता है जिससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.