वाराणसी: मणिकर्णिका घाट पर इस बार कोविड फॉर्मूले से मनेगी मसाने की होली, भीड़ पर पाबंदी, जानें क्या है वजह
Masane Ki Holi 2026 : काशी की प्रसिद्ध मसाने की होली पर इस साल सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने कड़ा पहरा लगा दिया है. मणिकर्णिका घाट पर चल रहे निर्माण कार्यों और जगह-जगह फैले नुकीले सरियों के कारण हादसे की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ पर पाबंदी लगा दी है. इस बार घाट पर केवल 15 से 20 लोगों को ही चिता भस्म से होली खेलने की अनुमति दी गई है, ताकि परंपरा भी बनी रहे और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो.

वाराणसी: मणिकर्णिका घाट पर इस बार कोविड फॉर्मूले से मनेगी मसाने की होली, भीड़ पर पाबंदी, जानें क्या है वजह
Varanasi Masane Ki Holi 2026 : वाराणसी : काशी की विश्वप्रसिद्ध मसाने की होली को लेकर इस साल प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है. मोक्षदायिनी मणिकर्णिका घाट पर चिता की भस्म से खेली जाने वाली इस अनोखी होली में इस बार भक्तों का रेला नजर नहीं आएगा. सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस और नगर निगम ने तय किया है कि इस बार मणिकर्णिका घाट पर केवल सीमित संख्या में लोग ही परंपरा का निर्वहन करेंगे. प्रशासन यहां कोविड काल जैसा फॉर्मूला लागू करने जा रहा है, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके.
नुकीले सरिए और निर्माण कार्य बने बड़ी बाधा
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर इन दिनों पुनरुद्धार और निर्माण का काम चल रहा है. इस वजह से घाट पर जगह बहुत कम बची है. जगह-जगह लोहे के नुकीले सरिए निकले हुए हैं और निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है. काशी जोन की पुलिस का मानना है कि ऐसे में अगर हजारों की भीड़ उमड़ती है, तो भगदड़ या चोट लगने का बड़ा खतरा हो सकता है. लोगों की जान जोखिम में न आए, इसलिए पुलिस ने केवल 15 से 20 लोगों को ही घाट पर होली खेलने की अनुमति देने पर सहमति जताई है.
परंपरा भी रहेगी और सुरक्षा भी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला परंपरा को रोकने के लिए नहीं बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से निभाने के लिए लिया गया है. जिस तरह कोरोना काल में बेहद कम लोगों की मौजूदगी में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाते थे, ठीक वैसी ही व्यवस्था इस बार मणिकर्णिका पर रहेगी. पुलिस ने नगर निगम को चिट्ठी लिखकर जानकारी दी है. ताकि घाट की वास्तविक स्थिति को देखते हुए घेराबंदी और सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता किए जा सकें.
आमतौर पर रंगभरी एकादशी के अगले दिन मणिकर्णिका घाट पर हजारों की संख्या में औघड़, नागा साधु और शिवभक्त भस्म से होली खेलने जुटते हैं. लेकिन इस साल घाट की भौगोलिक स्थिति और जारी निर्माण कार्यों ने प्रशासन के हाथ बांध दिए हैं. श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वो सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें और भीड़भाड़ से बचें.
मसाने की होली : काशी की अनोखी परंपरा
मसाने की होली दुनिया की सबसे अद्भुत परंपराओं में से एक है, जो केवल महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर देखने को मिलती है. मान्यताओं के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर काशी लाते हैं और भक्तों के साथ गुलाल से होली खेलते हैं, लेकिन श्मशान में रहने वाले भूत-पिशाच और अदृश्य आत्माएं इस उत्सव में शामिल नहीं हो पातीं. इसलिए, अगले दिन महादेव खुद मणिकर्णिका घाट पर आते हैं और अपने इन प्रिय गणों के साथ जलती चिताओं की राख से होली खेलते हैं. इसी परंपरा को निभाते हुए काशी के लोग और साधु-संत हर साल चिता की भस्म से होली मनाते हैं.
इस होली का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है. यह उत्सव जीवन और मृत्यु के बीच के अंतर को मिटा देने का प्रतीक है. जहाँ पूरी दुनिया होली को रंगों और खुशियों के त्योहार के रूप में मनाती है, वहीं काशी में चिता की भस्म से होली खेलकर यह संदेश दिया जाता है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक उत्सव है. यह परंपरा सिखाती है कि महादेव के दरबार में ऊंच-नीच या जीवन-मृत्यु का कोई भेदभाव नहीं है वे जितने खुश राजमहल में होते हैं, उतने ही मगन श्मशान की भस्म में भी रहते हैं.
