यूपी पुलिस का 'ऑपरेशन स्माइल': 15 दिन में खोजे 88,000 लापता लोग, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद एक्शन! जानिए कैसे हुआ यह कमाल!
Operation Smile : उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुमशुदा लोगों की तलाश में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देशन में चलाए गए विशेष ऑपरेशन स्माइल अभियान के तहत मात्र 15 दिनों के भीतर रिकॉर्ड 88 हजार से अधिक लापता लोगों को ट्रेस किया गया है. हाई कोर्ट की सख्ती के बाद शुरू हुए इस डिजिटल शुद्धिकरण अभियान से न केवल कागजों पर लंबित मामले सुलझे हैं, बल्कि प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों की बरामदगी दर भी अब 81 प्रतिशत पर पहुंच गई है.

यूपी पुलिस का 'ऑपरेशन स्माइल': 15 दिन में खोजे 88,000 लापता लोग, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद एक्शन! जानिए कैसे हुआ यह कमाल!
UP Police Missing Persons Campaign : लखनऊ : उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुमशुदा लोगों की तलाश में एक ऐसी कामयाबी हासिल की है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में चलाए गए ऑपरेशन स्माइल अभियान के तहत पुलिस ने महज 15 दिनों के भीतर 88,000 से ज्यादा लापता लोगों को ट्रेस कर लिया है. इनमें बड़ी संख्या उन महिलाओं और बच्चों की है, जिनके घर लौटने की उम्मीद टूट चुकी थी.
फाइलों में कैद थे लापता, हकीकत में लौट आए थे घर
इस अभियान के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला सच भी सामने आया. जांच में पता चला कि 88,022 लोगों में से एक बड़ा हिस्सा ऐसा था, जो असल में बहुत पहले ही अपने घर सुरक्षित लौट चुका था. लेकिन, पुलिस के कागजों और डिजिटल रिकॉर्ड में उन्हें अब भी लापता ही दिखाया जा रहा था. वजह यह थी कि परिजन अपनों के मिलने के बाद पुलिस को सूचना देना भूल गए थे और पुलिस ने भी डेटा अपडेट नहीं किया था. डीजीपी के आदेश पर पुलिस ने अब इस डिजिटल डेटा का शुद्धिकरण कर दिया है, जिससे यूपी में गुमशुदा लोगों की बरामदगी का ग्राफ बढ़कर 81 प्रतिशत के पार पहुंच गया है.
कैसे मिली इतनी बड़ी सफलता?
1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच प्रदेश में करीब 1 लाख 8 हजार से ज्यादा लोग लापता थे. हाई कोर्ट की सख्ती के बाद डीजीपी राजीव कृष्ण ने इसे चुनौती की तरह लिया और 1 फरवरी 2026 से प्रदेशव्यापी स्पेशल ड्राइव शुरू की.
हर जिले में विशेष टीमें बनाई गईं, जिन्होंने पुराने रिकॉर्ड खंगाले.
पुलिस टीम सीधे परिजनों के घर पहुंची और उनके संभावित ठिकानों पर तलाशी की.
दूसरे राज्यों की पुलिस से तालमेल बैठाकर लापता लोगों की लोकेशन ट्रेस की गई.
अब यक्ष ऐप और मिशन वात्सल्य से रहेगी पैनी नजर
भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए यूपी पुलिस अब हाईटेक हो गई है. डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि अब लापता बच्चों का पूरा ब्योरा भारत सरकार के मिशन वात्सल्य पोर्टल पर तुरंत अपलोड होगा. साथ ही, बीट स्तर के सिपाहियों को यक्ष ऐप की जिम्मेदारी दी गई है. इस ऐप के जरिए गुमशुदा लोगों की जानकारी सीधे सिपाही के मोबाइल पर मिलेगी, जिससे उन्हें ढूंढना आसान होगा.
डीजीपी ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर किसी गुमशुदगी के पीछे मानव तस्करी या किसी गिरोह का हाथ मिला, तो फौरन एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को केस सौंप दिया जाएगा. अब हर महीने जिलों के कप्तान खुद इन मामलों की समीक्षा करेंगे ताकि यूपी में कोई भी बच्चा या महिला अपनों से दूर न रहे.
क्या हैं ऑपरेशन स्माइल अभियान
ऑपरेशन स्माइल मुख्य रूप से गुमशुदा बच्चों को ढूंढने और उन्हें उनके परिवार से मिलाने के लिए चलाया जाने वाला एक राष्ट्रव्यापी विशेष अभियान है. इसकी शुरुआत गृह मंत्रालय के निर्देश पर की गई थी, जिसमें पुलिस विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर काम करते हैं. इस अभियान के तहत पुलिस टीमें रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों, धार्मिक स्थलों, ढाबों और आश्रय गृहों पर तलाशी लेती हैं, जहाँ लावारिस या भटकते हुए बच्चे मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है. पुलिस अधिकारी सादे कपड़ों में बच्चों से प्यार और सहानुभूति के साथ बात करते हैं ताकि उनके घर का पता लगाया जा सके और उन्हें बाल तस्करी जैसे अपराधों से बचाया जा सके.
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजिटल और तकनीकी तालमेल है. पुलिस ट्रैक द मिसिंग चाइल्ड जैसे पोर्टल और चेहरा पहचानने वाली तकनीक का इस्तेमाल करती है, जिससे सालों पहले लापता हुए बच्चों की पहचान भी संभव हो पाती है. इसके अलावा, जो बच्चे मिल जाते हैं उन्हें सीधे घर भेजने के बजाय पहले उनकी काउंसिलिंग की जाती है और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उनके माता-पिता को सौंपा जाता है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में ऑपरेशन स्माइल ने हजारों परिवारों की खुशियां लौटाई हैं, जिससे यह न केवल एक पुलिस कार्रवाई, बल्कि एक मानवीय सेवा का बड़ा माध्यम बन गया है.
