Begin typing your search above and press return to search.

कुलपति चक्रवाल की दो टूकः सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए मगर मातृ भाषा से समझौता नहीं, बोले…नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा सुनिश्चित करने का हो रहा प्रयास, शिक्षा में शुचिता का गुण जरूरी

कुलपति चक्रवाल की दो टूकः सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए मगर मातृ भाषा से समझौता नहीं, बोले…नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा सुनिश्चित करने का हो रहा प्रयास, शिक्षा में शुचिता का गुण जरूरी
X
By NPG News

0 भाषा के सामर्थ्य को बल देने के साथ भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में प्रस्थापित करने का प्रयास है- पचौरी

बिलासपुर, 28 सितंबर 2021। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो0 आलोक कुमार चक्रवाल ने कहा है कि सभी भाषाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। मगर मातृभाषा से समझौता करके नहीं। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है…आठ भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। शिक्षा में शुचिता की बड़ी जरूरत है।


प्रो0 चक्रवाल ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में गुरुकुल शिक्षा, सांस्कृतिक मूल्य तथा भारतीय ज्ञान परंपरा का योगदान‘‘ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कर्म प्रधान विश्व महान की परिकल्पना को सृजित करती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. चक्रवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को विश्वविद्यालय में संपूर्ण रूप से अग्रणी रहते हुए क्रियान्वित करने के अपने संकल्प को दोहराया। देश के श्रेष्ठ शिक्षा मनीषियों एवं विचारकों के अथक प्रयासों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को क्रियान्वित किया जाना वाला स्वरूप हमारे सामने आया है, जिसमें मातृभाषा में शिक्षा की उपलब्धता को सुनिश्चित किये जाने का प्रयास किया गया है। सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए लेकिन मातृभाषा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
कुलपति ने कहा कि यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के शुरुआती चरण में आठ भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई प्रारंभ हो गई है। शिक्षा में शुचिता गुण की आवश्यकता पर बल देते हुए कुलपति ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मूल भावना के साथ क्रियान्वित के लिए सभी को एक साथ व एक रूप में प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय शिक्षण मंडल के साथ किया गया सहयोग समझौता शोध एवं अनुसंधान को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. उमा शंकार पचौरी महासचिव भारतीय शिक्षण मंडल ने अपने वक्तव्य का प्रारंभ मां शारदे के चरणों में प्रणाम एवं ऋषि परंपरा के संवाहक संत गुरु घासीदास बाबा जी चरणों में कोटि नमन करके किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रारंभ एक दूसरे में विद्यमान ब्रह्म को प्रणाम करने से होता है। शिक्षा अहंकार का संहार करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भाषा के सामर्थ्य को बल देने के साथ भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में प्रस्थापित करने का प्रयास है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मूल उद्देश्य वैचारिक एवं बौद्धिक रूप से भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक बनाना है। शब्द से दिशा तय होती है। भारतीय समाज अनार की तरह है जिसका प्रत्येक दाना स्वतंत्र होते हुए भी एक सूत्र में बंधा हुआ है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. दीपक कोईराला राष्ट्रीय सह-प्रमुख गुरुकुल प्रकोष्ठ भारतीय शिक्षण मंडल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में गुरुकुल शिक्षा पद्धति की भूमिका पर प्रकाश डाला। हमारे पुरातन गौरवशाली एवं वैभवशाली शिक्षण व्यवस्था को सुनियोजित तरीके से नष्ट किया गया है जिसे पुनः स्थापित करने का कार्य यह नीति करती है। देश-विदेश में कुल दस हजार गुरुकुल संचालित है। गुरुकुल शिक्षण पद्धति में विद्या, कला एवं कौशल विकास को क्रमबद्ध एवं चरणबद्ध तरीके से सिखाया जाता है।
विशिष्ट अतिथि महेश दाबक संयुक्त महासचिव भारतीय शिक्षण मंडल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्यवन में नीति आयोग की अहम भूमिका बताई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शोध, अनुसंधान एवं नवाचार के लिए आवश्यक अनुदान का प्रावधान किया गया है।
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय एवं रिसर्च फॉर रिसर्जेंस फाउंडेशन (आरएफआरएफ) भारतीय शिक्षण मंडल नागपुर के मध्य एमओयू हुआ। सीवी रमन विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. आर.पी. दुबे, महेद्र कर्मा वि.वि. बस्तर विश्वविद्यालय से प्रो. आनंद मूर्ति मिश्रा एवं ओपी जिंदल विश्वविद्यालय रायगढ़ से प्रो. के.एन. सिंह के मध्य भी सहयोग समझौता किया गया।

Next Story