एनकाउंटर के पहले गैंगस्टर विकास ने बतायी थी वारदात की पूरी कहानी …… DSP की मौत के बाद भी विकास ने पैर में मारी थी गोली…. कैसे की 8 पुलिसकर्मियों की हत्या… कहां और कैसे-कैसे भागा… यहां पढ़िये

कानपुर 11 जुलाई 2020। बिकरु में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद से ही विकास दुबे पुलिस को छकाता फिर रहा था। इस दौरान उसने सात दिन में कई प्रदेशों की पुलिस को घुमाया और 3 जुलाई से लेकर 7 जुलाई के बीच 17 ठिकाने बदले। बिकरु से फरार होने के बाद विकास दुबे शिवली, फरीदाबाद समेत कई जगह रुका लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। फरीदाबाद से विकास जयपुर होते हुए कोटा और फिर वहां से उज्जैन पहुंचा था।विकास दुबे जब फरार था तो वह अपने कुछ साथियों के संपर्क में था लेकिन उसके साथियों को भी उसके ठिकानों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यही वजह है कि विकास के साथियों से पुलिस को कई अहम जानकारियां मिलीं लेकिन उसके ठिकाने के बारे में कोई सुराग नहीं मिल सका।

एनकाउंटर के पहले उज्जैन में विकास दुबे के साथ कई दौर की पूछताछ हुई थी। इस दौरान विकास ने पुलिस को कई अहम जानकारियां दी थी। .. पढ़िये

सवाल- सीओ से तुम्हारी क्या दुश्मनी थी, 
विकास दुबे – सीओ मुझे मारना चाहते थे. इसके लिए मेरे विरोधी उनकी पूरी मदद कर रहे थे. मुझे एक मामले में इन्हीं लोगों के कहने पर 120-बी (अपराध की साजिश में शामिल होना) में फंसाया गया. फिर मुझे राहुल तिवारी की हत्या के प्रयास में नाप दिया. थाने के लोगों ने मुझे बताया था कि मेरा एनकाउंटर करने की सुपारी ली थी सीओ ने.

 

पुलिस – कैसे हुई थी पुलिस के छापे की जानकारी
विकास दुबे – मेरे भतीजे हीरू दुबे के पास रात आठ बजे मेरे खास सिपाही राजीव चौधरी ने फ़ोन किया था. उसने बताया कि आज दबिश की प्लानिंग है. काफी फोर्स आएगी. मेरे एनकाउंटर की पूरी तैयारी है. धीरू ने मुझे बताया तो मैंने एसओ विनय तिवारी को पलटकर फ़ोन किया था. एसओ को धमकाया भी था और कहा था कि आ गए तो अंजाम अच्छा नहीं होगा. एसओ ने कहा था कि सबकुछ सीओ के स्तर से हो रहा है, उसका रोल नहीं है.

 

पुलिस – इतने पुलिसकर्मियों को क्यों मारा था 
विकास दुबे – मेरा प्लान ये था कि कुछ सिपाहियों को घायल कर देंगे तो पुलिस भाग जाएगी और दहशत कायम हो जाएगी. मगर मेरे प्लान के हिसाब से चीजें नहीं हुईं. अमर और अतुल ने काफी शराब पी रखी थी. अतिउत्साह में उन्होंने और गैंग के नए लड़कों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. मेरे घर पर बाहर के आधा दर्जन अपराधी रुके थे. उन्हें लगा कि कहीं पुलिस उन्हें न धर ले, इसलिए उन्होंने भी अंधाधुन्द फायरिंग कर दी.

 

पुलिस – तुमलोगों के पास कौन-कौन से हथियार थे, जिससे गोली चलायी
विकास दुबे – मेरे भांजे शिवम तिवारी के नाम मैंने विनचिस्टर कम्पनी की सेमी ऑटोमैटिक रायफल ले रखी थी. अमर इसी से फायरिंग कर रहा था. अतुल और दूसरे साथी भी राइफल और देशी तमंचों से गोलियां चला रहे थे. ये लोग मेरे मामा प्रेम प्रकाश की छत पर मौजूद थे और मैं अपनी छत पर रिपीटर बंदूक से गोलियां चला रहा था. मेरा अहम मकसद दहशत फैलाने का था. मगर जब पुलिसवाले भागने लगे तब मैंने नीचे उतरकर देखा तो आठ पुलिसवाले मरे पड़े थे. ये मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा था. सीओ को मैंने नीचे आकर रायफल से एक गोली पैर में मारी थी, क्योंकि वो कहते थे कि विकास एक पैर से लंगड़ा है. मैं दोनों से कर दूंगा. शवों को डीजल से जलाने की तैयारी थी, लेकिन वक्त न होने के चलते हम सभी भाग गए.

 

पुलिस – हत्या के बाद कहां-कहां भागे और छुपे 
विकास दुबे – मैं समझ गया था कि इस खूनखराबे के बाद पुलिस मुझे कुत्ते की तरह तलाश करेगी. मैंने गिरोह के लोगों को अलग अलग भागने को कहा और मैं खुद अतुल और अमर को लेकर पैदल शिवली पहुंचा, जहां एक करीबी के घर दो दिन तक रुका. मुझे पता चला कि शनिवार की देर रात पुलिस ने मेरे बहनोई को उठा लिया है, तो मैं यहां से तड़के चार बजे निकला. नगर पालिका के एक पदाधिकारी और मेरे करीबी ने अपनी सिल्वर कलर हुंडई कार को ड्राइवर के साथ मुझे, अमर और अतुल को फरार करवाया. तड़के चार बजे हम लोग शिवली से निकल गए.

 

पुलिस – शिवली से फिर उज्जैन कैसे आ गये, किसने मदद की 
विकास दुबे – यहां से सीधे नोएडा होते हुए दिल्ली गए, जहां कुछ वकीलों से मुलाकात हुई. उनसे सरेंडर की बात हुई. पचास हजार रुपये एडवांस दिलवाने को उन्होंने बोला था. यह भी तय हुआ था कि उज्जैन में सरेंडर करेंगे. इस पर मैंने गाड़ी वापस शिवली भेज दी और बस से फरीदाबाद गया, जहां अभय मिश्र के दूर के रिश्तेदार का मकान है. एक दिन रुकने के बाद मैं दोबारा फरीदाबाद से वकीलों के पास दिल्ली पहुंचा. वापस फरीदाबाद जाना था, लेकिन तब तक पता चला कि अभय गिरफ्तार हो गया है. ऐसे में मैंने संदीप पाल के नाम से पहले दिल्ली से जयपुर के टिकट कराया. फिर जयपुर से झालावाड़ गया और वहां से उज्जैन आया. वकील से यह बात भी हुई थी कि सरेंडर होते ही एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई जाएगी, जिससे पुलिस मेरा एनकाउंटर न कर पाए. मुझे अमर और अतुल की मौत से सबसे ज्यादा दुख पहुंचा.

 

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